आलस को दूर भगाने की बेहतरीन टिप्स

2009

नमस्ते दोस्तों! जागरूक में आपका स्वागत है. आज हम एक बहुत ही आम समस्या पर चर्चा करेंगे. ”आलस को दूर कैसे करे?” यह एक ऐसी समस्या है जो किसी ना किसी मात्रा में हर इंसान में होती है. बच्चे भी इस समस्या का सामना कर रहे है. हम सब जानते है आलस मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है. फिर ऐसा क्या कारण है जो इसकी चपेट में हर इंसान है. आलस एक ऐसा पत्थर है जो हमारी सफलता का मार्ग बार-बार रोकता है. लेकिन आपको इस पत्थर को दरकिनार कर आगे बढ़ना है. साहस और हौसला आलस का सबसे बड़ा शत्रु है. अपने वर्तमान और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए आपको आलस रूपी पत्थर को दूर करना ही होगा. यह कोई विकल्प नहीं है यह सफलता की जरूरत है.

आइये पहले यह जाने की इस आलस के कारण क्या-क्या है –

* इसमें कोई संदेह नहीं की आज की आधुनिक जीवनशैली इसका बहुत बड़ा कारण है. इस तकनीकी युग में अधिकांश कार्य करने इतने सरल हो गये है की मनुष्य को शारीरिक श्रम तक नहीं करना पड़ता. आधुनिकता ने मानव समाज को एक ऐसा रोग दिया है जिसका शिकार सभी हो रहे है और इससे बाहर निकलना भी मुश्किल होते जा रहा है. तकनीकी युग में जीना हमारे लिए गर्व की बात है लेकिन इसका गलत इस्तेमाल करके सेहत के साथ खिलवाड़ करना अनुचित है.

* जब नींद पूरी नहीं होती है तो आलस घर कर लेता है. पूरे दिन काम में मन नहीं लगता और हम तनाव में आ जाते है. नींद की कमी से थकान का आना निश्चित है जिससे हम कार्य को कल पर छोड़ देते है और फिर उस काम को करने से कतराते रहते है. उस काम में मन नहीं लगता, यूँ ही समय को गवां देना या अधिक सोना जैसे कई बहाने को अपना हथियार बनाते है.

* अनियमित जीवनशैली यानी समय पर भोजन ना करना या जरूरत से ज्यादा भोजन कर लेने से भी आलस घेर लेता है और पूरे दिन परेशान होना पड़ता है. धीरे-धीरे हम इस आलस को अपना व्यवहार समझने लगते है और हमें पता भी नहीं चलता की हम इसके शिकार हो चुके है.

* अगर आप हर वक्त नेगेटिव थिंकिंग रखते है तो आप बहुत जल्द इसके शिकार हो जाएंगे. क्योंकि नेगेटिव थिंकिंग और आलस एक दूसरे के पूरक है.

* अस्त-व्यस्त जीवन आलस्य का सबसे अच्छा दोस्त होता है. अगर आप छोटे-मोटे कामों को भी बहुत बड़ा समझते है तो आपको वह काम बहुत मुश्किल लगने लगता है और आप उस काम से खुद को बचाते है जो आलस्य की निशानी है.

* विशेषज्ञों के अनुसार मनुष्य के मन का डर आलस को जन्म देता है… उदाहरण के तौर पर (अगर मनुष्य का मन किसी काम को करने में नहीं लगता तो वह उससे बचने का बहाना खोजता है.) कुछ न करना, असफलता का डर, निराशा, दूसरों की निंदा, असंतुष्टि, प्रेरणा इन्स्पिरेशन की कमी व तर्क से बचने की कोशिश में कुछ ना करना भी आलस का कारण है.

एक हद तक आलस हमें आरामदायक लगता है, खुशी व शुकून देता है, दुःख नहीं देता. लेकिन एक अंतराल के बाद लगातार काम से बचना हमें खुशी से ज्यादा मन को बेचैनी व पछतावे का दर्द देता है. क्योंकि काम को टालने से काम का बोझ कम नहीं होता, बल्कि यह इतना बढ़ जाता है कि हमें स्वार्थी बना देता है. हम अपना कार्यभार दूसरों पर थोपने लग जाते है. इतना ही नही हम अपने व अपने कार्य और अपनों के लिए भी अच्छा महसूस नहीं करते. आलस हमें नकारात्मकता से बाँधे रखता है, ऐसा करने से बचे.

आलस को दूर करने के लिए आपको सबसे पहले यह स्वीकारना होगा की आप भी आलस के शिकार है. ऐसा सोचने के बाद ही आप अपने आलस के उचित कारणों और निवारणों को खोज पाएंगे. यह एक ऐसा शब्द है जो किसी भी क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ने देता. क्योंकि आलस्य मनुष्य के व्यक्तित्व को बुरी तरह से प्रभावित करता हैं. आलस के साथ उबाऊ जीवन जीने से अच्छा है आप अपने आलस को दूर करने के उचित उपाय को जाने. हम कुछ उपाय का सुझाव देंगे. आप देखिए आपके लिए कौन सा उपाय सटीक है.

आलस्य को दूर करने के असरदार उपाय –

1. नींद का समय निश्चित करे – हर दिन तय समय पर सोने और उठने की आदत होनी अनिवार्य है. एक पर्याप्त नींद से आलस जैसी समस्या से छुटकारा मिल जाता है.

2. व्यायाम और हल्का भोजन – फैट, शुगर और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर गरिष्ठ भोजन से आलस को पनपने का मौका मिलता है. इसलिए प्रतिदिन अपने आहार में हल्के भोजन का चुनाव करे. व्यायाम से शरीर का आलस ही नही बल्कि मानसिक आलस भी दूर होता है. शरीर के साथ दिमाग भी सक्रिय हो जाता है. हर दिन 15 मिनट की नियमित कसरत से चयापचय कार्य और रक्त संचार का कार्य सुचारू रूप से होता है. व्यायाम शारीरिक श्रम के बराबर होता है जिससे शरीर में फुर्ती बनी रहती है और आलस्य से मुक्ति मिलती हैं.

3. फायदा सोचे – जिस काम को आप आलस के कारण नहीं कर पा रहे उस काम के होने के बाद के फायदे को सोचे. ऐसा करने से आपके मन में उस काम को जल्द करने की इच्छा जागृत होगी और आप एक्टिव हो जाएँगे. किसी भी कार्य का परिणाम आपसे कुछ भी करवा सकता है. अपना ध्यान सिर्फ लाभ पर केंद्रित करें और आलस्‍य पर काबू पाने के लिए खुद को पुरस्‍कृत करना ना भूले. यह भी सोचें कि आलस्‍य का शिकार होकर क्‍या-क्‍या नुकसान हो सकता है. आपका इस तरह से सोचना आपको लाभ की ओर प्रेरित करेगा.

4. काम की प्राथमिकता तय करे – अधूरे काम को पूरा करके ही हम जिंदगी का असली सुकून प्राप्त कर सकते है. कार्य में सफलता मिलेगी या असफलता इसकी चिंता किए बगैर कार्य पर एकाग्रता दिखाइए. एक साथ कई कामों को अंजाम देने से अच्छा है एक वक्त में एक या दो काम को करने की कोशिश करे. इससे काम भी जल्दी होगा और आपका काम के प्रति उत्साह भी बना रहेगा. जहाँ उत्साह होता है वहाँ भला आलस का क्या काम!! बस आपको यह समझना है काम की शुरुआत कहाँ से और कैसे करे. सब चीजों को व्‍यवस्थित कर आप कठिन काम को भी आसान बना सकते हैं. आप भी जानते है किसी काम को परिपक्वता के साथ करने के लिए आयोजन बहुत जरूरी हैं. फिर देखिए आप कितने आत्मविश्वास और खुशी से अनगिनत टास्क को पूरा करते जाएँगे.

5. काम के दौरान आराम जरूरी – बड़े काम को सामने देखकर भी आलस आने लगता है. ऐसी स्थिति में काम को कई टुकड़ों में बाट ले और क्रम से सभी काम को करते जाए. आपको महसूस होगा आपका आत्मविश्वास पहले की तुलना में बढ़ गया है और अब आपको वही मुश्किल काम आसान लगने लगेगा. लेकिन किसी भी काम को लगातार ना करे. ऐसी आदत से थकान और आलस दोनों साथ में आपको घेर लेती है. विज्ञान के अनुसार 50 मिनट के काम के बाद 10 मिनट का आराम जरूरी है. इसलिए कार्य के बीच-बीच में थोड़ा आराम ले. इससे कार्य के दौरान आलस नहीं आएगा और आप कार्य के प्रति पहले से अधिक ऊर्जावान महसूस करेंगे.

6. आज नहीं कल की आदत छोड़े – टाल मटोल वास्तव में आलस का ही प्रतिरूप है. किसी भी काम को बार-बार टालने की आदत कब लत बन जाती है यह पता भी नहीं चलता. इसलिए इस आदत से खुद को बचाईए. आज का काम कल पर ना छोड़िए.

7. लक्ष्य बनाए – किसी भी काम की शुरुआत थोड़ी मुश्किल होती है. लेकिन लक्ष्य को पूरा करने के लिए खुद को प्रेरित करे. आप अपना दैनिक लक्ष्य बना कर स्वयं को आलस्य से निपटने के लिए तैयार कर सकते हो. क्योंकि दृढ़ता के साथ बनाया गया लक्ष्य आपको भटकने नहीं देगा. जब भी आपको आलस महसूस हो तो इन असरदार शब्दों का प्रयोग तुरंत करे. जैसे – मैं पॉजिटिव हूँ, मैं सफल हूँ, मुझमें बहुत ऊर्जा है, मैं बहुत मेहनती हूँ, मैं रचनात्मक हूँ, मैं एक्टिव हूँ आदि. यह जादुई शब्द आपको अंदर से बहुत उत्साहित करेंगे और आप भूल जाएँगे की आलस किस चिड़ियाँ का नाम हैं.

8. स्वयं को प्रेरित करे – कई जरूरी कार्यो के होते हुए भी अगर आपको आलस आ रहा है तो खुद को प्रेरित करे. कहते है टाइम ईज़ मनी! यह सही भी है. आप यह सोचे जो भी समय आप आलस में बेकार कर रहे है उतना ही आप पैसा खो रहे है और भला अपना पैसा कौन खोना चाहता है. आप जिस भी सफल व्यक्ति को अपना आदर्श मानते है उनके बारे में सोचे की कैसे सफल लोगों को आलस्‍य कभी जीत नहीं पाया. उनके बारे में पढ़े की कैसे दैनिक चुनौतियों के साथ लड़कर भी सफल हो पाए और कैसे अपने आलस को दूर कर पाए. जानें कैसे वे लोग खुद को एक्टिव रख पाते है और निरंतर आगे बढ़ते रहते है. ऐसी सोच और जानकारी आपको आलस से कोसों दूर रखेगी. यह भी ख्याल रखे समय सबके लिए सीमित है इसे यूज़ करना है आलस में गवाना नहीं हैं.

9. अपने काम से प्यार करे – दोस्तों, जिस काम में प्यार जुड़ जाए वहाँ आलस की कोई जगह नहीं होती. इसलिए आप जो भी काम करते है उससे प्यार कीजिए. प्रतिदिन अपने कार्य की लिस्ट तैयार करे और उसे अपना टारगेट बनाए. जैसा की आप जानते है सामने जब कोई टारगेट होता है तो आलस वहाँ टिक नहीं पाता. अगर किसी भी काम को प्लानिंग के साथ किया जाए तो आलस नहीं आता बल्कि उस काम में मन लगता है. प्लानिंग में उतना ही काम जोड़े जितना आप आराम से कर सके. अस्त-व्यस्त जीवन से निराशा और आलस ही आता है. लेकिन प्लानिंग के साथ काम करने से आपको पता होता है कौन सा काम कब और कैसे करना है. ऐसा करने से आप अपने काम को प्यार करने लगेंगे.

10. पॉजिटिव रहे – परिस्थिति चाहे जैसी भी हो हमेशा पॉजिटिव रहे. क्योंकि नेगेटिव रह कर भी आप परिस्थिति को बदल नहीं सकते. जबकि आलस नेगेटिव थिंकिंग का ही परिणाम है. इसलिए हमेशा सकारात्मक रहे और आलस को दूर भगाए. संगीत से दिमाग सक्रिय हो जाता है इसलिए जब भी आलस महसूस हो संगीत जरूर सुने.

11. कुछ नया करे – हमेशा एक जैसा काम करने से भी आलस आने लगता है. उस कार्य के प्रति आप बोरिंग फील करने लगते हो. इसलिए कभी-कभी अपनी पसंद का कुछ क्रियेटिव काम करे. जिसे कर के आप कुछ अच्छा फील करे. हफ्ते या महीने में कही घूमने जाए. ऐसी आदत आपको अपने कार्य के प्रति समर्पित करेगी की काम तो करना है आलस में कुछ नहीं रखा. क्योंकि काम पूरा होगा तभी आप कुछ नया कर पाओगे या घूमने जा सकोगे.

12. कुछ घरेलू टिप्स – आलस महसूस होने पर दो लोंग या दो छोटी हरी इलायची को चबाए. तब तक चबाते रहे जब तक मुँह में लार ना बनने लगे. इन्हें चबाने से दिमाग की नसे सक्रिय हो जाती है. अदरक वाली काली चाय या ग्रीन टी का सेवन करे. आलस आने पर चलना शुरू कर दे और कुछ ऐसा प्रोग्राम देखे जिससे आपको खुशी मिले. ऐसा करने पर आप खुद में तरोताजा फील करेंगे.

शरीर में कभी-कभी आलस्य का आना स्वाभाविक हो सकता है. क्योंकि शरीर को भी कई बार आराम की आवश्यकता पड़ती है. लेकिन यही समस्या बार-बार हो तो इसका मतलब व्यक्ति ने अपनी मानसिकता बना रखी है की कोई काम खुद से नहीं करना है बल्कि दूसरों से करवाना है. ऐसा करके आप दूसरों पर निर्भर हो रहे हो. आलस्य की समस्या किसी बीमारी का कारण भी हो सकती है इसलिए अपनी रूटीन जाँच करवाते रहे. कर्म प्रधान शरीर के आगे आलस्य नहीं टिकता. इसलिए स्वयं के बारे में आंकलन जरूर करे. अपनी आदतें और अपने काम करने के तरीकों में बदलाव जरूर करे. यही बदलाव आपको आगे तक लेकर जाएगा. अनावश्यक विचारों से खुद को मुक्त करे. क्योंकि जितना कम हमारे अंदर बिखराव होगा उतना ही हम स्वयं पर कंट्रोल कर पाएँगे. आलस भी कंट्रोल करने लायक है. इसे मानव समाज का शत्रु ही नहीं बल्कि अभिश्राप माना गया है. आलसी लोगों को समाज कभी स्वीकार नहीं करता. लेकिन आज यही समस्या युवा पीढ़ी को भी निगल रही है. समय रहते स्वयं भी बदले और अपने बच्चों के समक्ष उनका आदर्श बने.

दोस्तों! हमने यह आर्टिकल अपने प्रैक्टिकल अनुभव व ज्ञान के आधार पर आपके साथ शेयर किया है. इन उपायों को अपने बेहतर और अच्छी लाइफ के लिए फॉलो कीजिए. अगर एक उपाय काम ना करे तो दूसरें उपाय को करे. लेकिन हार ना माने और अपने आलस को कभी खुद पर हावी ना होने दे. क्योंकि मान लो तो हार है, ठान लो तो जीत है. किसी भी आदत को बदलने में थोड़ी मुश्किलों का आना संभव है लेकिन कोशिश कुछ भी कर सकती है. आपकी यह आदत आपको सफलता का सूर्य दिखाएगी.

आपको यह लेख कैसा लगा. अगर इस लेख से आपको कोई भी मदद मिलती है तो हमें बहुत खुशी होगी. अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे. हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ है. हमेशा स्वस्थ रहे और खुश रहे.

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