एसिड रेन क्या है और इससे क्या नुकसान हो सकते हैं

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हमारे वायुमंडल में ऐसी कई चीजें होती रहती हैं जिनका कुछ समय पहले तक लोगों को ठीक ठीक कारण नहीं पता था। ऐसी ही एक घटना है एसिड रेन जो वायुमंडल में एसिड की मात्रा बढ़ जाने के कारण होती है और ऐसे में जब बारिश होती है तो उसकी अम्लीयता काफी ज्यादा होती है। वैसे तो बारिश का मौसम आते ही सब खुश हो जाते हैं और उसमें भीगने का लुत्फ़ उठाने लगते हैं। लेकिन आपको बता दें की सभी तरह की बारिश इंसानों और पर्यावरण के लिए फायदेमंद नहीं होती है। एसिड रेन से इंसान और पर्यावरण दोनों को ही नुकसान है।

क्या है एसिड रेन : आमतौर पर जो बारिश होती है उसके पानी का पीएच लेवल 5.3 से 6.0 तक होता है लेकिन जब आस पास के वायुमंडल में सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा काफी बढ़ जाती है जो ये गैसें बारिश के पानी के साथ मिलकर उसे और ज्यादा अम्लीय बना देती हैं। शहर में मौजूद तमाम तरह की फैक्ट्री, कारखानों और गाड़ियों से निकलने वाला धुआं ही एसिड रेन के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। खासतौर पर ऐसे कारखाने जिनमें जीवाश्म ईधनों का प्रयोग ज्यादा होता है उनसे निकलने वाले धुएं से एसिड रेन या अम्ल वर्षा की सम्भावना बढ़ जाती है।

एसिड रेन से होने वाले नुकसान :
अगर आप एसिड रेन के संपर्क में आते हैं जो इससे आपके शरीर पर दाने निकल सकते हैं और साँसों से जुड़ी बीमारियां भी हो सकती हैं। खासतौर पर यह बारिश इंसानों के दिल और फेफड़ों के लिए बहुत हानिकारक है।

एसिड रेन का सबसे बुरा असर फसलों पर पड़ता है और इससे फसलों की पैदावार कम हो जाती है।

एसिड रेन का पानी जब झीलों और नदियों के पानी में मिलता है तो उस पानी को भी खराब कर देता है जिससे उस पानी में रहने वाले मछली और अन्य प्रजातियों पर बहुत बुरा असर पड़ता है। यहां तक की अधिक मात्रा में एसिड रेन होने से तालाब या नदी में मौजूद कई तरह की मछलियाँ मर जाती है।

यह बारिश हमारी इमारतों को भी नुकसान पहुंचाती है और इसी बारिश की वजह से आगरा में मौजूद ताजमहल के सफ़ेद संगमरमर अपनी सफेदी खोते जा रहे हैं।

बारिश का यह पानी यह धरती के अंदर स्थित जलस्रोत में मिलता है जो उसे भी पीने लायक नहीं रहने देता है।

एसिड रेन से बचने के उपाय :
सबसे पहले ऐसे कारखानों को बंद करना चाहिए जो ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं और जिनमें जीवाश्म ईधनों का प्रयोग किया जाता है। अगर देश के प्रमुख बड़े शहरों से ऐसे कारखानों को बंद कर दिया गया तो यकीन मानिए एसिड रेन को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। जीवाश्म इधनों की बजाय वे पवन उर्जा या सौर उर्जा का इस्तेमाल कर सकते हैं।

झीलों, नदियों और तालाबों को एसिड रेन के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए उनमें चूना पत्थर का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे लाइमिंग प्रक्रिया कहा जाता है हालाँकि ये थोड़ी मंहगी प्रक्रिया है लेकिन फिर भी उन जल स्रोतों में मौजूद जीवों की रक्षा के लिए इसे अमल में लाया जा सकता है।

बड़े शहरों में कार, गाड़ियों के अधिक आवागमन पर रोक लगाई जाए और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को ज्यादा बढ़ा दिया जाए। जब शहर में कम गाडियां चलेंगी तो वायु प्रदूषण भी बहुत कम होगा और एसिड रेन की सम्भावना कम हो जायेगी।

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