जानिए आंखों और आंसुओं के बीच का गहरा रिश्ता

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अगर आप से पूछा जाए कि ऐसी कौनसी बात है जो प्रयोगशाला में सिद्ध नहीं की जा सकती और जो इंसानों में पायी जाती है लेकिन जानवरों में नहीं, तो वो चीज़ है भावुक होकर रोना। डार्विन ने कहा था कि- ‘भावुकता के आंसू सिर्फ़ इंसान ही बहाते हैं।’ कोई चोट लगी हो या कोई तकलीफ और कभी जब ख़ुशी की अधिकता महसूस हो, हमारी आँखों से आँसू अपने आप निकल आते हैं। आइये आज आपको बताते हैं आँखों और आंसुओं के इस गहरे रिश्ते के बारे में-

आँखों की संरचना देख कर ही आप समझ जाते होंगे कि ये हमारे शरीर का एक नाज़ुक अंग है और आँसुओं का निकलना आँख में होने वाली किसी दिक्कत की ओर इशारा करता है। आँखों का नम बने रहना जरुरी होता है और आँखों की इसी नमी को बरकरार रखते है आंसू, जो आँख को साफ़ भी बनाये रखते हैं और कीटाणु रहित रखने में भी मदद करते हैं। ये आँख की अश्रु नलिकाओं से निकलने वाला तरल पदार्थ है जो पानी और नमक के मिश्रण से बना होता है।

रोने के लिए सिर्फ चोट या तकलीफ ही कारण नहीं होती बल्कि कई ऐसे कारण भी होते हैं जो इंसान को रोने के लिए प्रेरित करते हैं और ऐसा करके व्यक्ति अपने मन को हल्का भी महसूस करने लगता है। अपनी व्यक्तिगत भावनाओं से जुड़ी कोई बात या वस्तु देखने पर सहज ही आँखों से आँसू निकल आते हैं। कई अंतरराष्ट्रीय सर्वे बताते हैं कि – संगीत सुनकर कितने लोग रोते हैं तो 90 फीसदी लोग हाथ उठा देते हैं। कविता से जुड़कर 60 फीसदी और किसी अच्छी पेंटिंग को देखकर 10 से 15 फ़ीसदी लोग रोते हैं।

ये जानकर आपको हैरानी जरूर होगी कि रोने की प्रवृत्ति भी अलग अलग संस्कृति के अनुसार अलग अलग ही होती है। अगर देश के लिहाज से देखें तो आदमी और औरत, दोनों के रोने के लिहाज से अमरीका सबसे ऊपर है। सबसे कम रोने वालों में पुरुष बुल्गारिया के हैं तो औरतें आइसलैंड और रोमानिया की।

ये आंसू मेरे दिल की ज़ुबान है… सच ही तो है, आंसुओं का बहना आपके मन के अहसासों से भी तो जुड़ा होता है। अक्सर आप ये सोचकर अपने आंसू छुपा लेते हैं कि ऐसा करने से आपके आत्मसम्मान को चोट पहुंच सकती हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि रोना आपकी सेहत के लिए फायदेमंद भी है, इसलिए इसे अपनी कमज़ोरी समझने की बजाये कुछ मौकों पर आँसुओ को बहने भी दीजिये क्यूँकि रोने से आपके आत्मसम्मान की भावना मजबूत भी हो सकती है जिससे आप मानसिक रूप से खुद को मजबूत महसूस कर पाएंगे।

रिसर्च बताते हैं कि जो व्यक्ति अपनी हार पर रोते हैं, वो उन लोगों से कहीं अधिक मजबूत महसूस करते हैं जो रोने को कमजोरी समझकर कभी नहीं रोते।

अब तो आप जान ही गए हैं कि आँसू आना कोई कमज़ोरी नहीं है और न ही आँसू बहाना सिर्फ औरतों से सम्बन्ध रखता है बल्कि आँखों से बहने वाले आँसू न केवल आपकी आँखों की सुरक्षा करते हैं बल्कि आपको मानसिक रूप से मजूबत बनाने में भी सहायक है। तो अब से.. ख़ुशी और गम की जो भी स्थिति आये, अपनी आँखों से आँसू बह जाने दीजिये और ऐसा करने पर आप पाएंगे कि आप पहले से कहीं ज़्यादा बेहतर महसूस कर रहे हैं।

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