अवचेतन मन के बारे में कुछ आश्चर्यजनक रहस्य

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हमारे मन की दो शक्तियां होती हैं-चेतन और अवचेतन। हमारा मन इन्ही दो शक्तियों से कार्य करता है। चेतन मन की शक्तियां सीमित हैं जबकि अवचेतन मन की शक्तियां अपार हैं। देखा जाए तो हमारे चेतन मन की शक्तियां महज बारह प्रतिशत ही है जबकि हमारे अवचेतन मन की शक्ति 88 प्रतिशत होती है। हमारे अवचेतन मन में छिपे नकारात्मक विचारों के कारण ही हमारे मन में गुस्सा, नफरत, द्वेष, हिंसा, पाप आदि बुरी भावनाएं दिखाई देती है। जब मनुष्य अपनी इन नकारात्मक भावनाओं को प्रकट नहीं करता है और इन्हें दबाकर रखता है तो इससे हमारे शरीर का केमिकल रिएक्शन प्रभावित होता है और मनुष्य तनाव और हृदय रोग सहित कई बीमारियों का शिकार हो जाता है।

कैसे काम करता है हमारा अवचेतन मन : हमारा अवचेतन मन कभी नहीं सोता है। यह हर समय जगता और कार्य करता रहता है। हम अपने अवचेतन शक्ति का प्रयोग हर पल जरूरी कार्यों जैसै पलकों के झपकाने, सांस लेने, हृदय की धड़कने आदि में करते है। इसके लिए हमें सोचने या दिमाग लगाने की जरूरत नहीं होती है और यह अपना काम स्वतः करता है। इसमें हमारे चेतन मन का कोई रोल नहीं होता है।

हमारे अवचेतन मन के पास सोचने विचारने और निर्णय लेने की शक्ति नहीं होती है इसलिए हमारे दिमाग में आ रही बातों पर यह निर्णय लेने में सक्षम नहीं होता है कि वह सही है या गलत। यह तर्कहीन होता है और किसी बात को आसानी से मान लेता है। लेकिन हमें अपने अवचेतन मन को ठीक रखने के लिए यह जरूरी है कि हम सकारात्मक सोचें। अगर हम नकारात्मक सोच रखते हैं तो यह कई रूपों में हमें हानि पहुंचाता है।

कुछ लोग भाग्य के भरोसे बैठे होते हैं और मेहनत करने में विश्वास नहीं करते हैं। यह हमारे अवचेतन मन को इतनी बुरी तरह प्रभावित करता है कि इस विचारधारा को अपनाकर हम जीवन में कभी भी सफल नहीं हो पाते हैं। कभी-कभी हम बेवजह उदास हो जाते हैं या किसी काम में मन नहीं लगता है। अगर ठीक उसी वक्त हम खुद को उस अवस्था से बाहर नहीं निकालना सीखेंगे तो हमारे अवचेतन मन को ऐसी नकारात्मक चीजों की आदत हो जाएगी और हम रास्ता तलाशने की बजाय भाग्य को कोसते हुए आंसू बहाएंगे।

जीवन में हमारी सफलता और असफलता के पीछे हमारा अवचेतन मन ही होता है। कुछ लोगों को नाव में बैठकर नदी पार करने में डर लगता है। यह बात उनके अवचेतन मन में बैठी रहती है कि यदि वे नाव में बैठेंगे तो नाव कभी भी नदी में डूब जाएगी और वे मर जाएंगे। ऐसी बातों को अपने अवचेतन मन से निकालकर ही व्यक्ति अपने डर पर जीत हासिल कर सकता है।

हमारा अवचेतन मन कई विशेषताओं से भरा है- अगर आप बुरी से बुरी परिस्थिति में भी सकारात्मक सोच बनाए रखते हैं तो आप पाएंगे कि धीरे-धीरे परिस्थितियां आपके अनुकूल होने लगती हैं। कभी-कभी हम गाड़ी चलाते वक्त अपने बगल में बैठे मित्र से बातें करते या फिर गाना सुनते हुए ड्राइव करते हैं। यह हमारे अवचेतन मन का ही कमाल होता है कि बात करने में व्यस्त रहने के बावजूद हम सही रास्ते पर जा रहे होते हैं। हम अंधेरे में बैठकर भी खाना खा लेते हैं खाना सीधे हमारे मुंह में ही जाता है। यह हमारे अवचेतन मन के कारण ही होता है। यदि हम मुंह की बजाय नाक में खाना भरने जा रहे हों तो हमारे चेतन मन की इंद्रियां तुरंत सक्रिय हो जाती हैं और हमें सही रास्ता दिखाती हैं।

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