बच्चों को बनाने दें स्वयं का बजट

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बच्चों को हम उनके मनमर्जी के खर्च के लिए पॉकेट मनी जिन्हे वो अपनी जरुरत के मुताबिक खर्च करते हैं लेकिन अगर गौर किया जाये तो वो अक्सर उनसे फिजूलखर्ची ही करते हैं और पेरेंट्स भी इस बात पर गौर नहीं करते की उन्होंने बच्चों को किस महीने कितने पैसे दिए हैं ! पेरेंट्स घर चलाने के लिए खुद तो बजट बनाते हैं लेकिन ये चीज़ कभी बच्चों को नहीं सिखाते जबकि बच्चों के बेहतर भविष्य और उन्हें बजट की सीख देने के लिए बजट बनाने के बारे में सीखना चाहिए !

बच्चों को टीनएज से ही घर के बजट की जानकारी देनी चाहिए तभी वो धीरे-धीरे पैसे और खर्चो के हिसाब में माहिर होंगे और बजट का महत्व समझेंगे ! इससे वो अपनी पॉकेट मनी का सही तरीके से इस्तेमाल करना सीखेंगे जिससे उनकी जरूरतें भी पूरी होंगी और वो बचत करना भी सीखेंगे ! आइये जानते हैं बच्चों को स्वयं का बजट बनाना कैसे सिखाएं !

1. बच्चों को जब भी पॉकेट मनी दें तो उन्हें उनकी जरूरतों के लिए उसी पैसे से खर्च करने को कहें इससे वो फिजूलखर्ची ना कर बचत करना सीखेंगे और अपनी आवश्यकता की पूर्ति उसी बजट में करना सीखेंगे !

2. बच्चों को सेविंग और खर्च में अंतर समझाना बेहद जरूरी होता है उदाहरण के तौर पर उन्हें समझाएं की अगर उन्हें कोई 100 रूपए का खिलौना लेना है तो वो अपने खर्च में से 10-20 रूपए बचाते रहें और जब उस बचत में 100 रूपए जमा हो जाएँ तब अपना खिलौना खरीदें ना की पहले खिलौने के लिए 100 रूपए खर्च करें और फिर सेविंग के बारे में सोचें, इससे बच्चों को सेविंग का महत्व समझ आएगा !

3. बच्चों को बजट के मुताबिक जरूरतों और सेविंग के लिए राशि जमा करने का एक आसान तरीका ये भी है की उनको एक नहीं बल्कि 3 गुल्लक बनाने को कहें जिसमे वो एक में अपने जरुरत के खर्चों के लिए पैसे जोड़ें दूसरे में बचत की राशि डालें और तीसरे गुल्लक में उन्हें दान के लिए भी कुछ राशि जमा करने को बोलें इससे उनमे दूसरों की मदद करने की भावना जगेगी !

4. बच्चों को ये जरूर समझाएं की किस जगह अपनी सेविंग खर्च करना सही है और किस जगह फिजूलखर्ची लेकिन उनकी जरूरतों पर खर्च करने का जिम्मा उन्हें ही दें ताकि वो अपनी जरूरतों के खर्च और बचत में सामंजस्य बिठाना सीखें !

5. इच्छाओं का कोई अंत नहीं ये बात सिर्फ बच्चों पर ही नहीं बल्कि बड़ों पर भी लागू होती है लेकिन जैसे हम अपनी सारी इच्छाएं एक साथ पूरी नहीं कर सकते वैसे ही बच्चों को भी सिखाएं की सभी इच्छाएं एक साथ पूरी नहीं हो सकती इसके लिए बच्चों को जरूरतों की प्राथमिकता समझाएं और उन्हें सिखाएं की छोटी छोटी बचत से हम धीरे धीरे अपनी प्राथमिक जरूरतों को पूरा करें !

6. बच्चों को जरुरत को पूरी करने के के लिए कीमत की तुलना करना भी सिखाएं ताकि वो सस्ते और महंगे के बीच अपनी जरूरतों के अनुसार चुनाव कर सकें और अपने बजट के अनुसार ही जहाँ जरुरत हो वहीँ पहले खर्च करें !

7. बच्चों को बजट बनाना और सेविंग करना सिखाना जरुरी है लेकिन साथ ही कुछ फैसले उन्हें खुद भी लेने दें और गलतियां करने दें क्योंकि गलतियों से भी वो बहुत कुछ सीखेंगे और फिर उन्हें उन गलतियों को सुधरने की सीख दें ताकि भविष्य में वो ऐसी गलतियां ना दोहराएं !

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