ये हैं भारत की सबसे कठिन धार्मिक यात्राएं

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भारत विभिन्न संस्कृतियों का देश है। यहां लोग पूजा-पाठ, भगवान में आस्था और धार्मिक यात्राओं को मुक्ति का द्वार मानते हैं। बस यही आस्था लोगों को पूरे भारत में स्थित मंदिरों और तीर्थस्थानों के दर्शन के लिए खींच ले जाती है। आस्था में वह शक्ति होती है जो कठिन से कठिन परिस्थियों में भी भक्तों के राह का रोड़ा नहीं बन पाती है। इसका सबसे ताजा उदाहरण है हाल ही में अमरनाथ यात्रियों पर हुआ आतंकी हमला। इस हमले में कई श्रद्धालुओं की जान चली गई फिर भी लोगों की आस्था कम नहीं हुई और इसके बाद श्रद्धालुओं के कई जत्थे ने अमरनाथ यात्रा पूरी कर दर्शन-पूजन संपन्न किया।

आइए जाने भारत की सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं के बारे में-

कैलाश मानसरोवर यात्रा-
कैलाश मानसरोवर की यात्रा भारत की सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में से एक माना जाता है। यहां पहुंचने का सबसे दुर्गम मार्ग भारत के पड़ोसी देश चीन से होकर गुजरता है। मानसरोवर कैलाश पर्वत से 20 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां हिन्दूओं के अलावा जैन और तिब्बती भी दर्शन के लिए जाते हैं।

अमरनाथ यात्रा-
जम्मू-कश्मीर में बाबा अमरनाथ की गुफा है। यह जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से 135 किमी दूरी पर स्थित है। यहां जाने से पहले यात्रियों को रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है। इसके अलावा यात्रा पर रवाना होने से पहले यात्रियों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाता है। यहां का तापमान ज्यादातर जीरो तक पहुंच जाता है। यहां भूस्खलन और तेज बारिश किसी भी वक्त हो सकती है। हाल ही में अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला भी हुआ था।

वैष्णो देवी मंदिर-
वैष्णो देवी का यह प्रसिद्ध मंदिर जम्मू-कश्मीर के कटरा जिले में स्थिल है। यह हिन्दुओं के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। कटरा से करीब 14 किलोमीटर तक की ऊंची चढ़ाई के बाद मां का मंदिर आता है। यह दुर्गम यात्राओं में से एक माना जाता है। कुछ यात्री पैदल ही इस चढ़ाई को पूरी करते हैं तो कुछ हेलीकॉप्टर का सहारा लेते हैं।

बद्रीनाथ मंदिर-
उत्तराखंड में स्थित बद्रीनाथ मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। यह मंदिर अलकनंदा नदी के किनारे नर और नारायण नाम की दो पर्वत श्रेणियों के मध्य स्थित है। बद्रीनाथ के रूप में यहां भगवान विष्णु की लंबी और काली मूर्ति की पूजा की जाती है। इस दुर्गम यात्रा को पूरी करने में यात्रियों को कई तरह की परेशानियों झेलनी पड़ती हैं।

हेमकुंड साहेब-
उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित हेमकुंड सिक्खों का सबसे पावन धाम है। यह मुख्य रूप से 19 किलोमीटर की एक दुर्गम पहाड़ी यात्रा है। इस यात्रा को पैदल या खच्चरों पर बैठकर पूरी की जाती है। इस यात्रा में यात्रियों को काफी जोखिम भी उठाना पड़ता है।

पावागढ़ महाकाली मंदिर-
गुजरात के चंपारण नाम की जगह पर पावागढ़ की पहाड़ी में महाकाली का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। वड़ोदरा से यह करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर ऊंची पहाड़ी चोटी पर स्थित है। करीब 5 किलोमीटर घने जंगलों से बीच से होते हुए इस मंदिर में पहुंचने का रास्ता है। इसकी चढ़ाई काफी दुर्गम है। अब यहां यात्रियों के लिए रोपवे की भी सुविधा उपलब्ध हो गई है।

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