डर को काबू करने के उपाय

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डर .. ये नाम सुनते ही आपको क्या महसूस होता है ? ख़ुशी या बेचैनी … स्वाभाविक है कि आपको बेचैनी ही होती है जब भी आप डर को महसूस करते हैं। डर हर इंसान से जुड़ी एक भावना है, एक ऐसी अनजान परिस्थिति जो हमें किसी अनहोनी का अहसास कराती है और हम बेचैन हो जाते है। हर इंसान के डर अलग अलग होते हैं जैसे किसी को पानी, अँधेरा या किसी जानवर से डर लगता है तो किसी को हार जाने का डर सताता है या फिर किसी अपने को खो देने का डर। ये डर ही है जो इंसान को आगे बढ़ने से रोकता है और इसके कारण व्यक्ति तनाव और निराशा का शिकार भी बन जाता है।

आपने एक फिल्म में ये जरुर सुना होगा कि जो डर गया समझो मर गया !! इसलिए डर को हावी होने देने से पहले ही ये जान लेना जरुरी है कि किन तरीकों से डर को अपनी ज़िन्दगी से अलविदा कहा जा सकता है तो चलिए, आज आपको बताते है डर को दूर करने के कारगर उपाय-

सकारात्मक सोच विकसित कीजिये –
किसी भी बुरे ख़याल के पीछे आपकी नकारात्मक सोच ही होती है जो डर का रूप ले लेती है। अच्छे विचारों से दूरी ही आपको डर के नजदीक ले जाती है। ऐसे में ये जरुरी हो जाता है कि आप अपनी सोच को सही दिशा में लगाए, इसके लिए आप ऐसे लोगों की संगत में रहिये जो सकारात्मक सोच रखते है इसके अलावा अच्छी किताबें भी आपको सकारात्मक सोच से भरने में कारगर सिद्ध होंगी।

संवाद है जरूरी –
अक्सर डर लगने पर हम ये सोच कर चुप रह जाते है कि लोग क्या सोचेंगे। लेकिन ऐसा सोचने की बजाये आपको अपने दोस्तों और परिवारजनों से इस बारे में बात करने की जरुरत होती है। ऐसा करने से आपके मन से डर कम हो जाता है और आप अपने आपको सुरक्षित महसूस करते है।

बीती बातों को भूलना ही बेहतर –
जैसे रेत को मुट्ठी में बाँध कर नहीं रखा जा सकता वैसे ही वक़्त को भी बाँधा नहीं जा सकता। लेकिन बीते समय में हुयी कोई दुर्घटना या कड़वे अनुभव हमारे लिए डर का रूप ले लेते है जो हमे आगे बढ़ने से रोकते है और इस तरह हमारा दायरा उस डर तक ही सीमित हो कर रह जाता है। ऐसे में जरुरी है कि पुरानी बातों को भूलकर आगे बढ़ा जाए।

भविष्य की चिंता न करें –
हम भले ही वर्तमान में रहते हो लेकिन हमारा मन आने वाले कल को लेकर चिंतित रहता है और यही चिंता डर का रूप ले लेती है। भविष्य में अपनी सेहत ,परिवार ,धन और सम्मान से जुड़े अनगिनत डर हमें घेरे रहते है और हम भविष्य में किसी अनहोनी से बचने के लिए वर्तमान में भी डर डर के जीते है। जो आज है वो कल नहीं आएगा, ऐसा सोच कर खुल कर जीना ही डर से दूर रख सकता है इसलिए भविष्य की चिंता करना छोड़ दीजिये।

अपना ध्यान लक्ष्य पर लगाए –
अक्सर निरुद्देश्य रहने की स्थिति डर को बढ़ाने में मददगार साबित होती है क्यूँकि मन में डर के विचार लगातार आते रहते है जो आपको मन से कमज़ोर बना सकते है। इस स्थिति से बचने के लिए आप अपना एक लक्ष्य बनाइये और अपना सारा ध्यान उस पर केंद्रित कर दीजिये। व्यस्त रहना भी डर को दूर रखने में कारगर साबित होता है और ऐसा करने से आपके व्यस्त मन में डरावने ख़याल अपनी जगह नहीं बना पाते ।

डर का सामना आत्मविश्वास से करें –
डर लगने की सबसे अहम वजह होती है डर के कारणों को न जान पाना। एक गहरी सांस लीजिये और अपने डर के सारे रूप लिख लीजिये फिर चाहे वो मकड़ी का डर हो या भीड़ के सामने बोल पाने का। ऐसा करने के बाद खुद पर यकीन कीजिये कि ये डर आपके मन की कल्पना मात्र है और आप में सामर्थ्य है कि आप इससे जीत सकते है। खुद पर विश्वास रखिये और एक एक करके हर डर का सामना कीजिये। कुछ वक़्त बाद आप पाएंगे कि आप डर से मुक्त हो चुके है।

मेडिटेशन करें –
डर का सीधा सम्बन्ध भले ही मन से हो लेकिन इसके दुष्प्रभाव शरीर पर भी दिखाई देते है। ध्यान मन की वो स्थिति है जिससे शान्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है और नियमित ध्यान करने से मन स्थिर हो जाता है और बुरे और डरावने ख़यालों का स्थान सुविचार ले लेते है।

डर भले ही एक नकारात्मक भावना हो लेकिन इसकी सीमित मात्रा आपके व्यवहार को संयमित भी करती है और असफल होने से बचाने के साथ साथ गलतियां करने से भी रोकती है।

अब आप जान चुके है कि डर सिर्फ एक मनःस्थिति है जिसे दूर करना आपके हाथ में है लेकिन इस बात का जरूर ख़याल रखे कि अगर आप डर की किसी गंभीर स्थिति से गुजर रहे है तो मनोचिकित्सक से सलाह लेने से न चूके। तो बस, देर किस बात की ! अभी से ही खुद पर यकीन रखना शुरू कर दीजिये और डर से डरना छोड़ दीजिये।

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