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इन भारतीय राजनेताओं की मृत्यु आज भी एक राज है

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यह इतिहास अपने आप में कई ऐसे राज छुपाए हुए हैं जिन पर से आजतक पर्दा नहीं उठाया जा सका है। हम आपको कुछ ऐसे ही राजनेताओं की मृत्यु से जुड़ी खबरें बताएंगे जो आज तक लोगों के लिए सिर्फ एक राज बनी हुई है। तो चलिए इन खबरों के बारे में विस्तारपूर्वक जानते हैं।

कांग्रेस लीडर संजय गांधी

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संजय गांधी से तो आप वाकिफ ही होंगे, संजय गांधी इंदिरा गांधी के बेटे और राजीव गांधी के भाई थे। उनकी मृत्यु एरोप्लेन क्रैश में हुई थी यह बताया जाता है कि 23 जून 1980 को मैं दिल्ली फ्लाइंग क्लब का एक नया एरोप्लेन उड़ा रहे थे तभी कुछ हवाई करतब दिखाते हुए सफदरजंग एयरपोर्ट के करीब कंट्रोल खो देने की वजह से उनका प्लेन क्रैश हो गया और उन्हें काफी गंभीर चोटें लगी जिसकी वजह से उनकी मृत्यु हो गई। संजय गांधी के पास पायलट का लाइसेंस होना और उनके साथ एक को पायलट होने के बाद भी दुर्घटना होना एक रहस्य बन कर रह गया। वहीं अन्य विमानों की तरह इस प्लेन क्रैश मैं ना तो प्लेन फटा और ना ही उसने आग पकड़ी यह माना जाता है कि राजनीति में उनके कई दुश्मन थे वहीं कई लोग तो इस मृत्यु के पीछे उन्हीं के किसी करीबी का हाथ मानते हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री

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यह बात तो किसी से छुपी हुई नहीं है कि भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में देश का प्रतिनिधित्व किया था। इसी युद्ध के दौरान उन्होंने “जय जवान जय किसान” का नारा भी दिया था जो आजतक दोहराया जाता है। यह युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच करीबन 10 जनवरी 1966 को ताशकंद(रूस) समझौते के बाद खत्म हो गया था। इस समझौते के अगले ही दिन 11 जनवरी 1966 को एक के बाद एक कई हार्ट अटैक की वजह से लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु हो गई। कई लोगों का यह मानना है कि उन्हें जहर दिया गया था क्योँकि मौत के बाद उनके शरीर भी नीला पड़ गया था। इस मामले में रशियन बटलर को गिरफ्तार भी किया गया था जिसे बाद में सबूतों के अभाव में छोड़ दिया गया लेकिन उनकी मृत्यू आज तक एक राज बनी हुई है।

भारतीय जनसंघ के जनक श्याम प्रसाद मुखर्जी

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भारतीय जनसंघ के जनक श्याम प्रसाद मुखर्जी संविधान की धारा 370 के तहत स्वतंत्र राज्य बनाने और अलग प्रधानमंत्री देने जैसे कई फैसलों के खिलाफ थे। इस बाबत उन्होंने कश्मीर में कई प्रदर्शन भी किए और गिरफ्तारी भी दी इसके बाद स्वास्थ्य में खराबी आने की वजह से 90 दिनों तक वह अस्पताल में रहे। उन्हें पेनिसिलीन से एलर्जी होने के बाद भी उन्हें पेनिसिलिन दी गई और 23 जून 1953 को उनकी मृत्यु हो गई। ध्यान देने वाली बात यह है कि उनका पोस्टमार्टम तक नहीं किया गया नेहरू क्योंकि उस समय के प्रधानमंत्री थे उन्होंने इस मृत्यु की जांच कराने से भी इंकार कर दिया जो आज तक एक प्रश्न बनकर खड़ा हुआ है। इसीलिए उनकी मृत्यु को भी एक साजिश ही माना जाता है।

सुभाष चंद्र बोस

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देश की आजादी में अहम भूमिका निभाने वाले सुभाष चंद्र बोस जी के बारे में कौन नहीं जानता लेकिन उनकी मृत्यु आज भी एक रहस्य बनी हुई है। उनकी मृत्यु से आज तक कई कहानियां लोगों के सामने आई लेकिन आज तक यह नहीं पता चल सका कि उनकी मृत्यु हुई कैसे थी। इसके लिए कई जांच समितियां भी बनाई गई लेकिन कोई भी नतीजा सामने नहीं आया। इतना ही नहीं उनके पार्थिव शरीर की राख भी आज तक सरकार जापान से नहीं ले पाई है।

पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह

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पंजाब में खालिस्तानियों को खदेड़े जाने के लिए बेअंत सिंह का नाम इतिहास में दर्ज है। लेकिन उन पर मानव अधिकारों के हनन के आरोप भी लगे थे 31 अगस्त 1995 को राज्य सचिवालय के बाहर बम ब्लास्ट में उनकी मौत हो गई। इस हादसे के साथ ही अन्य 14 लोगों जानें भी गई लेकिन आज तक इस आरोप में मुख्य आरोपी निर्धारित नहीं हुए हैं।

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