शतरंज के यह तथ्य आप नहीं जानते होंगे

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यह माना जाता है कि शतरंज दिमाग का खेल है और इसे खेल ना हर किसी के बस की बात नहीं है और यह भी कह सकते हैं कि हर इंसान इसमें दिलचस्पी भी नहीं दिखता। लेकिन आज हम आपको इससे जुड़े कुछ ऐसे तथ्य बताएंगे जिन्हें जानकर आप हैरान होजाएंगे तो चलिए इन तथ्यों को विस्तारपूर्वक जानते हैं।

इस खेल की शुरुआत भारत के गुप्त साम्राज्य द्वारा की गई थी। यह माना जाता है कि इस खेल को पहली बार नवी शताब्दी में खेला गया था। हालांकि तब से लेकर अब तक किस खेल में कई बदलाव किए गए हैं 1280 में प्यादों को दो कदम बढ़ाने का नियम शुरू हुआ था।

आपको यह बात सुनकर बहुत अजीब लगेगा कि शतरंज की मशीन का भी अविष्कार किया गया था। यह मशीन तुर्की में 1770 में बनाई गई थी इस मशीन कि यह खासियत थी कि इसमें आपके चेहरे के भाव के अनुसार मोहरे हिला करते थे। लेकिन इस मशीन को चलाना हर किसी के बस की बात नहीं थी इसीलिए इस मशीन का एक्सपर्ट ही इसको चलाता था।

यह माना जाता है कि जब इस खेल की शुरुआत हुई थी तब इस खेल में एक वर्ग ऐसा था जो पहला कदम तिरछा बढ़ाता था और दो कदम सीधा बढ़ाता था। इस मोहरे को परामर्शदाता भी कहा जाता था लेकिन जब गोरे लोगों ने इस खेल में रूचि बढ़ाई तो उन्होंने इस मोहरे का नाम रानी रख दिया उसके बाद से ही इस खेल में रानी का महत्व बढ़ गया।

यह बात तो जगजाहिर है कि शतरंज एक बहुत ही जटिलतम खेल है। यह खेल तब तक खत्म नहीं होगा जब तक दोनों प्रतिभागी इस में अपना पूर्ण दिमाग नहीं लगाएंगे। या यह भी कहा जा सकता है कि यह चालों का गेम नहीं बुद्धिमत्ता का गेम है।

आप शतरंज के खेल की तुलना मुक्केबाजी के खेल से भी कर सकते हैं क्योंकि इसमें भी दोनों धावक एक दूसरे के ऊपर प्रहार करते हैं और दूसरे को दबाने की कोशिश करते हैं।

आज के इस टेक्नोलॉजी के युग में थ्रीडी शतरंज स्टार ट्रेक के टीवी पर सबसे ज्यादा लोकप्रिय माना जाता है।

यह बात तो मानने वाली है कि अगर शतरंज में अपनी मर्जी के मुताबिक चालें होती तो यह खेल कब का लुप्त हो गया होता। चालों पर रखे गए नियम के कारण ही यह जटिल खेल बना और लोगों की रूचि इस खेल में बढ़ी। यह बात जानकर आप हैरान हो जाएंगे कि इस खेल में हजार से भी ज्यादा चले हो सकती हैं।

शतरंज के खेल में एक खेल होता है जिसका नाम होता है मूर्ख दोस्त। इस खेल में एक सदस्य दूसरे सदस्य को हराकर यह साबित करता है कि वह दिमागी रुप में उस से श्रेष्ठ है और उसके बाद उस दोस्त को मूर्ख कहा जाता है।

आप यह बात जानकर हैरान हो जाएंगे कि शतरंज के बोर्ड का अविष्कार एक पुजारी ने किया था क्योंकि उस समय में पादरियों ने इस खेल को खेलने से मना कर दिया था। तो पुजारी ने अपने चतुर दिमाग से एक शतरंज का बोर्ड बनाया और जब भी बस समय मिलता था तो वह इस खेल को खेलता था। इस बोर्ड को पुस्तक की भर्ती बनाया गया था ताकि आसानी से कहीं भी ले जाया जा सके।

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