एक हाथ और पैर गवाने के बाद भी कम नहीं हुआ हौसला

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जिंदगी जिंदादिली का नाम है यह बात आपने सुनी तो बहुत होगी लेकिन आज हम आपको यह दिखाने जा रहे हैं। कभी-कभी हम सभी को विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है लेकिन असली इंसान वही है जो इन सबसे बढ़कर अपने आप को साबित करें।

हम जिस इंसान के बारे में आपको बताने जा रहे हैं उन्होंने अपनी मेहनत मजदूरी से मिलने वाले फल को ही सर्वोपरि माना है। वह मेहनत करने में ही विश्वास करते हैं किसी के आगे हाथ फैलाना उनको गवारा नहीं। हरियाणा के कुरुक्षेत्र के रहने वाले पन्नू राम जिन्होंने अपनी गरीबी और दिव्यांग होने को अपने हौसलों के आगे नहीं आने दिया। वह जब मात्र 12 साल के थे तब उन्हें अपना एक पैर और हाथ गवाना पड़ा लेकिन इतनी विषम परिस्थितियों के होने के बावजूद भी उन्होंने कभी अपना हौसला नहीं हारा।

वह रिक्शा चलाकर जीवन यापन करते हैं उनका एक हाथ और पैर नहीं है फिर भी वह आसानी से रिक्शा चला लेते हैं और किसी पर भी निर्भर नहीं है। 2 वर्ष पहले उनकी पत्नी का देहांत हो गया था वह अपने दो बेटों राहुल और शुभम की परवरिश और उनकी जिम्मेदारी भी उठा रहे हैं। उनका यह सपना है कि उनके बच्चे पर एक बेहतर इंसान बने और किसी के आगे हाथ न फैलाएं। वो 1 दिन में 50 किलोमीटर रिक्शा चलाते हैं और करीबन 150 से 200 रूपये ही कमाते है वो मानते है की यह म्हणत की कमाई उन्हें एक सकूं देती है।

हम सलाम करते हैं ऐसे इंसान को जो अपनी सारी विषमताओं के बावजूद अपने जीवन को एक लक्ष्य के साथ जी रहा है हम आशा करते हैं आप सभी लोग उनसे प्रेरणा जरुर लेंगे।

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