जानिए हिन्दू धर्म में शव को क्यों जलाया जाता है

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हर धर्म की अपनी अपनी परम्पराएं और रीती रिवाज होते हैं इन्हीं में से एक रिवाज होता है किसी व्यक्ति की मौत हो जाने पर उसके मृत शरीर को नष्ट करने का और ये प्रक्रिया हर धर्म में अलग अलग तरीके से की जाती है ! जहाँ मुस्लिम और इसाई धर्म शव को दफनाया जाता है तो वहीँ हिन्दू धर्म में शव को जलाने का रिवाज होता है ! लेकिन क्या आप इसकी असली वजह जानते हैं की आखिर हिन्दू धर्म में शव को क्यों जलाया जाता है और इसके पीछे की क्या मान्यता है ? चलिए हम आपको बताते हैं हिन्दू धर्म में शव को जलाने के रिवाज की असली वजह के बारे में !

अंतिम संस्कार की प्रक्रिया
हिन्दू धर्म में सोलह संस्कार माने जाते हैं और इन्ही में से सबसे आखरी संस्कार होता है अंतिम संस्कार यानी दाह संस्कार ! दाह संस्कार में मृत व्यक्ति के शरीर को अर्थी पर उठाकर शमशान लाया जाता है और फिर उसके शव को पूरे विधि-विधान से अग्निदाह किया जाता है ! शवदाह पूरा होने के बाद मृतक की अस्थियों को किसी पवित्र जलस्त्रोत में बहाया जाता है, आमतौर पर अस्थियां गंगा में बहाना ज्यादा शुभ माना जाता है !

दाह-संस्कार का कारण?
दरअसल हिन्दू धर्म में मृत्यु को जीवन का अंत नहीं माना जाता बल्कि यह मान्यता होती है की एक जीवन समाप्त होने के बाद उस व्यक्ति की आत्मा उसका शरीर छोड़कर किसी नए रूप और शरीर में धारण होगी या उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी ! इसी कारण दाह संस्कार का रिवाज निभाया जाता है ! शस्त्रों में ये वर्णित है की जब तक मृत व्यक्ति के शरीर का अंतिम संस्कार नहीं होता तब तक उसे मोक्ष नहीं मिलता !

शास्त्रों में ये भी लिखा गया है मानव शरीर पंच तत्व से बना होता है और वो पांच तत्व होते हैं पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश और ऐसा माना जाता है की जब मृत व्यक्ति के शरीर को जलाया जाता है तो शरीर वापस इन्हीं पंच तत्वों में विलीन हो जाता है और आत्मा की मुक्ति हो जाती है !

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