ईमानदारी – जीवन का सत्य

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आपने अपने बचपन में लकड़हारे की कहानी तो ज़रूर पढ़ी और सुनी होगी। आज फिर से उस कहानी को दोहराते हैं। एक लकड़हारा जो लकड़ियाँ काटने जंगल में जाया करता था और उसके पास एक लकड़ी की कुल्हाड़ी थी जो एक दिन नदी में गिर गयी। लकड़हारा बहुत घबरा गया और भगवान से प्रार्थना करने लगा कि उसकी कुल्हाड़ी उसे वापिस लौटा दें क्योंकि उसी के ज़रिये वो अपनी जीविका चला पाता था। ऐसा सुनकर नदी में से एक देवी अपने हाथ में सोने, चाँदी और लकड़ी से बनी तीन कुल्हाड़ियाँ लेकर बाहर आयी और उन्होंने उस लकड़हारे से अपनी कुल्हाड़ी चुनने को कहा। लकड़हारा ईमानदार था इसलिए उसने सोने और चांदी की कुल्हाड़ियों को चुनने के बजाए अपनी साधारण सी लकड़ी की कुल्हाड़ी ही चुनी। उसकी इस ईमानदारी से जल की देवी बहुत प्रसन्न हुयी और उन्होंने लकड़हारे को तीनों ही कुल्हाड़ियाँ भेंट कर दी। इस कहानी का सार आज भी वही है जो आपके बचपन में हुआ करता था यानी ईमानदारी इंसान का सर्वश्रेष्ठ गुण हैं।

समय और काल भले ही बदलते रहें लेकिन इंसान के नैतिक गुण वही रहते हैं जिनमें से एक गुण है ईमानदार होना। अपने दायित्वों का पूरी नैतिकता और सच्चाई के साथ पालन करना ही ईमानदारी कहलाता है जिसमें छल-कपट के लिए कोई जगह नहीं होती। सिर्फ निःस्वार्थ भाव से अपने कर्तव्यों का बिना छल किये निर्वहन करना ही ईमानदारी है। चाहे सम्बन्धों की बात हो या व्यापार की या फिर दुनिया के भले की, ईमानदारी हर जगह हर समय होना अति आवश्यक है।

आज के समय में ये माना जाने लगा है कि ईमानदारी कोई गुण नहीं है बल्कि एक ऐसा अवगुण है जो इंसान को आगे नहीं बढ़ने देता, तरक्की नहीं करने देता और अभावों भरे जीवन की ओर धकेलता है लेकिन ये सच्चाई नहीं है।

ईमानदारी का गुण रखने वाला व्यक्ति अपने परिवार और अपने से जुड़े हर रिश्ते को पूरी ईमानदारी और सच्चाई के साथ निभाता है और आप ये जानते ही हैं कि रिश्तों में ईमानदारी और सच्चाई रखने से ही रिश्ते मजबूत बनते हैं और परिवारजन और मित्रों के साथ सम्बन्धों में पारदर्शिता आती हैं। जब जीवन का मूल उद्देश्य खुशी पाना ही है तो क्यों ना ईमानदारी के ज़रिए ही ख़ुशी को हासिल किया जाए।

आप अपने घर का राशन और आवश्यकता का सामान किन दुकानों से लाना पसंद करते हैं ? जो दुकानें ईमानदारी से हिसाब करती हैं या फिर उन दुकानों से जहाँ दुकानदार आप से बेहिसाब रुपये ऐंठना चाहता है। इसका जवाब यही है कि हम सभी ऐसे लोगों का साथ चाहते है जो ईमानदार हो। फिर चाहे बात व्यापार करने की हो या किसी से आवश्यकता की चीज़ें खरीदने की हो।

व्यापार करते समय अगर ईमानदारी बरती जाती है तो परिणाम हमेशा अच्छे ही मिलते हैं जबकि थोड़े से लालच या जल्दी लाभ कमाने की नीति अपनाने का विचार रखने पर शुरू में भले ही धन की बारिश होने लगे लेकिन जल्द ही ईमानदारी रहित उस व्यापार का पतन भी शुरू हो जायेगा क्योंकि जिस व्यापारी में ईमानदारी जैसे नैतिक मूल्य का ही अभाव हो, उसके साथ कोई भी व्यापार करने से कतराएगा, इसके साथ साथ स्वयं को असंतोष और ग्लानि भी महसूस होगी। कुछ ऐसा ही नौकरी के सन्दर्भ में भी होता है। भले ही आप किसी के अधीन कार्य करते हो लेकिन अपने हर कार्य को पूरी ईमानदारी से करना आपका दायित्व है।

प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि उसे समाज में सम्मान मिले लेकिन सम्मान का हकदार वही व्यक्ति होता है जो ईमानदार हो और समाज के प्रति अपने दायित्वों का पूरी ईमानदारी के साथ निर्वहन करता हो। इसके अलावा ऐसा व्यक्ति उस समाज के लिए प्रेरणा भी बनता है जिसका वो अभिन्न अंग है और इस तरह अपने इस गुण के कारण जाने अनजाने में ईमानदार व्यक्ति एक बेहतर समाज के निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभा ही देता है।

अपने देश और दुनिया के लिए अगर आप कुछ ऐसा योगदान देना चाहते हैं जिससे इस दुनिया में सद्भावना बढ़े, आपके देश में सम्पन्नता बढ़े, आपके समाज में नैतिकता बढ़े और आपके परिवार में इन नैतिक मूल्यों के प्रति आदर भाव विकसित हो तो ईमानदारी के इस गुण को अपने व्यक्तित्व का एक विशेष गुण बनाये रखिये।

ऐसा करके आप खुद के लिए भी आनंद और तरक्की की राह खोल लेंगे क्योंकि एक ईमानदार परिवारजन को परिवार का साथ मिलता है, ईमानदार मित्र को दोस्तों से बदले में ईमानदारी मिलती है, ईमानदार व्यापारी को अपने व्यापर में बरकत मिलती है, ईमानदार कर्मचारी को अपने कार्य में तरक्की मिलती है, ईमानदार नागरिक को समाज और देश से सम्मान मिलता है और एक ईमानदार व्यक्ति के लिए इससे अमूल्य पुरस्कार और कोई नहीं हो सकता।

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