एक ऐसा राजा जिसने करीबन दो करोड़ लोगों की हत्या करवा दी थी

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जब भी बात इतिहास के खूनी दरिंदों की की जाती है तो उसमें तैमूरलंग का नाम सबसे अव्वल दर्जे पर आता है। तैमूर उस समय का एक बहुत ही क्रूर शासक और भयंकर हत्यारा माना जाता था। उसे कई नामों से जाना जाता था जिसमें तैमूरलंग काफी प्रचलित था और यही राजा था जिसने तैमूरी राजवंश की स्थापना की थी। आपको बता दें कि भारत के मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर तैमूर के ही वंशज हुआ करते थे। तो चलिए इनके बारे में आज हम आपको विस्तारपूर्वक बताते हैं।

तैमूर का जन्म उजबेकिस्तान के शहर “शहर ए सब्ज़” में 6 अप्रैल 1336 को हुआ था। तैमूर के पिता ने इस्लाम कबूल कर लिया था और इसी वजह से तैमूर भी इस्लाम का कट्टर अनुयाई माना जाता था।

उस समय वह बेहद ही गरीब परिवार था और इसी वजह से तैमूर छोटी मोटी चोरियां भी किया करता था। धीरे-धीरे उसने एक गिरोह बना लिया और वह गिरोह धीरे-धीरे एक बड़ा लूटपाट का गिरोह बनता चला गया। इस गिरोह ने काफी लूटपाट और खूंखार घटनाओं को अंजाम देना शुरू कर दिया।

1369 में समरकंद के मंगोल शासक की मृत्यु हो जाने के बाद तैमूर ने उस पर कब्जा कर लिया। वह चंगेज़ ख़ान की तरह समस्त विश्व पर अपना कब्जा करना चाहता था और इसीलिए उसने इस और अपने कदम प्रशस्त किए।

तैमूर के नाम का मतलब निकाला जाए तो तैमूर का मतलब होता है लोहा या फौलाद और लंग का मतलब होता है लंगड़ा। उनके नाम के साथ इसे इसलिए जोड़ा गया क्योंकि उन्होंने एक जंग में अपना एक पैर गंवा दिया था। वह हमेशा से ही चंगेज़ ख़ान के वंशज होने का दावा करते थे लेकिन असल में वह एक तुर्क थे।
तैमूर ने सबसे पहली बार 1380 में इराक की राजधानी बगदाद पर अपना पहला हमला बोला था जहां उसने हजारों लोगों को कत्ल कर दिया था। यह बताया जाता है कि उस समय यहां पर खोपड़ियों के ढेर लग गए थे। इसके बाद उसने कई खूबसूरत राज्यों को खंडहर में तब्दील किया इतिहासकार बताते हैं कि तैमूर को कटे हुए सिरों का ढेर लगाने में बहुत मजा आता था।

तैमूर ने कई देशों में लूटपाट की और उनसे जमा हुए धन से उसने एक बहुत बड़ी सेना इकट्ठी कर ली। तैमूर एक बहुत ही तेज दिमाग वाला व्यक्ति था वह बेहद ही निडर था और उसके सिपाही उसकी बहुत इज्जत किया करते थे। वह हमेशा से ही सिपाहियों के साथ अग्रिम पंक्ति में खड़ा हुआ करता था और सिपाहियों के दिल में जोश भर दिया करता था।

कई देशों में लूटपाट मचाने के बाद तैमूर ने भारत पर हमला करने की एक बहुत बड़ी योजना बनाई। उसे भारत के धन और दौलत के बारे में बहुत कुछ पता था इसीलिए वह भारत पर हमला करने के लिए बेहद आतुर हो रहा था। शुरुआत में उसके सेनापति भारत पर हमला करने के लिए तैयार नहीं थे पर जब उसने धर्म के प्रचार की आड़ में भारत पर हमला करने की योजना बनाई तो लोगों को उसका उद्देश्य समझ में आया और वह भारत पर हमला तैयार करने के लिए तैयार हो गए।

तैमूर के हमले की पूरी जानकारी आपको “तुजुके तैमूरी” नामक किताब में मिल जाएगी। इसमें तैमूर की जीवनी के ऊपर भी काफी कुछ लिखा हुआ है। सितंबर 1398 में तैमूर ने भारत पर हमला बोल दिया और वह सिंधु नदी के रास्ते भारत में प्रवेश कर गया। सबसे पहले उसने तुलुम्बा नगर पर हमला किया और वहां हजारों की संख्या में लोगों को मार दिया। कई लोगों को उसने बंदी भी बनाया लेकिन सबसे अहम बात यह थी कि तैमूर ने कई मंदिरों को भी नष्ट किया।
इस हमले में काफी नुकसान होने के बाद तैमूर कश्मीर की ओर बढ़ गया यहां पर उसने कटोर नामी राजपूत किले पर हमला किया जिसमें कई पुरुष और महिलाओं की जाने गई। उसने विशेष प्रकार के निर्देश दिए जिस में स्त्रियों और बच्चों को कैद करने का आदेश था। कत्ल किए गए पुरुषों के सिर उसने कई मीनारों पर चिनवा दिया।

धीरे-धीरे तैमूर भारत के अंदर बढ़ता चला गया और वह दिल्ली तक पहुंच गया। दिल्ली में उस समय सुल्तान महमूद तुगलक का शासन था वह बेहद ही अयोग्य शासक था और युद्ध में उसे बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा यहां तक कि वह मैदान ही छोड़कर भाग गया। तुगलक को हराने के बाद जब तैमूर दिल्ली पहुंचा तो उसने 5 दिनों तक दिल्ली में बेरहमी से कत्ल करवाए औरतों को गुलाम बनाया और जीवनभर उन्हें दासी बनाकर रखा। आपको बता दें कि उसकी इच्छा भारत में रहकर राज करने की नहीं थी इसलिए उसने 15 दिन दिल्ली में रहकर वापस समरकंद जाने का फैसला किया।

भारत से वापसी करते समय उसने मेरठ हरिद्वार पंजाब और जम्मू के क्षेत्रों में बहुत ही निर्माता से लूटपाट मचाई। इस लूटपाट के दौरान बेहिसाब लोगों का कत्ल किया गया भारत में करीबन 6 महीने रहने के बाद वह 19 मार्च 1399 को सिंधु नदी पार करके भारत से चला गया।

एक अनुमान के अनुसार यह बताया जाता है कि उस समय तैमूर ने लगभग दो करोड़ लोगों का क़त्ल किया था और उस समय यह संसार की कुल आबादी का 5% था।

उज़्बेकिस्तान में आज भी लोग तैमूर को अपना हीरो मानते हैं उसकी कई प्रतिमाएं और मूर्तियां शहर में लगी हुई है। वहां के इतिहास में तैमूर को हीरो की तौर पर पेश किया जाता है और उसके काले कारनामों की बिल्कुल चर्चा नहीं की जाती।

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