राष्ट्रगान से जुड़ी यह बातें आपको जरूर जान लेनी चाहिए

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जन-गण-मन हम भारतीयों के लिए एक गीत नहीं बल्कि इस गीत में करोड़ों भारतीयों की आत्मा में बसती है। यह हमारे देश का राष्ट्रगान है जिसका हम सब सम्मान करते हैं। लेकिन आज हम आपको राष्ट्रगान से जुड़े कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं जो आपको एक भारतीय होने के नाते जरूर जान लेनी चाहिए।

आपको बता दें कि पहली बार राष्ट्रगान 16 दिसंबर 1911 को कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में गाया गया था। लेकिन उस वक्त इसे संगीत बद्ध नहीं किया गया था।

कोलकाता के कुछ अखबारों में यह बताया गया था कि यह गीत ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम द्वारा लिखा गया है क्योंकि 30 दिसंबर 1911 को उन का भारत आगमन हुआ था। मगर मैं गुरुदेव ने 1939 को इस बात का खंडन कर दिया था।

इस गीत को संगीतबद्ध विदेश में किया गया था और वहां पर इस पर परफॉर्मेंस भी दिया गया था।

संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को जन गण मन को राष्ट्रगान के तौर पर सर्वसम्मति से मान्यता देदी थी।

जन गण मन का अंग्रेजी अनुवाद भी किया गया था यह बेसेंट थियोसोफिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य थी जिन्होंने इसका अंग्रेजी अनुवाद किया।

जन गण मन इस से पहले संस्कृत निष्ठ बंगला में लिखा गया था मगर सुभाष चंद्र बोस ने इसका बाद में हिंदी अनुवाद किया गया। इसका अनुवाद कैप्टन आबिद अली ने किया था और इसे संगीतबद्ध किया था कैप्टन रामसिंह ने।

शुरुआती दौर में जन गण मन को ‘सुबह सुख चैन’ नाम दिया गया था और बाद में इस गीत को आधिकारिक रूप से 52 सेकेंड का कर दिया गया। इससे ज्यादा समय लेने पर राष्ट्रगान का अपमान माना जाता है।

राष्ट्रगान के मुद्दे पर संविधान में कोई भी बहस नहीं हुई थी संविधान सभा ने बिना बहस के इसे सर्वसम्मति से एक राष्ट्रगान के तौर पर मान्यता दे दी थी।

राष्ट्रपति ने एक बयान में यह घोषणा की थी की स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाले गीत वंदे मातरम को भी इस राष्ट्रगान के बराबर दर्जा दिया जाएगा और बाद में वंदे मातरम को राष्ट्र गीत घोषित कर दिया गया।

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