जानिए क्या है जलीकट्टू खेल और इसमें बैलों के साथ क्या होता है ?

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तमिलनाडु में खेले जाने वाले जलीकट्टू को लेकर अक्सर बवाल मचा रहता है लेकिन क्या आप जानते हैं ये जलीकट्टू क्या है और क्यों लोग अक्सर इसको लेकर हंगामा करते हैं ! आइये आपको विस्तारपूर्वक बताते हैं जलीकट्टू क्या है और क्यों इस पर हंगामा मचा रहता है ! असल में जलीकट्टू तमिलनाडु का एक खेल है जो करीब पिछले 2500 सालों से खेला जा रहा है ! हर साल फसल कटाई के समय तमिलनाडु में चार दिन का पोंगल उत्सव मनाया जाता है और इस त्योंहार का तीसरा दिन ख़ास तौर पर मवेशियों के लिए होता है ! जलीकट्टू के शाब्दिक अर्थ की बात करें तो तमिल में जली का अर्थ होता है सिक्के की थैली और कट्टू का अर्थ होता है बैल का सिंग ! तमिलनाडु में जलीकट्टू को गौरव और संस्कृति के प्रतीक के तौर पर माना जाता है !

जलीकट्टू एक खेल है जो पोंगल त्योंहार के दौरान खेला जाता है और इस खेल की परंपरा ये है की इस खेल की शुरआत वहां के तीन सबसे बूढ़े बैलों को खुला छोड़कर की जाती है जिन्हे कोई नहीं पकड़ता ! इन बैलों के जाने के बाद जलीकट्टू खेल की असली शुरआत होती है ! जलीकट्टू के इस खेल में बैलों के सींगों से सिक्कों की थैली बाँध दी जाती है और उन्हें भड़काया जाता है फिर उन्हें भीड़ में खुला छोड़ दिया जाता है और लोगों को बैलों के सींगों से सिक्कों की थैली हासिल करनी होती है ! जो कोई भी इन बैलों के सींगों से सिक्कों की थैली हासिल कर लेता है उन्हें पुरस्कार दिया जाता है !

असल में तमिलनाडू में बैलों को गायों की अपेक्षा ज्यादा महत्व दिया जाता है क्योंकि बैल कई तरह के काम करने में सक्षम होते है ! बैल हल जोतने, बैलगाड़ी खींचने और गायों के गर्भधारण की प्रक्रिया के काम आते हैं ! तमिलनाडु में मंदिरों के बैलों को मवेशियों का मुखिया समझा जाता है और इसी कारण जलीकट्टु खेल में इन्हीं बैलों को शामिल किया जाता है !

इस खेल का एक उद्देश्य ये भी होता है की जो बैल आसानी से काबू में आ जाते हैं उन्हें खेती और घरेलु कामों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जबकि जो बैल ताकतवर होते हैं और काबू में नहीं आते उन्हें गायों की बेहतर नस्ल बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है !यूँ तो ये खेल सालों से खेला जा रहा है लेकिन अब कुछ पशु प्रेमियों ने इस खेल को बंद कराने को लेकर आवाज उठाई है क्योंकि इस खेल में पशुओं के साथ क्रूरता की कई घटनाएं सामने आई हैं जिस कारण ये मामला अब कोर्ट में पहुँच चुका है !

दरअसल इस खेल के लिए बैलों को भड़काने के लिए उन्हें शराब तक पिलाई जाती है इतना ही नहीं उन पर नुकीली चीज़ें चुभाकर, पूंछों को मरोड़ा कर, आँखों में मिर्च डालकर जैसी यातनाएं दी जाती है ताकि बैल भड़क जाएँ ! इसके अलावा इस खेल पर सट्टा भी लगाया जाता है ! कई पशु कल्याण संगठनों ने इस खेल का विरोध किया और कोर्ट से अपील की कि जलीकट्टू खेल पर रोक लगाई जाये लेकिन इसके समर्थकों ने भी इसके लिए कई प्रदर्शन किये हैं !

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