जानें कैसे करें अपनी भावनाओं को काबू में

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आप जानते हैं कि हमारी सोच, हमारी प्रतिक्रियाएं और हमारा स्वभाव, ये सभी हमारी भावनाओं का ही परिणाम होता है यानि हमारी भावना जैसी होती हैं वैसे ही हम बाहरी दुनिया में कार्य करते हैं और इन्हीं भावनाओं के अनुसार ही बर्ताव भी करते हैं। ख़ास बात ये है कि हमारी लाइफ का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है हमारी भावनाएं।

भावनाएं हर तरह की होती है, खुशी की भावना में हम हंस पड़ते हैं और तकलीफ की भावना हमें रुला देती हैं, कभी अपनी कमियां जानकर हम बौखला भी जाते हैं और कभी गहरी निराशा में डूब जाते हैं। लेकिन अगर हम अक्सर ऐसा व्यवहार किया करते हो और हमारी भावनाओं पर हमारा बिलकुल भी नियंत्रण ना हो, तो सोचिये हमारा व्यवहार कैसा हो जायेगा ? अनियंत्रित और असंयमित।

कभी अचानक फूट-फूट कर रो देना या कभी किसी जगह अचानक हंस पड़ना या गुस्से में आग बबूला हो जाना, अगर आपकी भावनाएं भी यूँ अचानक बाहर आ जाती है और उनकी वजह से आप खुद के लिए मुश्किल पैदा कर लेते हैं तो संभल जाइये क्योंकि इनका संयमित होना बेहद ज़रूरी है। लेकिन अगर आप भी अपनी भावनाओं पर काबू करना नहीं जानते हैं तो चलिए, आज इसी बारे में बात करते हैं कि कैसे आप अपनी भावनाओं को नियंत्रित कर सकते हैं।

खुद से कहिये – ‘ये आसान है’
अगर अपनी बेकाबू भावनाओं के कारण आपको भी अक्सर अपमान या निराशा का सामना करना पड़ता है तो परेशान मत होइए, सबसे पहले खुद से कहिये कि अपनी भावनाओं को काबू में रखना आपके लिए बेहद आसान है, बिलकुल उसी तरह जैसे कोई नया टास्क करने से पहले आप खुद को समझाते हैं।

खुद को शांत रखने का अभ्यास कीजिये –
आप जानते हैं कि किसी घटना पर आपकी प्रतिक्रिया को आप तुरंत नियंत्रित नहीं कर सकते लेकिन आप खुद को शांत बनाये रखने का अभ्यास तो कर सकते हैं ना, ताकि जब ऐसी कोई परिस्थिति आये जब आप अपनी भावनाओं को रोक ना पाए तो कम से कम शांत रहने का अभ्यास आपकी इतनी मदद तो कर ही देगा कि आप बेकाबू होकर कुछ ग़लत प्रतिक्रियाएं देने से बच जायेंगे।

अपनी भावनाओं के प्रति जागरूक होना होगा –
आप ये तो जान चुके है कि आपकी भावनाओं का प्रवाह इतना तेज़ होता है कि आप उसे रोक नहीं पाते, लेकिन अब आप ये भी जानने की कोशिश कीजिये कि आखिर आपकी भावनाएं कैसी हैं और कब किस प्रकार की स्थिति में कौनसी भावना प्रबल हो जाती है। इसके लिए आपको अपनी भावनाओं पर नज़र रखनी होगी, एक जासूस की तरह, जो ये पता लगाएगा कि कब आपको गुस्सा आ जाता है, कब आप ज़्यादा ही खुश हो जाते हैं और किन हालातों में आप रोने से खुद को रोक नहीं पाते हैं। इतना पता लगा लेने के बाद भावनाओं का ये केस सॉल्व होना कहाँ मुश्किल रह जाएगा।

इसका हल निकालना आपके लिए मिशन है –
जब आपके ऑफिस वर्क के दौरान कोई टास्क आता है जो बहुत परेशानी पैदा करने वाला होता है तो बताइये क्या आप उसे बीच में ही छोड़ देते हैं या उस टास्क को हर हाल में पूरा करने के लिए नए रास्ते खोजते हैं ? आपका जवाब नए रास्ते खोजना ही हैं ना। तो फिर इस भावना से जुड़े टास्क को भी क्यों ना एक चुनौती मानकर स्वीकार किया जाए और हर हाल में अपनी भावनाओं को नियंत्रित बनाये रखने का टास्क खुद को दिया जाए। ऐसा करने से रोज़ आप खुद में हुए सुधार का आंकलन कर सकेंगे और भावनाओं को काबू करने का ये मिशन जल्द से जल्द पूरा करने का उत्साह भी आप में बना रहेगा।

आप की भी कुछ सीमायें हैं –
भावनाएं अक्सर तब अनियंत्रित हो जाती हैं जब कोई आपके काम में कमियां निकाले या आपको कुछ सुझाव देना चाहे। ऐसे में अगर आप भी उग्र होकर सामने वाले से अपमानजनक व्यवहार करने लग जाते हैं तो ये समझना और स्वीकार करना बेहद ज़रूरी है कि कमियां सभी में होती है। आप किसी काम में दक्ष भी हो सकते हैं तो किसी दूसरे काम में आपकी सीमायें भी हो सकती हैं। खुद को निपुण और दक्ष मान लेने की ग़लतफ़हमी ही हमें गुस्सा करने और अनियंत्रित होकर भला-बुरा कहने के लिए प्रेरित करती हैं और कभी-कभी खुद की कमियों को सुनकर हम गंभीर निराशा में भी चले जाते हैं। ये सब अनियंत्रित भावनाओं का ही तो परिणाम है। इसलिए इसी पल से अपनी खूबियों को बनाये रखने और अपनी कमियों को स्वीकार करके सुधारने पर ज़ोर दीजिये। लेकिन उससे भी पहले सामने वाले की बात को शान्ति से सुनने का प्रयास शुरू कर दीजिये।

हड़बड़ी से बचिए –
खुद की भावनाओं की मॉनिटरिंग कर लेने के बाद आप अपनी हर भावना के बारे में अच्छे से जान चुके है और अपनी कमियों पर भी ध्यान देना आपने शुरू कर दिया है लेकिन फिर भी इस मिशन को पूरा करने में आपको हड़बड़ी करने से बचना होगा। इस मिशन की डेडलाइन भले ही आपने निर्धारित की है लेकिन इसे पूरा करने में कुछ समय तो लगेगा ही, इस बात को समझिये क्योंकि अगर अपनी भावनाओं को काबू में करने के लिए आपने स्वयं पर ज़्यादा दबाव बनाना चाहा तो ये आपके लिए नुकसानदेह हो सकता है और आपकी भावनाएं पहले से भी ज़्यादा अनियंत्रित रूप में बाहर आ सकती हैं इसलिए पूरा समय लीजिये और शांत रहते हुए इस लक्ष्य की ओर बढ़िये।

अभी तक अगर आप अपनी अनियंत्रित भावनाओं के वश में थे तो इन आसान से तरीकों को अपनाकर देखिये कि कैसे आपकी भावनाएं आपके काबू में रहने लग जाती हैं और भावनाओं के कारण अफसोस होने की बजाये आपके व्यक्तित्व में निखार आना शुरू हो जाता है। ऐसा करना बेहद आसान है क्योंकि अब आप जानते हैं कि मुश्किल चाहे जैसी भी हो, उसका हल आप ही के पास होता है।

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