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क्यों आता है क्रोध और इसे कैसे करें नियंत्रित ?

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क्रोध या गुस्सा इंसान की प्रवृति होती है जो किसी में अधिक होती है तो किसी में कम। कोई शख्स हर बात पर गुस्सा करने लगता है तो कोई व्यक्ति बड़ी से बड़ी बात पर भी शांत बना रहता है। इसके पीछे हर व्यक्ति का स्वभाव होता है जिसके चलते या तो वो क्रोध को अपने नियंत्रण में कर पाता है या फिर स्वयं ही क्रोध से नियंत्रित होने लगता है। काफी हद तक व्यक्ति का परिवेश और उसके पुराने अनुभव भी उसके क्रोधी स्वभाव के पीछे कारण होते हैं और कई बार व्यक्ति अपने आप को ताकतवर साबित करने के लिए भी क्रोध का सहारा लेने लगता है तो कभी विपरीत हालातों के कारण मिली असफलता, तनाव और कुंठा क्रोध का रूप लेकर बाहर निकलती है।

क्रोध किसी पर भी, कभी भी आ सकता है। अपनों पर, परायों पर, बड़ों पर, छोटों पर, घर में या बाहर। क्रोध का कोई दायरा नहीं होता। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने क्रोध यानि गुस्से के कारण का पता लगा लिया है और क्रोध के लिए जिम्मेदार होता है ब्रेन रिसेप्टर। ये मस्तिष्क रिसेप्टर एक एंजाइम है जिसका नाम मोनोएमीन आक्सीडेस ए है, और हैरान करने वाली बात ये है कि इस रिसेप्टर को अगर बंद कर दिया जाए तो गुस्से से मुक्ति भी मिल सकती है।

विज्ञान ने तो एक बार फिर आपकी मदद कर दी है, इस रिसेप्टर को ढूंढकर। अब आपकी बारी है अपने गुस्से को नियंत्रित करने की, क्योंकि इस उपाय के अलावा भी ऐसे ढेरों उपाय है जिन्हें अपनाकर आप अपने गुस्से से मुक्त हो सकते हैं। इसके लिए सिर्फ इतना ज़रूरी है कि आप ऐसा करने की इच्छा रखते हों। तो चलिए, गुस्सा आने के कारणों को जान लेने के बाद ये भी जान लेते हैं कि इसे दूर करने के लिए क्या किया जा सकता है –

क्रोध से होने वाले शारीरिक नुकसान को समझिये –
जब भी आपको क्रोध आता है तब आपके दिल की धड़कने तेज़ हो जाती हैं और साँसे भी तेज़ चलने लगती है। क्रोध करते समय तो आप ये सब सोच नहीं पाते लेकिन आपके लिए ये जानना जरुरी है कि क्रोध की स्थिति में बने रहने से शरीर को कितना नुकसान पहुंचता है। हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, सिरदर्द, नींद न आना, त्वचा और पाचन सम्बन्धी समस्याएँ होना और शरीर की इम्युनिटी कम होने जैसी समस्याएँ लेकर आता है आपका ये क्रोध।

क्रोध से होने वाले मानसिक नुकसान को भी समझिये –
क्रोध की उग्रता न केवल आपके शरीर को नुकसान पहुँचाती है बल्कि क्रोधी स्वभाव के कारण आपके दिमाग में हमेशा नकारात्मक विचार ही आया करते हैं और चिंता और अवसाद का आना भी स्वाभाविक ही है, इसके अलावा आप अपने संबंधों को भी क्षति पहुंचाते है और स्वयं की छवि को भी विपरीत रूप में प्रभावित करते हैं।

अपना ध्यान क्रोध के माध्यम से हटा लीजिये –
जैसे ही आपको क्रोध करने का कोई भी कारण नज़र आये, आप अपना ध्यान उस ओर से हटाकर कहीं ओर लगा लीजिये। आप चाहे तो ऐसा कर सकते हैं, कोशिश ज़रूर कीजिये। गुस्सा आने पर पानी पी लीजिये या गिनती बोलना शुरू कर दीजिये या फिर गहरी सांसें लेना शुरू कर दीजिये। क्रोध एक तेज़ गति से आने वाली नकारात्मक भावना है, जिससे ध्यान हटाकर इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है।

ये सोचिये कि ‘जैसा करेंगे वैसा पाएंगे’ –
कई बार क्रोध में आकर हम कुछ ऐसी बातें कह जाते हैं जो हमारे रिश्तों पर बुरा असर डालती है और कई बार तो रिश्ते टूटने की कगार पर भी आ जाते हैं। ऐसे में आपको अपने दिमाग को ये समझाना होगा कि जैसा आप व्यवहार करेंगे वैसी ही प्रतिक्रिया आपको झेलनी होगी। अपने व्यवहार के प्रति सजगता रखकर आप शुरुआत में अपने गुस्से को कम कर सकते हैं और निरंतर सजग रहते हुए इस क्रोध को अलविदा भी कह सकते हैं।

अपने आहार पर नज़र डालिये –
आप रोज़ाना अपने भोजन में किस तरह की चीज़ों का सेवन करते हैं, ये काफी हद तक आपके क्रोध को प्रभावित करता है। अगर भोजन में सादा और पौष्टिक खाना हो तो आप शांत और आरामदायक महसूस करते हैं लेकिन अगर खाना ज्यादा तैलीय और मिर्च-मसालों वाला होता है तो उस दिन आपके स्वभाव में उग्रता बढ़ जाती है इसलिए अपने भोजन को सात्विक और हेल्दी बनाइये ताकि गुस्सा आपसे दूरी बनाकर रखे।

शरीर को विश्राम दीजिये –
कई बार क्रोध आने का कारण स्वभाव न होकर, शरीर का थका होना होता है। काम के दबाव और पर्याप्त नींद नहीं ले पाने के कारण आपको गुस्सा आने लगता है। इसलिए अपने शरीर को पूरा आराम दीजिये और अच्छी नींद लेना शुरू कीजिये। ऐसा करने से आपको फर्क खुद-ब-खुद नज़र आने लगेगा।

योग से बदलेगा स्वभाव –
उग्र स्वभाव को स्थायी मान लेना हमारी भूल होगी। हम चाहे तो अपने स्वभाव को शांत बना सकते हैं, इसके लिए आप योग कीजिये। आसान-व्यायाम करने और ताज़ी हवा में सैर करने से आपका विचलित मन शांत होने लगेगा और अगर मन शांत है तो गुस्सा आना कैसे संभव है।

प्राणायाम करने की आदत डालिये –
गुस्सा करने को अपनी आदत मान लेने की बजाये आप इसे दूर करने के लिए प्राणायाम करना शुरू कर दीजिये। गहरी साँस लेने का अभ्यास करने से आपका मन स्थिर और शांत होने लगेगा और क्रोध का स्वभाव बदलने लगेगा। इसके साथ ही रोज़ 10 मिनट ध्यान करने से भी आपको बेहद फायदा मिल सकता है।

कोई भी मानसिक विकार या आदत कितने समय तक हमारे साथ रहेगी, इसका निर्धारण हम खुद कर सकते हैं। क्रोध भी ऐसी ही एक आदत या स्वभाव है जिसे हम स्वाभाविक मानकर अपनाये रखते हैं और उसके दुष्परिणामों को जीवन भर के लिए स्वीकार लेते हैं। इसकी बजाये अगर हम क्रोध को दूर करने में भी उसी तरह जुट जाए जैसे किसी शारीरिक बीमारी को दूर करने में जुटते है तो ये तय है कि आपका क्रोध धीरे-धीरे कम होने लगेगा और बहुत जल्द आप शांत स्वभाव को अपनाने में भी सफल हो जाएंगे। तो बस, देर किस बात की – क्रोध के साइड-इफेक्ट्स को अपने ज़ेहन में उतार लीजिये और अगली बार क्रोध आने पर संयम बरतना शुरू कीजिये, यकीन मानिये ये आसान है और आप कर सकते हैं।

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