क्या आपको भी है ज़्यादा सोचने की बीमारी

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आप जानते हैं कि किसी भी काम को करने से पहले अच्छी तरह से सोचना चाहिए और फिर निर्णय लेना चाहिए। बचपन से यही सिखाया गया है ना हमें कि जल्दी का काम शैतान का.. और इसी जल्दबाज़ी और ग़लत निर्णय लेने से बचने के लिए आप हर बात को अच्छे से समझ कर, उसके हर पहलू पर अच्छे से सोच विचार कर ही निर्णय लेते आये है जो बहुत अच्छी बात है लेकिन कहीं ज़्यादा सोचने की इस आदत ने लत का रूप तो नहीं ले लिया है। हर बात को सोचते रहना और अपने समय का अधिकांश हिस्सा केवल सोचने में बिताना लत का रूप ले लेता है जिससे आप इतने अनजान होते हैं कि इस बीमारी के बारे में समझ ही नहीं पाते। तो चलिए, आज आपको बताते हैं कि ज़्यादा सोचना किस तरह आपके तन मन के लिए घातक है –

सोचने का कोई अंत नहीं होता –
जिस तरह नशे की लत शरीर के लिए घातक साबित होती है, ठीक वैसे ही सोचते रहने की आदत जब लत का रूप ले लेती हैं तो ये भी आपके शरीर और दिमाग को नुकसान पहुँचाती है। आगे आने वाली मुश्किलों और उनका सामना करने की तरकीबों को सोचने में ही आप पूरा समय गवां देते है और किसी नए काम की शुरुआत करने से चूक जाते हैं।

आपका स्वभाव सरल नहीं रह पाता –
आपको दूसरे लोगों का सरल स्वभाव भले ही प्रभावित करता हो लेकिन आप स्वयं में जटिल होते चले जाते हैं। निरंतर सोचते रहने की आदत के चलते आपके स्वभाव में जटिलता आ जाती है क्यूँकि आपके दिमाग में विचारों की उथलपुथल लगातार चलती रहती है जिसके कारण आप अपना सरल स्वभाव खो देते हैं।

स्वयं को श्रेष्ठ समझने लगते हैं –
सोचने की लत आप को अभिमान से भर देती है। आपको लगने लगता है कि मुझमें ज़्यादा सोच पाने की क्षमता है जो मुझे दूसरों से बेहतर बनाती है और इसी सोच के चलते आप हर मसले में अपनी राय देना जरुरी समझने लगते है और ये अपेक्षा करते है कि उसी पर अमल किया जाए। दिमाग की ये स्थिति आपके रिश्तों पर भी भारी पड़ने लगती है।

वर्तमान से दूरी बना लेना –
सोचने का सम्बन्ध कल्पनाओं और पुराने अनुभवों से होता है। ज़्यादा सोचने की लत का शिकार होने पर आप बीते वक़्त के विचारों में डूबे रहते है या फिर आने वाले कल से जुड़ी कल्पनाओं में रंग भरने लगते है। आप इसमें इतने मशगूल हो जाते है कि वर्तमान स्थिति को पूरी तरह भूलने लगते हैं और आज किये जाने वाले काम को भी अधूरा ही छोड़ देते हैं जिससे आपकी तरक्की की राह बाधित हो जाती है।

सपनों की दुनिया में खोये रहना –
सोचने की बीमारी आपको सही निर्णय लेने से रोकती है। अनजान ख्यालों में खोये रहने और अनजाने रहस्य सुलझाने में खोया आपका मन सही और गलत का निर्णय लेने की क्षमता खो देता है और आपमें न दिमाग की विवेकपूर्ण बातें सुनने की क्षमता शेष रहती है और न ही दिल की आवाज़ सुन कर अपनी भावनाओं पर नियंत्रण करने की।

नयी मुसीबतों को न्यौता देना –
जब ज़्यादा सोचते रहना आपके जीवन का अभिन्न अंग बन जाता है तो आप हर परिस्थिति में समस्या ढूंढने लगते हैं और समस्या नहीं मिलने की स्थिति में बेचैन हो जाते है और नयी नयी समस्याओं की कल्पनाएं करके अपने जीवन को और मुसीबतों से भर लेते हैं।

समय की है बर्बादी –
समय का काम है अपनी रफ़्तार से चलते रहना लेकिन ज़्यादा सोचने की लत आपको समय बर्बाद करने के लिए ही प्रेरित करती है क्यूँकि आप सिर्फ कल्पनाओं में ही अपने टारगेट पूरे करते है, वास्तविकता में आप काम पूरा करने की बजाये सिर्फ सोचा करते हैं जिससे कारण समय आगे निकल जाता है और आप वहीं रह जाते हैं।

रचनात्मकता हो जाती है कम –
अब तक ये माना जाता था कि ज़्यादा सोचने वाला व्यक्ति बुद्धिजीवी और रचनात्मक होता है लेकिन आवश्यकता से अधिक सोच में डूबे रहने से आपकी रचनात्मकता बढ़ती नहीं है बल्कि इसमें कमी आ जाती है और इस बात को अब वैज्ञानिक रूप से भी प्रमाणित किया जा चुका है।

अति सर्वत्र वर्ज्यते … इसी विचार को ध्यान में रख कर आप अपनी इस लत से मुक्त हो सकते हैं क्यूँकि इस बीमारी से आज़ाद होना आपके अपने हाथ में है। जब भी आप विचारों में खोने लगें, अपने आप को याद दिलाये कि वर्तमान ही जीवन है, भूत और भविष्य की कल्पनाएं निरर्थक है। दिमाग में चल रही विचारों की श्रृंखला तोड़ने के लिए आप गहरी सांस ले और खुद को किसी कार्य में व्यस्त कर लें। ये करना भले ही थोड़ा कठिन लगता हो लेकिन निरंतर छोटे छोटे प्रयास से आप इस सोचने की बीमारी से खुद को बचा सकेंगे और एक खूबसूरत आज की तरफ बढ़ सकेंगे। तो बस, देर किस बात की ! अभी से अपनी सोच को एक निश्चित दायरा दीजिये और अपने वर्तमान को अपनी कल्पनाओं से भी बेहतर बना लीजिये।

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