क्या आपको होती है लोगों के बीच में घबराहट ?

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हर व्यक्ति के स्वभाव की अपनी विशेषताएं और कमज़ोरियाँ होती हैं। कुछ चीज़ों और कार्यों को लेकर आप उत्साही होते हैं तो कुछ चीज़ों को लेकर संकोची। ऐसा होना सामान्य है लेकिन अगर आपको लोगों के बीच घबराहट होने लगती है, भीड़ भरी जगह आपको रहना सहज नहीं लगता तो ये सामान्य बात नहीं हैं। शर्म या संकोच अगर कभी-कभी हो तो इसे स्वभाव माना जा सकता है लेकिन अगर समूह में रहते हुए या लोगों के बीच खुद को प्रस्तुत करने में आपके हाथ-पाँव काँपने लगते हैं या आप बीमार महसूस करने लगते हैं तो ये सामाजिक चिंता विकार हो सकता है जो महिला और पुरुष दोनों में पाया जा सकता है।

सामाजिक चिंता क्या है-
सामाजिक चिंता एक ऐसी मनः स्थिति है जिसमें व्यक्ति को डर रहता है कि लोग उसके बारे में कुछ बुरा ना सोचे। इसके चलते कई बार ऐसे व्यक्ति में हीन भावना भी आ जाती है और वो स्वयं को अपने आसपास के लोगों के स्तर से कम स्तर का आंकने लगता है जिसके कारण सिरदर्द, तनाव और दिल की धड़कन तेज़ सुनाई देने लगती है। अक्सर इस तरह के व्यक्ति लोगों से मिलने-जुलने में परहेज करते हैं, बिना आँखे मिलाये बात करते हैं, बहुत तेजी से बात करते हैं और इस दौरान हाथ में कुछ पकड़ कर रखते हैं।

ऐसे में इस स्थिति से बाहर निकलना बेहद ज़रूरी है। तो आइये, आज आपको बताते हैं सामाजिक चिंता की इस मनः स्थिति से कैसे बाहर निकला जा सकता है –

इस दौरान होने वाले शारीरिक बदलावों को समझें –
भीड़ के बीच रहने की स्थिति में आपको तनाव और घबराहट होती है जिसके कारण आपका शरीर भी प्रतिक्रिया देता है और आप घबराहट में काँपने लगते हैं या सिरदर्द महसूस करते हैं, इन शारीरिक संकेतों को समय रहते ही समझ ले और इन्हें दूर करने के लिए संगीत सुनें, किताबें पढ़ें या व्यायाम करके खुद को रिलैक्स कर लें।

दिमाग को शांत रखने के उपाय करें –
अपने दिमाग और मन को शांत रखकर आप इन मुश्किल हालातों से खुद को बचा सकते हैं। इसके लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लेने के अलावा शान्ति देने वाले आसन-प्राणायाम का नियमित अभ्यास करिये।

गहरी सांस लीजिये –
सांस जितनी छोटी और तेज़ी से ली जाती है उतनी ही बेचैनी और तनाव महसूस होता है लेकिन अगर आप खुद को रिलैक्स करना चाहते हैं तो सांस धीरे-धीरे लेना शुरू कीजिये, लम्बी और गहरी साँसें लेने से आपको राहत महसूस होगी।

माइंडफुल सांस लेने की प्रक्रिया-
ये तो आप जानते हैं कि तनाव और चिंता का सम्बन्ध अधिकांशतः भूतकाल या भविष्य से होता है जिसके कारण विचार आपके दिमाग में लगातार चलते रहते हैं और आप बेचैन महसूस करने लगते हैं। माइंडफुल सांस लेने की प्रक्रिया में आपका सारा ध्यान अपनी साँसों की लय पर टिका रहता है। इसके लिए आपको अपना ध्यान भटकने नहीं देना है बल्कि अपनी सांस की प्रक्रिया पर ही पूरा ध्यान केंद्रित करना है। ऐसा करने से आप दूसरों के व्यवहार से ज्यादा विचलित नहीं होंगे।

अपना ध्यान बंटाइए –
अपने शरीर में घबराहट के संकेत देखते ही आप तुरंत अपना ध्यान कहीं ओर लगाने की कोशिश कीजिये, जैसे आसपास के माहौल को देखिये, लोगों के पहनावे को देखिये, कमरे की सजावट, किसी पेंटिंग को गहराई से देखने में अपने आप को व्यस्त कर लीजिये।

छोटे-छोटे प्रयास और आवश्यक व्यायाम करके आप इस घबराहट की मनः स्थिति से बाहर निकल सकते हैं। इसके लिए अपने डॉक्टर से राय लीजिये और स्वयं पर यकीन बनाये रखिये क्योंकि आपका यकीन और संयम आपको इस मुश्किल से भी निकाल सकता है।

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