ऐसे तथ्य जो साबित करते हैं कि महाभारत काल्पनिक नहीं थी

2003

धर्म और आस्था एक ही सिक्के के दो पहलू हैं जहां धर्म होता है वहां पर आस्था अपने आप ही आ जाती है और हिंदुओं के लिए महाभारत सबसे बड़ा ग्रंथ है। आज हम आपको कुछ ऐसे तथ्य बताने जा रहे हैं जिन्हें जानने के बाद आपको इस बात पर यकीन हो जाएगा कि महाभारत काल्पनिक नहीं थी वह एक सत्य था।

महाभारत को भारत का इतिहास कहा जाता है और इतिहास का मतलब यही होता है कि जो कभी घटित हुआ हो। इससे यह बात साबित हो जाती है कि महाभारत महाकाव्य नहीं एक सच्ची घटना थी।

यह बात तो आप सभी जानते होंगे कि महाभारत की कथा की शुरुआत राजा मनु से होती है। इस वंश के 50 से ज्यादा राजाओं के किस्से हम इतिहास में पढ़ते हैं। राजा पांडु और धृतराष्ट्र भी इसी वंश के थे और अगर यह काल्पनिक होता तो लेखक पूरे वंश के बारे में नहीं जानते होते।

यह बात मानी जाती है कि अर्जुन ने गीता का उपदेश महाभारत के दौरान ही दिया था जिसमें कलयुग का सारा बखान है और आज के समय में जो घटित हो रहा है वह सब गीता में पहले से ही लिखा जा चुका है और यह कोई काल्पनिक घटना नहीं हो सकती।

यह बताया जाता है कि के कृष्ण भगवान द्वारका के राजा थे और महाभारत के अनुसार यह शहर जलमग्न हो गया था। पुरातत्व विभाग को गुजरात के पास समुद्र के नीचे यह पूरा शहर मिला है और यह माना जाता है कि यह महाभारत के काल का है। भगवान श्री कृष्ण की नगरी को एक समर्पण राज बताया जाता था। द्वारका के बारे में यह भी कहा जाता है कि वहां रहने वाले लोगों के अलावा यह सारा शहर जलमग्न हो गया था समुद्र में मिले अवशेष इस बात को साबित करते हैं।

महाभारत मैं 35 से ज्यादा शहरों का उल्लेख किया गया है और पुरातत्व विभाग भी इसकी पुष्टि कर चुका है। भारत के आसपास कई देशों मे महाभारत के विवरण के दौरान दिए गए राज्यों का जिक्र है जैसे कि हस्तिनापुर आज के समय में उत्तर प्रदेश का मेरठ जिला है। वही गंधार आज का अफगानिस्तान है साथ ही इंद्रप्रस्थ आज भारत की राजधानी दिल्ली है।

रामायण और महाभारत दोनों अलग-अलग वक्त में हुई थी लेकिन इन दोनों ही के बारे में कई प्रमाण मिल चुके हैं। अगर यह किताबें काल्पनिक होती तो दोनों ही किताबों में इतनी समानता नहीं होती।

महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में हुआ था और हरियाणा के इस जिले में आज भी वह मैदान है जहां यही युद्ध लड़ा गया था। कहा जाता है कि युद्ध के बाद बहे खून की वजह से यहां की मिट्टी का रंग लाल हो चुका है और यह मिट्टी आज भी लाल है।

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