निराशा से निकलने के चमत्कारी तरीके

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ज़िन्दगी उतार-चढ़ाव का एक ऐसा सफ़र है जो हर किसी के जीवन में आता है। कभी खुशियों के संग ज़िन्दगी अच्छी लगने लगती है और कभी ग़मों के दौर में बुझी-बुझी सी लगती है। लेकिन ये तो जीवन का चक्र है जो यूँ ही चलता रहेगा। तो फिर हम अपनी लाइफ में आने वाली मुश्किलों से इतना क्यों घबरा जाते हैं कि निराश होकर बैठ जाते हैं। ऐसा तो कोई शख्स नहीं है जिसके जीवन में सिर्फ ख़ुशी रह सके या सिर्फ गम। आपके साथ कभी न कभी ऐसा हुआ होगा कि आप उत्साह के साथ किसी काम को अंजाम देने ही वाले थे लेकिन तभी आप ऐसा करने में विफल हो गए या फिर किन्हीं ऐसे हालातों से आपका सामना हो गया जिनके लिए आप तैयार ही नहीं थे। ऐसे ही ढ़ेरों कारण होते हैं जिनके कारण आप निराश महसूस करने लगते हैं। लेकिन एक अच्छा जीवन जीने के लिए ये बहुत ज़रूरी है कि निराशा आपके साथ लम्बे समय तक जुड़ी ना रहे। इसलिए निराशा के इस अहसास को खुद से दूर करना ज़रूरी है। तो चलिए, आज आपको बताते हैं निराशा से निकलने के तरीके –

पॉजिटिव माहौल में रहिये –
ये बात कई बार महत्वपूर्ण भले ही न लगती हो लेकिन वास्तविकता यही है कि जैसा आपका माहौल वैसा ही आपका स्वभाव। अगर आप निराशा से खुद को दूर रखना चाहते हैं तो ये ज़रूरी है कि आपके चारों तरफ आशा हो, उम्मीद हो, पॉजिटिव ऊर्जा हो और प्रेरणा हो। अगर ऐसा नहीं है तो आप अपना माहौल बदलिए। सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर माहौल ही आपको मुस्कान दे सकता है।

अपने दिल की सुनिए –
हो सकता है कि अब तक आपने वो काम किये, जो आपको करने को कहे गए। भले ही उनमें आपकी रूचि नहीं हो, ना ही ऐसे काम करने से आप संतुष्टि महसूस करते हो। अगर ऐसा है तो आप ज़रूर निराशा के जाल में फंस गए होंगे। इससे बाहर निकलने के लिए अब आप वो काम कीजिये जो आपको पसंद है, जो आपको समझ आते हैं और जिन्हें करने से आपको खुशी मिलती है। हो सकता है कि आपको शुरुआत में थोड़ी मुश्किल महसूस हो लेकिन अपने दिल का कहा मानने पर आपको परिणाम बेहतर ही मिलेंगे, ये तय है।

बीत गयी सो बात गयी –
ये कहावत तो आपने सुनी ही होगी कि बीत गयी सो बात गयी। कितने आसान शब्दों में बताया गया है कि जो समय चला गया है उसे जाने दो, उसे सोचने से कुछ हासिल नहीं होगा। बीते समय में अगर आपने ऐसी ग़लतियाँ की है जो आपको आज तक निराश बनाये हुए हैं तो आपको संभल जाना चाहिए क्योंकि बीते वक़्त की ये निराशा आपको आज और आने वाले कल में भी निराश ही बनाये रखेगी। जरुरत है तो आज में जीने की। बीते वक़्त से कुछ सीखना ही चाहते हैं तो ये सीखिए कि वो ग़लतियाँ दोबारा न हो।

अभी देर नहीं हुई है –
निराशा का एक बड़ा कारण ये विचार भी है कि अब बहुत देर हो गयी है कुछ भी बेहतर करने के लिए। जैसे सफल होने के लिए, अपनी ग़लतियाँ सुधारने के लिए या फिर खुश रहने के लिए। लेकिन ये विचार इसी पल बदल दीजिये क्योंकि देर कभी नहीं होती। जिस पल आप निराशा का साथ छोड़कर ख़ुशी का हाथ थामना चाहे, थाम सकते हैं। क्योंकि आप अपना जीवन कैसे जीना चाहते हैं ये चुनाव आप ही का होता है,किसी और का नहीं।

हार से डर कैसा –
कई बार आपने अपने सपनों को पूरा करने की जी-जान से कोशिश की लेकिन आप असफल होते चले गए और अब आपको हारने से डर लगने लगा है इसलिए आप निराश होकर बैठ गए। अगर आपके मामले में भी यही सच है तो ज़रा सोचिये क्या निराश रह कर आप खुश रह पाएंगे या हार के डर के साथ जीना आपके लिए आसान होगा ? नहीं ना ! तो फिर निराश होकर बैठने से अच्छा तो यही है ना कि आप फिर से हिम्मत जुटाएं और इस बार तब तक निराश ना हो जब तक आप जीत ना जाए। क्योंकि आज तक जितने भी महान आविष्कारक हुए हैं उन्होंने खुद को तब तक निराश होने की इजाज़त नहीं दी जब तक वो सफल नहीं हो गए।

आप बहादुर हैं –
बचपन में चोट लग जाने पर शायद आपने दादी-नानी से सुना होगा कि आप तो बहादुर हैं और ये सुनते ही आप चोट को भूलकर हँसने लगे होंगे। किसी काम में मिलने वाली विफलता भी तो उसी चोट के समान है जो बचपन में मिला करती थी। फर्क सिर्फ उम्र का है और हौसला देने वाले शब्दों का। आज भी आप हारने के बाद, निराशा में गिरने के बाद फिर से खड़े हो सकते हैं और इसके लिए आपको वही शब्द खुद से कहने होंगे कि आप बहादुर है। फिर देखिये, आपके चेहरे पर मुस्कान भी आएगी और फिर से कोशिश करने का जज़्बा भी जाग जाएगा।

निराशा के शिकार आप अकेले नहीं है –
अक्सर आप ऐसा सोचकर भी निराश हो जाते होंगे कि ये मुश्किलें, असफलता और तकलीफ केवल आपके जीवन में ही आयी है जबकि ऐसा नहीं है। हर शख्स के जीवन में कभी न कभी मुश्किलें ज़रूर आती है और उसे निराशा का सामना भी करना पड़ता है। लेकिन साहसी तो वही है जो इस निराशा में डूबने की बजाये इन विपरीत हालातों में भी संयम बरतता है और प्रयास करना छोड़ता नहीं है। यकीन मानिये आप भी साहसी है, एक बार फिर से कोशिश करके तो देखिये।

फिर से कीजिये एक नयी शुरुआत –
शुरुआत कभी भी, किसी भी उम्र और हालात में की जा सकती है। पुराने अनुभवों से सीख लेकर और आने वाले समय के लिए योजना बनाकर फिर से जुट जाइये अपना मुकाम पाने के लिए और अपने पास कुछ ऐसे माध्यम रखिये जो आपको प्रेरित करते रहें और निराश न होने दें। इसके लिए आप अपने क्षेत्र से जुड़े महान लोगों के जीवन से जुड़ी कहानियाँ एवं प्रसंग पढ़िए-सुनिए और मीठा संगीत भी आपकी निराशा को दूर करने के लिए एक बेहतर ज़रिया साबित हो सकता है।

खुद की सराहना कीजिये –
हो सकता है कि आपके पास ऐसा माहौल और ऐसे शख्स न हो जो आपको हर छोटी सी छोटी उपलब्धि पर सराहे। ऐसे में आप खुद की सराहना खुद करिये, अपनी पीठ थपथपाइये और खुद को शाबाशी दीजिये। ऐसा करके आप स्वयं को आगे आने वाले टारगेट को पूरा करने के लिए प्रेरणा से भर लेंगे और आपका उत्साह और स्वयं पर विश्वास भी पहले से कहीं अधिक बढ़ जाएगा। आत्म विश्वास और उत्साह के साथ किया गया कार्य कितना सफल होता है, ये आप बखूबी जानते हैं और जहाँ खुद पर यकीन होता है वहां निराशा के लिए कोई स्थान नहीं होता।

स्वयं को अभिव्यक्त कीजिये –
अगर आप निराशा का सामना कर रहे हैं तो ये मत सोचिये कि खामोश और गुमसुम बने रहने से आप इस निराशा से निजात पा लेंगे बल्कि ऐसा करके आप हताशा में डूबते चले जाएंगे। आपके विचार और भावनाओं का बाहर निकलना बेहद ज़रूरी है। इसके लिए किसी ऐसे ज़रिये का चुनाव करे जिसके माध्यम से आप अपने आप को एक्सप्रेस कर सकें जैसे अपने करीबी दोस्तों से मिलने जाये, अपने ख़ास लोगों के बीच बैठे, अपने मन की बात कहें, ब्लॉग लिखें। ऐसा करके ही आप निराशा से आज़ाद हो सकेंगे।

आशा जहाँ आपको उम्मीद से भर देती है वहीँ निराशा आपको नीरस और उदासी से भरा जीवन जीने के लिए प्रेरित करती है। लेकिन ये तो आप भी जानते हैं कि आप अपने जीवन को कैसा देखना चाहते हैं निराश या मुस्कुराता हुआ। तो फिर कोई भी मुश्किल और असफलता को ये अधिकार मत दीजिये कि वो आपको हताश कर सके। कुछ समय के लिए भले ही परिस्थितियाँ आपको कठिन लगे लेकिन जल्द से जल्द इन विपरीत हालातों से बाहर निकलने की कोशिश करते रहिये क्योंकि आप ऐसा कर सकते हैं और खुशियाँ तो अभी भी आपकी राह देख रही हैं, आप उनकी तरफ अपना हाथ बढ़ाकर तो देखिये ।

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