ओलंपिक में मेडल पाना इतना आसान नहीं होता उसके लिए बहुत सारे त्याग और बलिदान देने पड़ते हैं। कठिन परिश्रम करना पड़ता है और खुद को नियम अनुसार ढालना पड़ता है तब जाकर कहीं एक मैडल मिल पाता है क्योंकि यहां मुकाबला पूरे विश्व से है।

पीवी संधू को ओलंपिक में सिल्वर मेडल मिला इसके पीछे उनका अथक प्रयास और परिश्रम साफ-साफ दिखता है। उनके कोच गोपीचंद अब खुद इस बात को मानते हैं कि अब वह चाहे तो कुछ भी कर सकती हैं।

गोपीचंद बताते हैं कि पिछले 3 महीने से उन्होंने सिंधु को साफ हिदायत दे रखी थी कि वह फोन का इस्तेमाल नहीं करेंगी और उनका फोन भी गोपीचंद उनसे ले लिया था। गोपीचंद में उनका मीठा और आइसक्रीम खाने पर रोक लगा रखी थी क्योंकि उसे उनका वजन बढ़ने की आशंका हो सकती थी।

गोपीचंद बताते हैं कि हार के बाद जब सिंदू निराश थी तो उन्होंने उन्हें यही बोला था कि अब आप एक मैडल जीत चुकी हैं। तो इसमें नाराज होने वाली कोई बात नहीं है आपने अपना सर्वस्व दिया बाकी जो भी था वह ईश्वर पर छोड़ दें।

सिंधु ने गोपीचंद का ही नहीं पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। हम आशा करते हैं वहां आने वाले समय में देश को नई ऊंचाइयों तक ले कर जाएंगे और आने वाली पीढ़ी उनसे कुछ प्रेरणा लेगी।

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