बिना इंटरनेट के भी पुराने जमाने में भी होती थी चैटिंग

0
600

आज के समय जहां पर इंटरनेट के बिना हम अपना जीवन सोच भी नहीं सकते। वही एक समय ऐसा भी था जब किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि इंटरनेट पूरे विश्व को इस प्रकार आपस में जोड़ देगा। लेकिन पुराने समय में भी चैटिंग की जाती थी अब आप लोग यह सोच रहे होंगे कि जब उस समय में इंटरनेट ही नहीं था तो फिर चैटिंग कैसे होती थी? लेकिन मोबाइल टीवी और अन्य संसाधनों से वंचित वह युग भी ऐसा युग था जिसमें लोग भाग बातचीत के लिए अन्य मध्य्मों का इस्तेमाल करते थे। हालांकि वो चैटिंग इंटरनेट चैटिंग नहीं होती थी लेकिन वह अपने संदेश दूसरे लोगों तक पहुंचाने के लिए विभिन्न माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता था तो चलिए इस बारे में विस्तारपूर्वक जानते हैं।

कबूतरों का इस्तेमाल

आज के समय में जहां लोग इंटरनेट पर Whatsapp के माध्यम से मिनटों में पूरे विश्व में कहीं पर भी अपना मैसेज भेज सकते हैं। वहीं एक समय ऐसा भी था जब अपना संदेश भेजने के लिए कबूतरों का इस्तेमाल किया जाता था।

पालतू जानवरों के साथ संदेश भेजना

प्राचीनकाल में संसाधनों की कमी थी जिस वजह से पालतू जानवरों के साथ संदेश भेजे जाते थे क्योंकि दूरियां इतनी होती थी कि मानव का इतनी जल्दी वहां पहुंचना संभव ही नहीं था इसलिए जानवरों का इस्तेमाल किया जाता था।

इशारों में की जाती थी बात

आज के समय में जहां पर लोग फोन पर ही एक दूसरे की भाषा नहीं समझ पाते वहीं एक समय ऐसा भी था जब टेलीपैथी और इशारों में लोग अपनी बात समझा दिया करते थे।

वृक्षों से भी करते थे बात

प्राचीन काल की गई कहानियों में इस बात का उल्लेख है कि लोग अपने मन की बात वृक्षों से कर लिया करते थे। जिसे वृक्ष अपने तक ही सीमित रखते थे यह माना जाता था कि उस समय मैं वृक्ष भी बात करते थे।

पेड़ों पर छोड़े जाते थे संदेश

जिस प्रकार आज के समय में advertisement चलाया जाता है उसी प्रकार पुरातन काल में पेड़ों पर खोद कर संदेशों को छाप दिया जाता था जिससे अन्य लोग भी उसे पढ़ सके।

अलग-अलग रंग के झंडो में छुपा है चैटिंग का राज

यह माना जाता है कि प्राचीन काल में लोग झंडों के आधार पर बात कर लिया करते थे। यह एक प्रकार का संदेश होता था जो पहाड़ियों पर लगाया जाता था जिसे गुप्तचर अपने हिसाब से ज्ञात कर लिया करते थे।

लकीरों से भी की जाती थी चैटिंग

प्राचीन काल के राजा गुप्तचरों के द्वारा संदेश भेजा करते थे। इन संदेशों को गुप्तचर भी ना पढ़ पाए इसलिए वह सीधी और उल्टी लकीरों के रुप में दिए जाते थे जिसे सिर्फ अन्य देश का राजा ही पढ़ पता था।

Add a comment