ओम मंत्र के जाप के अदभुत फायदे

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भारत की सनातन संस्कृति का मूल आधार है ॐ!! प्राचीन भारत से वर्तमान तक इसका बहुत महत्व दर्शाया गया है. यह सिर्फ एक शब्द ही नहीं बल्कि इस एक शब्द में सृष्टि के रचियता का समावेश है. ढाई अक्षर का शब्द पूरे ब्रह्माण्ड का सार है. कहा जाता है संसार के अस्तित्व में आने से पहले जिस प्राकृतिक ध्वनि की गूँज थी वह ॐ की है. प्राचीन योगियो के अनुसार ब्रह्माण्ड में कुछ भी हमेशा के लिए स्थाई या स्थिर नहीं है. जब संसार का अस्तित्व भी नहीं होगा तब भी इस ध्वनि की गूँज ब्रह्माण्ड में मौजूद रहेगी. क्योंकि इस मंत्र का प्रारंभ तो है पर अंत नहीं है. इसलिए ॐ को ब्रह्माण्ड की आवाज कहा गया है. ओम के महत्व को देखते हुए इसे किसी एक धर्म से जोड़ना गलत होगा. यह सार्वभौमिक है क्योंकि इसमें पूरे ब्रह्माण्ड का निवास है. लेकिन हिंदू, बौद्ध, सिख और जैन जैसे आदि धर्मो में ॐ को पवित्र ध्वनि और पारंपरिक प्रतीक के रूप में माना जाता है. कुछ बुद्धिजीवी इसे हिंदू धर्म का प्रतीक मानते है लेकिन ॐ किसी एक की संपत्ति नहीं है. इस पर सभी का समान अधिकार है.

ओम का जाप शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक और बौद्धिक शांति प्रदान करता है. इसके निरंतर जाप से हमारी आत्मा सक्रिय हो जाती है. शरीर में नई चेतना व ऊर्जा का समावेश होता है. शरीर में मौजूद मृत कोशिकाएँ भी पुनः जीवित हो जाती है. मन-मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. इस मंत्र का शरीर पर इतना प्रभावी असर है की इसे सभी मंत्रो का बीज मंत्र, ध्वनियों एवं शब्दों की जननी कहा जाता है. ॐ तीन अक्षरों से मिलकर बना है. अ उ म्!! “अ” का अर्थ है उत्पन्न होना, “उ” का तात्पर्य है उठना, उड़ना अर्थात् विकास, और “म” का मतलब है मौन हो जाना अर्थात् “ब्रह्मलीन” हो जाना. इसलिए ॐ को सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और पूरी सृष्टि का द्योतक माना जाता है. ॐ की कई अन्य व्याख्याएँ भी दी जाती है जैसे- अ उ म् क्रमश: – वर्तमान, भूत और भविष्य. ब्रह्मा, विष्णु और शिव. जागने की स्थिति, सपनें देखने की स्थिति और गहरी निद्रा की स्थिति. अज्ञान, गतिशीलता और शुद्धता. ओम शब्द की तीनों ध्वनियों को जब जोड़ दिया जाता है तो ओम का अर्थ होता है आदि, मध्य और अंत.

रिसर्च एंड इंस्टीट्‌यूट ऑफ न्यूरो साइंस के प्रमुख प्रोफ़ेसर जे. मार्गन व उनके सहयोगियों के साथ से लगभग सात वर्षो तक ‘ओम’ मंत्र के प्रभावों पर अध्ययन किया. जिसमें पाया गया की मात्र ओम मंत्र का उच्चारण करने से शरीर रोग व तनाव मुक्त हो जाता है. दिल और दिमाग के रोगों से पीड़ित लोगों को इस मंत्र से बेहद लाभ होता है. घातक बीमारी में भी यह मंत्र जादू की तरह अपना असर दिखाता है.

कैसे और कब करे ओम का जाप –

प्रातःकाल पवित्र होकर इस मंत्र का जाप कभी भी किसी भी वक्त और किसी भी स्थिति में कर सकते है. अगर आप कुश के आसन पर बैठकर पूर्व की तरफ मुख कर के जाप करते है तो यह उत्तम माना जाता है. इस मंत्र का अभ्यास सुखासन, पद्मासन, अर्धपद्मासन, वज्रासन आदि में बैठकर भी कर सकते हैं. 5, 7, 11 या 21 बार इसका उच्चारण समय सुविधा अनुसार कर सकते है. ॐ के जाप में जप माला का प्रयोग भी किया जा सकता है. ॐ शब्द को जोर से या फिर धीरे-धीरे भी बोल सकते है.

आइये जानें, आध्यात्मिक दृष्टि से ओम के जाप से क्या-क्या लाभ होते है –

एकांत व आराम की जगह का चयन करे इस मंत्र जाप के लिए. निरंतर इस मंत्र के अभ्यास से मनुष्यों को ईश्वर के समीप होने की अनुभूति होती है. मनुष्य का ईश्वर पर विश्वास अटल हो जाता है यानी मनुष्य ईश्वर के करीब पहुँचता है. ओम मंत्र के असर से परिचित होने के पश्चात मनुष्य दुनिया के पीछे नहीं बल्कि अपने लक्ष्य के पीछे दौड़ने के लिए जीता है. इस मंत्र की ताकत से मनुष्य अपने मन से अनजाने डर से मुक्त होकर साहस और उत्साह को स्थान देता है. ओम के अभ्यास से मनुष्य मृत्यु के भय को भी जीत लेता है और एक महान जीवन की ओर खुद को प्रेरित करता है. इसके अभ्यास से मनुष्य को जीवन चक्र का रहस्य समझ में आ जाता है और मुक्ति को प्राप्त होता है. धार्मिक दृष्टि से माना जाता है कि ओम में त्रिदेवों का वास होता है इसलिए सभी मंत्रों से पहले इस मंत्र का उच्चारण किया जाता है जैसे ओम नमो भगवते वासुदेव, ओम नमः शिवाय. ओम का ध्यान करने से सभी बाधाएँ दूर हो जाती है और खुद को समझना आसान हो जाता है.

आइये जानें ॐ कैसे है स्वास्थ्यवर्द्धक –

* इसके उच्चारण से खून का प्रवाह सुचारू रहता है और हृदय दुरुस्त रहता है.
* कई बार उच्चारण मात्र से शरीर तनाव रहित हो जाता है. क्योंकि इस मंत्र के उच्चारण से शरीर के विषैले तत्व दूर होते है.
* थकान, घबराहट या अधीरता की स्थिति में ॐ के जाप से उत्तम कुछ नहीं.
* इससे पाचन तंत्र की शक्ति मजबूत होती है.
* ओम की ध्वनि पेट, सीने और नासिका में कंपन पैदा करती है जिससे मन शांत होता है और एकाग्रता में सुधार होता है. इतना ही नहीं इस कंपन से पेट, छाती और नाक की समस्या भी दूर होती है.
* अगर इस मंत्र का जाप एक निश्चित समय पर प्रतिदिन किया जायें तो रोजमरा की समस्या से निजात मिलता है और उदासी से बचा जा सकता है.
* किसी भी योग या व्यायाम से पहले इस मंत्र का अभ्यास किया जाए तो शरीर की गतिविधिया बेहतर हो जाती है और ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है.
* शरीर में स्फूर्ति का संचार होता है.
* ब्लडप्रेशर नियंत्रित रहता है.
* इससे शरीर में फिर से युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता है.
* ॐ के अभ्यास से स्मरण शक्ति तेज होती है. बच्चों को शुरू से ही इस मंत्र का अभ्यास करवाना चाहिए.
* इसके उच्चारण से दिमाग को शांति मिलती है जिससे ब्रेन से संबंधित बीमारियों का खतरा कम हो जाता है.
* नकारात्मक सोच जैसे – काम, क्रोध, घृणा, मोह, लोभ, भय, विषाद का विनाश होता है जिससे शरीर कई बीमारियों की चपेट में आने से बच जाता है. जैसे – हाइपर टेंशन, थाईराइड, हाई बीपी, मोटापा, हृदय घात, डिप्रेशन, शारीरिक दर्द, आलस्य, कामुकता, अनिद्रा, झूठी धारणा आदि.
* रात को सोते समय कुछ देर इसका अभ्यास करे, अनिद्रा की समस्या सदा के लिए दूर हो जायेगी.
* एक रिसर्च के मुताबिक इस मंत्र के जाप से बांझपन की समस्या दूर होती है और एड्स जैसी गंभीर बीमारी का असर भी कम होने लगता है.
* इसके जाप से दिल की धड़कन व्यवस्थित होती है और शरीर में काम करने की क्षमता बढ़ जाती है.
* कुछ विशेष प्राणायाम के साथ इसे करने से फेफड़ों को मजबूती प्रदान होती है.
* ॐ के पहले शब्‍द का उच्‍चारण करने से कंपन पैदा होती है. इस कंपन से रीढ़ की हड्डी प्रभावित होती है और इसकी क्षमता बढ़ जाती है. इस मंत्र के दूसरे शब्द के उच्चारण से गले में कंपन होता है जो थायरायड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव डालता है. तीसरे शब्द के उच्चारण से श्वास संबंधी समस्या ठीक होती है.

ॐ के जाप से होने वाले मानसिक लाभ –

* जीवन जीने का उद्देश्य और लक्ष्य का ज्ञान होता है.
* गंभीर रूप से ग्रसित मानसिक व्यक्ति को भी लाभ पहुँचता है.
* व्यवहार में नम्रता व मधुरता आती है. जिससे दूसरों के साथ सम्बन्ध उत्तम और विश्वसनीय होते हैं. शत्रुता भी मित्रता में बदलने लगती है.
* प्रकृति को करीब से समझने लगते है और बेहतर तालमेल बैठता है. भावी विकट समस्यायों को पहले से ही भांपने की शक्ति जागृत होने लगती है.
* इसके अभ्यास से बुरे विचार दूर होते है. साहस का विकास होता है और मनुष्य को दुनिया की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति मिलती है.
* जीवन से भय का खात्मा होता है. व्यक्ति सुख और जोश से अपना जीवन व्यतीत करता है. यहाँ तक की मृत्यु को भी ईश्वर की व्यवस्था समझ कर हँस कर स्वीकार करता है.
* मानसिक तौर पर व्यक्ति सुख-दुख के खेल से वाकिफ हो जाता है. जिससे वो विचलित नहीं होता किसी भी परिस्थिति में.
* इस मंत्र के अभ्यास से मनुष्य अपने जीवन से संतुष्ट होते है मानसिक तौर पर और एक नई चेतना का जन्म होता है.
* सोचने की शक्ति में वृद्धि होती है और दिमाग को कभी थकान महसूस नहीं होती.
* इस मंत्र के अभ्यास से निराशा दूर होती है और गुस्से पर कंट्रोल होता है.
* इसका जाप करने वालो में खुदकुशी जैसे कायरता के विचार आस-पास भी नहीं मंडराते. अगर ऐसे विचार से कोई ग्रस्त भी है तो वो भी दूर हो जाते है.

ओम के नियमित अभ्यास से आत्मिक शांति मिलती है इस बात को विज्ञान भी स्वीकार करता है. किसी भी मंत्र का जाप करे, उसमें पूरी पवित्रता का और सही उच्चारण का पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए. ओम के जाप में इस बात का विशेष ध्यान रखे. ॐ का जाप करने वाले और सुनने वाले दोनों ही लाभांवित होते है. अगर आप अपने जीवन से किसी भी तरह से निराश या हताश है तो कुछ दिन इस मंत्र का जाप कीजिए. परिवर्तन जरूर दिखेगा. क्योंकि ॐ केवल पवित्र ध्वनि ही नहीं अपितु अनंत शक्ति का भी प्रतीक है. अगर आप अपने जीवन में सर्वाधिक सफलता की ओर बढ़ना चाहते है तो ॐ जाप को नियमित कीजिए. ॐ की महिमा वेद, पुराण, उपनिषद व अन्य ग्रंथों में शुरू और अंत दोनों में किया गया है. इसका उच्चारण पूजा, प्रार्थना, शादी, ध्यान, योग, अध्यात्मिक व अन्य अनुष्ठान में सर्वप्रथम किया जाता है. इसकी अपार शक्ति को देखते हुए धर्म गुरू ओम का जाप करने की सलाह देते हैं. जबकि वास्तुविदों का मानना है कि ओम के प्रयोग से घर में मौजूद वास्तु दोष को भी दूर किया जा सकता हैं. ॐ के उच्चारण में इतने रहस्य छुपे हुए है की बयान करना नामुमकिन हैं. यह एक अद्भुत ध्वनि है. यह आत्मा का संगीत है इसे अपने जीवन में जगह दे. आपके जीवन में मिरेकल होगा.

ओम ध्वनि के 100 से भी अधिक अर्थ दिए गये है. हमने संक्षेप में इसके सभी फायदों को बताने की एक छोटी सी कोशिश की है. आपको हमारी जानकारी कैसी लगी? सदैव खुश रहे और स्वस्थ रहे.

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