पेरेंट्स कैसे करे अपने बच्चे की पढ़ाई मे मदद

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दोस्तों! आप अपने बच्चे को सब कुछ देना चाहते है और देते भी है. बस आपकी एक ही इच्छा रहती है की आपके बच्चे का मन पढ़ाई में लगे. लेकिन जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होते जाता है पढ़ाई में रूचि कम और मौज-मस्ती व शैतानी में ज्यादा, जो आज के पेरेंट्स की बहुत बड़ी समस्या है. पढ़ाई चाहे प्रतियोगी परीक्षा, बोर्ड या स्कूल की. आप कहते है बेहतर भविष्य के लिए पढ़ना तो जरूरी है, सफल इंसान बनने के लिए पढ़ना जरूरी है, पढ़ाई के बिना जीवन में कुछ नहीं है, पढ़ाई तुम्हें सभ्य इंसान बनाती है लेकिन आपकी सारी बातों को दरकिनार कर आपका बच्चा फिर से मनमानी करने लग जाता है. अभिभावक की यह जिम्मेदारी बनती है की बच्चे का मन पढ़ाई में क्यों नहीं लग रहा. कारण को खोजे और उसे दूर करे. बच्चा क्यों नहीं पढ़ रहा, पढ़ाई से क्यों भाग रहा है, पढ़ता तो बहुत है लेकिन परिणाम उम्मीदनुसार नहीं आते. ऐसे ही कई कारण है जिनका जानना बहुत जरूरी है.

तो आइये सबसे पहले यह जाने पढ़ाई में मन ना लगने के क्या-क्या कारण है :

* पढ़ाई का उचित माहौल का ना होना
* पढ़ाई के लिए कोई निश्चित समय का ना होना
* रेग्युलर पढ़ाई का अभाव. सिर्फ परीक्षा के समय पढ़ना, जो पढ़ाई में मन ना लगने का मुख्य कारण है
* उचित मार्गदर्शन की कमी
* एकाग्रता की कमी और लक्ष्य पर फोकस ना होना
* दृढ़ निश्चय और आत्मविश्वास की कमी
* गेम, क्रिकेट, टीवी, इंटरनेट पर अधिक समय देना. जरूरत से ज्यादा इन सब पर समय देने से यह पढ़ाई के बहुत बड़े बाधक है.
* आलस्य, किसी भी काम को टालने की बीमारी.
* अन्य कामों में व्यस्तता
* समय सारिणी का निर्धारित ना होना
* अन्य कार्यो से व्यवधान
* पढने के लिए उपयुक्त सामग्री का ना होना
* अपनी बात को खुलकर ना रख पाने की समस्या
* किसी से अपनी तुलना
* मन का हमेशा विचलित रहना
* पढ़ाई का प्रेशर

इनके अलावा और भी कई कारण हो सकते है पढ़ाई में मन ना लगने का. सभी के लिए कारण अलग-अलग हो सकते है. उचित मार्गदर्शन की कमी इन सभी कारणों में से मुख्य है. सही मार्गदर्शन अच्छी पढ़ाई के लिए बहुत जरूरी है. जो स्टडी को प्रेरित करता है. सही मार्गदर्शन से कम मेहनत से अच्छे परिणाम आ सकते है वही अगर मार्गदर्शन ही ना किया जाए तो बच्चे कठिन मेहनत के बाद भी उचित परिणाम नहीं ला पाते.

दोस्तों, बच्चों का स्वभाव बहुत चंचल होता है ऐसे में खेल-कूद की तरफ़ उनका ध्यान जाना बनता है. लेकिन आपकी जिम्मेदारी यह बनती है की आप पढ़ाई और खेलकूद में ऐसा तालमेल बिठाए की बच्चा पढ़ाई के लिए भी आगे रहे. आज के समय में सभी पेरेंट्स इस बात को लेकर बहुत चिंतित रहते है की उनका बच्चा पढ़ता नहीं हैं. लेकिन दोस्तों! चिंता किसी समस्या का हल नहीं. लेकिन अभिभावक यदि चाहें तो बच्चों के मन में पढ़ाई को लेकर जो नीरसता है उसे सरसता में बदल सकते हैं. किसी भी समस्या के लिए उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से तैयार कीजिए. उन्हें इस तरह से शिक्षित कीजिए की वो अपने जीवन की सभी चुनौतियों का सामना बखूबी कर सके. आपकी ऐसी परवरिश आपके बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बना देगी. इस तरह से आप उनकी पढ़ाई में ही नहीं बल्कि उनकी हर समस्या को सुलझाने में भी मदद कर रहे हैं. इसके लिए अभिभावकों को कुछ इस तरह से खुद को तैयार करना होगा.

पेरेंट्स कैसे करे अपने बच्चे की पढ़ाई में मदद :

1. आपके बच्चे को पढ़ाई में मन ना लगने का उपरोक्त जो भी कारण परेशान कर रहा है सबसे पहले उसे दूर कीजिए.

2. बचपन से बच्चों को अच्छी आदतें व शिष्टाचार के संस्कार दे. उनकी दिनचर्या व्यवस्थित बनाए. ताकि बच्चे अपना कार्य समय पर करने के आदी हो जाए. इस तरह से बच्चा समय की कद्र करना सीखगा. यह कभी ना भूले आप अपने बच्चे के प्रथम शिक्षक है और आप ही बच्चे के जीवन के पहले मार्गदर्शक कहलाएँगे. आपके द्वारा सिखाई गई इन्हीं गुणों की परछाई सदैव उनका साथ देगी, तब भी जब आपका भी साथ ना होगा.

3. अपने घर का माहौल पॉजिटिव रखे. यानी की ना टेंशन देनी है और ना ही लेनी हैं. इससे आपके बच्चे के दिल और दिमाग पर सकारात्मक असर पड़ेगा.

4. बच्चों को यह अहसास दिलाए की आप उनके साथ हर परिस्थिति में हो. इससे बच्चे को कभी अकेलापन नहीं खलेगा.

5. आजकल माहौल बहुत बदल गया है. बड़े होते बच्चों के साथ एक पेरेंट्स की तरह नहीं बल्कि एक दोस्त की तरह पेश आए. इससे बच्चे अपनी समस्या सबसे पहले आपसे शेयर करेंगे. बच्चे के मन में आपके प्रति डर होगा तो बच्चा फ़्रस्टेड फील करेगा. फिर ऐसे मूड से भला पढ़ाई अच्छी कैसे होगी!!

6. बच्चों को अपना समय दे. इसके लिए अगर आपको घूमना-फिरना, बातें, मूवी, मार्केट आदि छोड़नी भी पड़े तो बिना सोचे छोड़ दे. क्योंकि पहली प्राथमिकता आपके बच्चे है. पढ़ाई से पहले अगर बच्चे किसी चीज की जिद्ध करे तो पहले उनकी डिमांड सुने अगर उचित डिमांड हो तो जरूर पूरी करे या फिर आश्वासन दे. लेकिन गलत डिमांड को पूरी ना करने का उचित कारण भी बच्चे को समझाए.

7. बच्चे को जब भी पढ़ाई में मदद की जरूरत हो तो सब काम छोड़कर पहले उसकी मदद करिए. इससे बच्चे का मनोबल बढ़ेगा. बच्चों को यह विश्वास जताए की आप उनकी मदद के लिए हर वक्त फ्री है. कभी भी पढ़ाई के लिए डांटें-फटकारें या मारे नहीं. आखिर बच्चा ही है अपने प्यार का इस्तेमाल करे. बच्चों का मन बहुत नाजुक होता है वो आपकी जरूर सुनेगा. अब बच्चे को कैसे मनाना है यह आपसे बेहतर भला और कौन जान सकता हैं.

8. बच्चों के खाने-पीने का पूरा ध्यान रखे. उनके पढ़ने का कमरा बिल्कुल साफ और रोशनीदार हो. हो सके तो बच्चों की स्टडी टेबल ईशान कोण या उत्तर दिशा की ओर हो जिससे इनका मुख भी इसी दिशा में रहेगा. इससे बच्चों में पॉजिटीविटी और मेमोरी में वृद्धि होती है.

9. वास्तुनुसार पढ़ाई का कमरा शौचालय के नीचे ना हो. कमरे में आईना भी ऐसी जगह ना हो जिससे बच्चों को अपनी किताबों का प्रतिबिम्ब दिखाई दे. ऐसी स्थिति में बच्चों पर पढ़ाई का बोझ बढ़ता हैं. कमरे में खिड़की जरूर हो जिससे हवा और रोशनी की समस्या ना रहे. सूर्य की रोशनी आने से नकारात्मक ऊर्जा का भी नाश होता है. कमरा अस्त-व्यस्त ना हो. अध्ययन कक्ष का रंग हल्का पीला, सफेद और वायलेट हो. ऐसे रंग आँखों को चुभते नहीं है और रोशनी भी सही रहती है. लैपटॉप को दक्षिण-पूर्वी दिशा में रखे. बच्चे को प्रेरणा देने हेतु उनके कमरे में उगते सूर्य या घोड़े या ऊँचे पहाड़ का चित्र लगाए. कोई भी चित्र या वस्तु हिंसाजनक ना हो. रूम में सर्टिफिकेट और ट्राफी सजाए, इससे बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहन मिलता है.

10. कभी-कभी बच्चों के लिए अनुशासन जरूरी होता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं की बच्चे की तुलना किसी ओर से की जाए. इससे बच्चे हीनभावना से ग्रस्त हो जाते है और अपना आत्मविश्वास खो बैठते है. हर बच्चे में अपनी काबिलियत होती है. उन्हें किसी ओर जैसा बनने के लिए विवश ना करे. अति दबाव दुर्घटना का कारण हो सकता हैं. बच्चे के कुछ अच्छे प्रदर्शन पर उनकी तारीफ करना ना भूले. इससे बच्चे पढ़ाई के प्रति उत्साह और रूचि दिखाएँगे.

11. अगर बच्चा पढ़ाई में कमजोर है तो काऊँसलर या टीचर से विचार-विमर्श करे. पढ़ाई में बच्चे की मदद करे. आपके साथ से उसकी पढ़ाई में सुधार आएगा और उसका खोया हुआ आत्मविश्वास भी लौटेगा. अगर बच्चा कोई बुरी संगत या आदतों का शिकार हो गया है तो उसे समझाए. अपने प्यार और साथ का उसे विश्वास दिलाइए और उज्ज्वल भविष्य की और उसे प्रोत्साहित करे.

12. बच्चों में सुबह जल्दी उठकर पढ़ने की आदत शुरू से डालें, शांति होने के कारण यह समय पढ़ाई का सबसे उत्तम समय माना जाता है. इस समय में पढ़ा हुआ सब याद रहता है. बच्चों की अच्छी मेमोरी के लिए सुबह दूध के साथ भीगे हुए बादाम दे. इसके अलावा जूस, सूप, दूध, हरी सब्जियाँ आदि को भी आहार में शामिल करे.

अभिभावक बच्चों को प्रोत्साहित करे. उनपर दबाव ना बनाए बल्कि ऐसा माहौल बनाए की वे खुद पढ़ाई की कीमत समझे. बच्चों की अगर कोई समस्या है तो उसे दूर करे डराए नहीं. बच्चे का मन जब हल्का होगा तभी तो वो पढ़ाई में अपना मन लगा पाएँगे. आजकल कॉम्पीटिशन बहुत है बच्चे को पहले से ही बहुत दबाव है ऐसे में आप उनके हेल्पर बने. बच्चे को यकीन में ले की आप उनपर गुस्सा नहीं करेंगे बल्कि उन्हें समझेंगे. समय बदल गया है अब बच्चे आँख दिखाने से नहीं बल्कि दोस्तों की तरह व्यवहार करने से पढ़ते है. उन्हें सफल लोगों की प्रेरक कहानियाँ सुनाए.

इस तरह सभी पेरेंट्स आज अपने बच्चों के अच्छे सहायक और सलाहकार बनेंगे तभी तो कल यह बच्चे हमारे बुढ़ापे का सहारा बनेंगे. बच्चों में अच्छे संस्कार का बीज बचपन से ही बोइए. अगर कोई बच्चा खूब पढ़ लिखकर बड़ा आदमी बन भी जाए और अपने बड़ों की इज्जत ही करना ना सीखे तो ऐसी पढ़ाई आपके या बच्चे के किस काम की. तभी तो कहा जाता है– ”पढ़े-लिखे होने से पहले योग्य बनो.” बच्चों को समय दे. उन्हें अपने जीवन के अनुभव से वंचित ना रखे. बच्चों के साथ ऐसी बॉनडिंग हो की वो सबसे पहले आपसे अपनी समस्या का हल पूछे.

दोस्तों! हमने यह आर्टिकल अपने प्रैक्टिकल अनुभव व ज्ञान के आधार पर आपके साथ शेयर किया है. इन टिप्स को फॉलो करे. मुश्किलें कहाँ नहीं होती लेकिन कोशिश कुछ भी कर सकती है. आपकी एक कोशिश आपके बच्चे को सही राह दिखाएगी. आपको यह लेख कैसा लगा. अगर इस लेख से आपको कोई भी मदद मिलती है तो हमें बहुत खुशी होगी. अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे. हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ है. हमेशा स्वस्थ रहे और खुश रहे.

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