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रिश्ते में आए तनाव के साथ कैसे निपटें

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हर व्यक्ति के लिए उसके रिश्ते सबसे ज़्यादा मायने रखते हैं और इन्हीं रिश्तों की खातिर हर शख्स इतनी दौड़-भाग करता है ताकि वो इतना काबिल हो सके कि अपने इन अनमोल रिश्तों की सारी जरूरतें पूरी कर सके, इन्हें सारे आराम मुहैया करा सके। लेकिन कई बार अपने करियर में हम इतने मशगूल हो जाते हैं कि भूल ही जाते हैं कि हमारे रिश्ते घर पर हमारा इंतज़ार भी कर रहे हैं। रिश्तों के भी कई रंग होते हैं- पैरेंट्स के साथ रिश्ता, बच्चों के साथ रिश्ता, दोस्तों के साथ रिश्ता और बात जब पति-पत्नी के रिश्ते की हो तो ये डोर काफी नाज़ुक दिखाई देती है जिसे करीने से रखा जाए तो रिश्ता काफी मजबूत होता है और लापरवाही के साथ रखा जाए तो इस रिश्ते में तनाव आने में ज़्यादा देर नहीं लगती है।

रिश्ता चाहे कोई भी हो, लेकिन वो होता बेशकीमती है और उसमें तनाव आने के कारण एक जैसे भी हो सकते हैं और अलग-अलग भी। आप ये तो जानते हैं ना कि रिश्ता कोई भी हो, उसकी सेहत के लिए तनाव बिल्कुल अच्छा साबित नहीं होता और देखते ही देखते ये तनाव उस रिश्ते को खोखला करता जाता है। ऐसे में ये जानना बेहद ज़रूरी है कि आखिर ऐसा क्या किया जाए जिससे रिश्ते में तनाव के लिए जगह ही ना रहें। तो चलिए, आज इसी बारे में बात करते हैं कि रिश्ते में आए तनाव से कैसे निपटा जाए –

तनाव को स्वाभाविक समझना छोड़ दीजिये –
आज के इस दौर में हमने तनाव होने को इतना ही नेचुरल और ज़रूरी मान लिया है जितना रोज़ लिए जाने वाले लंच और डिनर को हम ज़रूरी मानते हैं। अगर हम अपने रिश्ते में से तनाव को दूर करना चाहते हैं तो सबसे पहले हमें इस तनाव को अपनाने से इंकार करना होगा। हर बात और हालात में स्ट्रेस लेने की हमारी आदत कब हमारे रिश्तों में अपनी जगह बनाने लग जाती है, ये हम जान भी नहीं पाते। इसलिए सबसे पहले हमें इस तनाव शब्द को सोचना, बोलना और ज़रूरी समझना बंद करना होगा क्योंकि लाइफ सिर्फ तनाव से नहीं भरी है बल्कि इसमें ढ़ेरों खुशियां भी है जो हमारे रिश्तों में छिपी हैं।

मुस्कुराना शुरू कीजिये –
एक बार जब आप तनाव को अपने डेली रूटीन का ज़रूरी हिस्सा मानना छोड़ देंगे तो आप महसूस करेंगे कि आप मुस्कुराने लगे हैं और इसी मुस्कान के कारण आप लाइट फील करने लगेंगे और आपके रिश्ते में भी ये हल्कापन झलकने लगेगा।

खामियां सभी में होती है –
अगर आप तनाव में इसलिए रहते है क्योंकि आपके साथी में ढेरों खामियां है और वो आपको ज़रा भी नहीं समझते। तो ज़रा रुक कर सोचिये कि क्या आप परफेक्ट है ? क्या आप अपने रिश्ते को अपना 100% दे पा रहे हैं ? जैसे ही आप ये सवाल खुद से करेंगे, आपको अपनी गलतियों और कमियों का अंदाजा होने लगेगा और आप ये भी समझ पाएंगे कि रिश्ते में तनाव की जिम्मेदारी सिर्फ आपके साथी की ही नहीं है बल्कि आप भी इसमें बराबर के दोषी है। बस इतना जान लेने के बाद, बिना देर करे, आप अपने साथी के पास फुर्सत से बैठिये और उनकी शिकायतों को सुनिए। ऐसा करके आप तनाव के कारण जान पाएंगे और बातों ही बातों में तनाव कब आपके रिश्ते से ओझल हो चुका होगा, ये आप जान भी नहीं पाएंगे।

हर रिश्ते का अपना सम्मान होता है –
क्या आप नहीं चाहते कि आपको आपके हर रिश्ते में सम्मान मिले ? चाहते है ना, तो फिर यही बात हम उस समय क्यों भूल जाते हैं जब सम्मान देने की बारी हमारी होती है। सम्मान हर रिश्ते की पहली ज़रूरत होती है और आपसे जुड़ा हर रिश्ता अपने लिए सम्मान की अपेक्षा करता है। खासकर पति पत्नी के रिश्ते में अक्सर ये पाया जाता है कि दोनों साथी एक दूसरे की इज्जत नहीं करते हैं और यही से उनके बीच कड़वाहट का आना शुरू हो जाता है। अगर आप सम्मान चाहते हैं तो अभी से अपने हर एक रिश्ते को उसके हिस्से का सम्मान और इज्जत देने में ज़रा भी देर मत कीजिए।

रिश्ते में कोई बड़ा-छोटा नहीं होता –
अक्सर रिश्ते में तनाव का कारण दोनों साथियों के बीच समानता का नहीं होना भी होता है और ये असमानता की दीवार उन्हीं के द्वारा खड़ी की जाती है, जबकि रिश्तों में कोई ऊँचा और कोई नीचा नहीं होता, बल्कि सब बराबर होते हैं इसलिए अगर आप भी अपने रिश्ते को खुद से कम आंकते आये हैं तो अभी से ही ऐसा सोचना छोड़ दीजिये और अपने साथी को बराबरी का दर्ज़ा दीजिये।

गुस्सा किसी भी मुश्किल का हल नहीं हो सकता –
कोई भी बात या घटना आपके मुताबिक नहीं होने पर अगर आप भी बिना सोचे-समझे गुस्सा करने लगते हैं और अब ये आपकी आदत बन चुकी है तो इस आदत को जल्द से जल्द बदल लीजिये क्योंकि मसला कितना ही बड़ा या छोटा क्यों ना हो, गुस्से से उसका हल नहीं निकाला जा सकता बल्कि रिश्ते में तनाव को बढ़ाने में ही सहायक साबित होता है ये गुस्सा।

रिश्ते की सेहत के लिए समय की खुराक है ज़रूरी –
अगर आप महसूस करने लगे हैं कि आजकल आपके रिश्ते में तनाव और तनातनी काफी बढ़ गयी है तो अपने साथी की खामियों पर नज़र डालने से पहले एक बार ये ज़रूर सोचिये कि क्या आपने एक लम्बे समय से उन्हें अपना थोड़ा सा समय भी नहीं दिया है? इस व्यस्तता का कारण जो भी हो, महत्व तो इस बात का है कि आप अपने रिश्ते की अच्छी सेहत चाहते हैं तो तुरंत थोड़ा सा समय निकाल कर उन्हें दे और अपने रिश्ते को फिर से स्वस्थ बना लें।

सुनना भी है बेहद ज़रूरी –
अक्सर आप अपनी बात और अपने तर्क को स्पष्ट करने में ही पूरा समय लगा देते हैं और अपने साथी को उसकी बात कहने का ना मौका देते हैं ना ही उनकी बात को वो महत्व दे पाते हैं जो आप खुद के लिए चाहा करते हैं। किसी भी रिश्ते को निभाने वाले लोग जब 2 होते हैं तो महत्व सिर्फ 1 को ही क्यों मिले। अपनी बात कहिये लेकिन उनकी भी सुनिए।

क्या आप देखभाल करते हैं –
नए और पुराने रिश्तों की हमारी धारणा भी कई बार हमसे ऐसी भूल करा देती है कि जैसे ही रिश्ते को कुछ समय बीत चुका होता है, हम उसे पुराना समझने लगते हैं और इसी कारण अपने साथी को ये बताना ज़रूरी नहीं समझते कि वो हमारे लिए कितना ख़ास है और उनकी खुशियों और उनकी ज़रूरतों की फ़िक्र हमें हैं। इसलिए रिश्ते को नया या पुराना घोषित करने की बजाए उनसे कहिये कि आप उनकी केयर करते हैं। फिर देखिये, रिश्ता पुराना और बोझिल रहता है या फिर से नया हो जाता है।

रिश्ते बहुत सरल होते हैं और एक से नियमों पर चलते हैं। रिश्ते में प्यार की नींव हो, सम्मान हो, समझ हो और एक दूसरे की कद्र करने की भावना हो तो बताइये क्या तनाव जैसी कोई भी स्थिति आपके रिश्ते को छू भी सकती है? आपकी थोड़ी सी केयर से ही आपके रिश्ते में मुस्कान की बहार आ सकती है।

रिश्ते नए या पुराने होते ही नहीं है, ये तो हमारा नजरिया होता है जो नए और पुराने में उलझा रहता है। रिश्ते सिर्फ रिश्ते होते हैं, हमेशा एक जैसे। इसलिए अब ये आप पर निर्भर करता है कि तनाव को स्वाभाविक मानते हुए आप अपने रिश्ते में दूरियां बढ़ाते रहें या अपने रिश्ते के प्रति प्यार भरा नजरिया बनाकर इसे पहले से भी ज़्यादा नया बना लें।

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