शरीर में आयरन की कमी के कारण, लक्षण और उपाय

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हमारा शरीर पूर्णरूप से स्वस्थ कैसे रहेगा यह हमारे आहार पर निर्भर करता है की हम अपने शरीर को कैसा पोषण देते है। शरीर में बहुत तरह के मिनरल, प्रोटीन, विटामिन आदि तत्व होते है जो हमारे शरीर का संतुलन बनाए रखते है। लेकिन किसी भी तत्व की कमी या अधिकता से शरीर रोगग्रस्त भी हो जाता है। इसलिए इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए की सभी पौष्टिक तत्व जरूरत के आधार पर लिए जाए। इसका सबसे आसान तरीका है प्रतिदिन संतुलित भोजन। रोजाना संतुलित भोजन लेने से शरीर में कभी किसी पौष्टिकता की कमी नहीं आएगी। आज हम बात करेंगे शरीर में आयरन की कमी का कैसे पता करे। आयरन यानी लौहा, इसकी कमी अगर नुकसानदायक है तो इसकी अधिकता भी शरीर को कम नुकसान नहीं पहुँचाती।

शरीर के लिए क्यों जरूरी है आयरन –

शरीर में आयरन की पूर्ति जरूरी है लेकिन एक संतुलित मात्रा में। 20ग्राम से अधिक शरीर में आयरन होने से व्यक्ति में हीमोक्रोमेटिक रोग के आसार नजर आने लग जाते हैं और आयरन की कमी से एनीमिया यानी खून की कमी जैसी गंभीर समस्या जन्म ले लेती है जो बहुत ही घातक है। आयरन इसलिए भी जरूरी है क्योंकि मानव शरीर हेमोग्लोबिन बनाने में आयरन का उपयोग करता है। आयरन शरीर में लाल रक्त कण को बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाता है। यह लाल रक्त कण खून का मुख्य घटक है। जो शरीर में अधिक ऑक्सीजन का उत्पादन करती है और श्वास गति की क्षमता को भी बढ़ाती है। आयरन जरूरी ऑक्सीजन को फेफड़ों से लेकर शरीर के अन्य अंगों तक पहुँचाने का कार्य करता है। इतना ही नहीं आयरन ऑक्सीजन का उपयोग मांसपेशियों में कर उसे स्टोर करने का काम भी करता है जिससे शरीर स्वस्थ रहता हैं। हीमोग्लोबिन खून के रंग को लाल करता है। आयरन की कमी शरीर में आ जाने से हीमोग्लोबिन सही ढंग से अपना कार्य नहीं कर पाता इसलिए अपने आहार में आयरन की मात्रा सही रखे।

आयरन की कमी के लक्षण –

शरीर में आयरन की कमी बहुत आसानी से पहचानी जा सकती है यह कोई मुश्किल काम नहीं। जैसे कई बार ऐसा होता है ज्यादा काम भी नहीं किया और थकान आ गई या नींद तो पूरी ली थी लेकिन फिर भी थकान महसूस होती है। इसका मतलब हेमोग्लोबिन का स्तर कम हो रहा है और शरीर को आयरन की पूर्ति बराबर नहीं हो पा रही है। हेमोग्लोबिन की कमी यानी खून की कमी, यह समस्या पुरुषों की तुलना में बच्चों और औरतों को अधिक होती है क्योंकि बच्चों के जैसे ही औरतें भी अपना पूरा ख्याल नहीं रख पाती और मासिकधर्म के कारण कमजोरी आ जाती है। आयरन की कमी का कारण इस तरह से भी जाना जा सकता है की व्यक्ति शारीरिक तकलीफ से कितना प्रभावित है। खून की कमी होते ही चेहरा और नाखून पीले दिखने लगते है। कुछ ऐसे भी संकेत नजर आते है जैसे –

* हर समय कमजोरी और थकावट लगना
* स्वभाव में चिड़चिड़ापन आना
* आँखों के आगे अंधेरा आना
* चक्कर आना
* सिर में दर्द रहना
* साँसे तेज-तेज चलना या साँस लेने में असुविधा
* अनियमित मासिकचक्र
* तुलनात्मक रूप से धीमी वृद्धि और विकास का होना
* बच्चों में व्यवहारिक और मानसिक समस्या का आना
* एकाग्रता में कमी
* बालों का झड़ना

आयरन की कमी कैसे हो पूरी –

आयरन की कमी कभी भी किसी को भी और किसी भी उम्र में हो जाती है। इससे घबराने के बजाय आप नियमित रूप से अच्छा, पौष्टिक और संतुलित आहार अपनी दिनचर्या में शामिल करे। समस्या अधिक लगे और तुरंत इस कमी को दूर करना चाहते है तो अपने डॉक्टर के निर्देश पर आयरन टैबलेट भी ले सकते है। लेकिन प्राकृतिक तरीके हमेशा सुरक्षित होते है इसलिए अपने आहार में बदलाव जरूर लाए। आयरन की कमी का निदान करने के लिए खून बढ़ाने वाले आहार का चयन करे। भोजन में चोकरयुक्त आटा, मल्टीग्रेन आटा, काबुली चना, अंकुरित अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, संतरा का रस, राजमा, सोयाबीन, हरी मुंग व मसूर दाल, सूखे मेवे, गुड, अंगूर, अमरूद, अंडा व दूध, मेथी, सरसों का साग, चौलाई की सब्जी, मछली आदि के सेवन से शरीर में खून की मात्रा बढ़ती है।

आयरन क्या करता है –

शुद्ध लौहा शरीर के लिए नुकसानदायक होता है वहीँ भोजन के रूप में गया आयरन लाभदायक हो जाता है। भोजन के रूप में जैसे ही आयरन जाता है आंत आयरन के तत्व को चूस लेती है और खून मे मौजूद ट्रांसफेरिन नाम का प्रोटीन आयरन के साथ ऐसा मिक्स होता है की आयरन इसकी बनावट का पार्ट दिखता है। आयरन के साथ से ट्रांसफेरिन शरीर की विषैले तत्व से रक्षा करता है। पूरे शरीर में ट्रांसफेरिन यानी खून का प्रवाह करते हुए आयरन को अस्थिमज्जा में पहुँचा देता है जहाँ हीमोग्लोबिन बनता है। इस तरह से आयरन शारीरिक क्रिया करता है।

आयरन की अधिकता से नुकसान –

हमारा शरीर प्रकृति के आधार पर चलता है। जिस तरह प्रकृति का संतुलन बिगड़ने से आपदा आती है ठीक उसी तरह शारीरिक संतुलन बिगड़ने से शारीरिक समस्या आती है। मानव शरीर एक संतुलित आहार और स्वस्थ रूटीन पर चलता है। इसमें कुछ कम-ज्यादा होने से कोई चिंता की बात नहीं। लेकिन निरंतर हो रही लापरवाही से शरीर भी रिएक्शन करता है जो कई बीमारियों के रूप में सामने आता है। शरीर में अगर पौष्टिकता की कमी हो तो भी नुकसान है और अधिकता हो तो भी नुकसान है। इसी तरह अगर शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है तो कई रोगों के होने की संभावना भी बढ़ जाती है जैसे – मधुमेह, कैंसर, लीवर की समस्या, हार्ट-अटैक, गठिया, नपुंसकता, हाजमा बिगड़ना आदि कई गंभीर बीमारियों का खतरा बना रहता है।

गर्भवती औरतों के लिए क्यों जरूरी है आयरन –

गर्भवती महिला और उसके अजन्मे शिशु के लिए आयरन की उच्च मात्रा में जरूरत पड़ती है। यह इतना मुख्य घटक है की इसकी कमी से हीमोग्लोबिन का स्तर घट जाता है और माँ व शिशु दोनों को एनीमिया का खतरा बढ़ जाता है। इन दिनों में आहार के द्वारा तो आयरन की पूर्ति की सलाह दी जाती है साथ ही डॉक्टर भी आयरन की टैबलेट देते है जिससे शिशु स्वस्थ पैदा हो। इस अवस्था में कई बार बिना काम के थकावट और कमजोरी महसूस होती है जिसका कारण होता है आयरन की कमी। इसलिए गर्भवती महिलाएँ अपना पूरा ख्याल रखे और नियमित रूप से अपनी जाँच करवाती रहे।

बहुत छोटे और कुछ बड़े बच्चों को वयस्कों की तुलना में अधिक आयरन की जरूरत पड़ती है, जिससे उनका मानसिक और शारीरिक विकास तेजी से हो सके। लौहे के बर्तनों में बने भोजन में आयरन के गुण समा जाते है जो शरीर के लिए अच्छा आहार माना जाता है। भोजन बनाते वक्त लौहे के बर्तन में खटाई का प्रयोग ना करे। अपने आहार चिकित्सक की मदद से संतुलित आहार चार्ट तैयार करवाए और उसका पालन करे। अच्छे स्वास्थ्य की कल्पना तभी संभव है जब आप अपने प्रति सजग और सतर्क होंगे।

अगर आपको किसी भी तरह की शारीरिक समस्या या खून की कमी के कोई संकेत नजर आए तो तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह ले क्योंकि किसी भी परिस्थिति में डॉक्टर से अच्छा कोई मार्गदर्शक नहीं होता। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है। हमने यह लेख प्रैक्टिकल अनुभव व जानकारी के आधार पर आपसे साझा किया है। अपनी सूझ-बुझ का इस्तेमाल हमेशा करे। आपको यह लेख कैसा लगा? अगर इस लेख से आपको कोई भी मदद मिलती है तो हमें बहुत खुशी होगी। अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे। हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ है। हमेशा स्वस्थ रहे और खुश रहे।

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