अभी हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काले धन के खिलाफ एक अहम कदम उठाते हुए 1000 और 500 के नोटों पर पाबंदी लगा दी जिस से कई लोगों का जमा काला धन सबके सामने आ गया। यह कदम उठाने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रबल होना बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन हमारे देश में कई ऐसे मुद्दे और भी हैं जिन पर इस तरीके के कड़े कदम उठाना बेहद ही जरूरी है नहीं तो हमारे देश का विकास उस गति से नहीं हो पाएगा जिस गति से हम चाहते हैं।

यह भी कह सकते हैं कि यह हमारे विकास के लिए सबसे बड़ी दिक्कतें हैं। तो चलिए आज हम आपको कुछ ऐसी ही परेशानियों के बारे में बताते हैं जो बिना इस प्रकार के कदम उठाए खत्म नहीं हो सकती।

नदियों की सफाई

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यह बात तो इतिहास में भी दर्ज है कि मानव संस्कृति और सभ्यता नदियों के तटों पर ही विकसित हुई है। जिसके पीछे कारण यह था कि नदियों का पानी पीने योग्य होता है और यह हमारे विकास में सबसे अहम योगदान निभाता है। लेकिन जैसे-जैसे भारत विकास की ओर बढ़ता गया नदियों की उपेक्षा होती गई और आज के समय में भारत की नदियां इतनी गंदी है कि उनको अगर नाला कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। इनकी सफाई के लिए अहम कदम उठाना और कानून बनाना और एक महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गई है। हम आशा करते हैं कि इनके खिलाफ भी अहम कदम उठाए जाएंगे।

उत्सव पर होने वाला प्रदूषण

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हमारा देश उत्सव को बड़ी ही धूम-धाम से बनाता है और हाल ही में मनाई गई दिवाली का असर दिल्ली में देखने को मिला जहां पर प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ गया था कि लोगों का जीना ही बेहाल हो गया। कई लोगों को सांस लेने और आंखों में जलन होने की तकलीफ महसूस हुई लेकिन इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा यह अभी तक निश्चित नहीं हुआ है। हम आशा करते हैं कि इस प्रकार का कानून बनाया जाएगा कि खुले में प्रदूषण फैलाने पर पाबंदी लगाई जा सके त्यौहार को बिना प्रदूषण के भी बनाया जा सकता है।

खेतों पर जलाए जाने वाले अवशेष

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खेतों और फसलों के अवशेषों को बड़ी मात्रा में बुआई से पहले जलाया जाता है जिस से काफी प्रदूषण फैलता है लेकिन इसके खिलाफ अभी ना तो कोई कानून है और ना ही इस बात पर किसी का ध्यान भी गया है। इसके खिलाफ अगर कोई सख्त कानून नहीं बनाया गया तो यह भी एक प्रकार का विकराल रूप लेता चला जाएगा।

प्रदूषण का बढ़ता प्रभाव

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भारत में प्रदूषण एक अभिशाप के रुप में जन्म लेता जा रहा है और हाल ही के घोषित किए गए आंकड़ों में इसका विकराल रुप देखने को मिला। चाहे वह जल प्रदूषण हो या वायु प्रदूषण ध्वनि प्रदूषण हो या मृदा प्रदूषण भारत में हर प्रकार के प्रदूषण अपने पैर पसारता जा रहा है और इसका जिम्मेदार और कोई नहीं हम खुद हैं। क्योंकि हम किसी भी समस्या को खत्म ही नहीं कर रहे बल्कि उसको बढ़ावा देते चले जा रहे हैं। अगर काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम उठाया जा सकता है तो इसके खिलाफ भी ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

पर्यटन स्थलों की सफाई

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भारत में पर्यटन एक अहम उद्योग भी है और लाखों सैलानी भारत में पर्यटक स्थलों को घूमने आते हैं। लेकिन पर्यटक स्थलों पर बढ़ता जा रहा कचरा और मूलभूत सफाई का ना होना भारत की छवि को धूमिल कर रहा है जिसके लिए हमारी सरकार को अहम कदम उठाना चाहिए।

अव्यवस्थित सड़क व्यवस्था

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भारत में यातायात व्यवस्था भी कोई ज्यादा अच्छी नहीं है। चाहे रास्ता खाली हो या भरा हुआ लोग बिना होरन बजाए सीधे नहीं निकल सकते क्योंकि कोई भी कभी भी कही से भी अपनी गाड़ी बीच में ला सकता है इसे भी व्यवस्थित करने की जरूरत है।

जनसंख्या में अंधाधुंध वृद्धि

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यह बात किसी से छुपी हुई नहीं है कि भारत जनसंख्या के मामले में चीन से सिर्फ एक कदम पीछे और अगर यही गति रही तो कुछ ही दिनों में भारत चीन से आगे हो जाएगा। उसके बाद हर व्यक्ति को पर्याप्त रोटी कपड़ा और मकान उपलब्ध करना भी एक बहुत बड़ा कार्य बन जाएगा और देश के विकास में भी यह बहुत बड़ी बाधा है। इसके खिलाफ भी एक कठोर कानून की आवश्यकता है।

भारत में स्त्री पुरुष असमानता

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भले ही भारत में लड़कियों ने कितनी भी तरक्की कर ली हो लेकिन उन्हें अभी तक समाज में सम्मान स्थल नहीं मिला है। यह भी एक अहम मुद्दा है जिस के प्रति भारतीय सरकार को कुछ कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।

वेश्यावृत्ति और तस्करी

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यह दोनों मुद्दे भारत मैं एक ज़हर की तरह घुलते जा रहे हैं जिसके कारण हमारा सामाजिक स्तर गिरता चला जा रहा है। कई लड़कियों को जबरन इस व्यापार में धकेला जा रहा है जिससे उनका भविष्य खतरे में है। सरकार को इनके खिलाफ कुछ अहम कदम उठाने चाहिए।

बाल मजदूरी

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यह बात हमेशा से कही जाती है कि भारत का भविष्य और उसके बच्चों के हाथ में है। लेकिन अगर उन बच्चों को बचपन में ही काम पर लगा दिया जाएगा तो इस भविष्य का रखवाला कौन रहेगा। यह बात हम सभी को सोचनी चाहिए और बाल मजदूरी के खिलाफ सभी को एकजुट होकर कदम उठाना चाहिए नहीं तो भारत का भविष्य खतरे में ही रहेगा।