ठंड के दिनों में क्यों बहती है नाक

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सर्दियों का मौसम आते ही एक आम बीमारी जो सब लोगों में हो जाती है वह है जुखाम और इस जुखाम के दौरान लोगों की नाक बहने लगती है। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि जुखाम के दौरान नाक क्यों बहती है ? तो चलिए आज हम आपको इसके पीछे छुपा वैज्ञानिक कारण बताएंगे।

दरअसल जब जुखाम के दौरान आपकी नाक बहती है तो यह एक इंफेक्शन होता है। इस इंफेक्शन के दौरान आपके नाक के कुछ हिस्सों में कीटाणु पैदा हो जाते हैं और इन कीटाणुओं से लड़ने के लिए नाक म्यूकस मेंब्रेन की मदद से म्यूकस का कॉन्बिनेशन बनाती है और इस वजह से नाक बहने लग जाती है।

एलर्जी के कारण भी बहती है नाक।

अधिकतर लोगों को धूल मिट्टी और ऊनी कपड़ों से एलर्जी होती है और इसके संपर्क में आते ही उनकी नाक बहने लगती है और उन्हें छीके आने लगती है। इस स्थिति को एलर्जी कहते हैं लेकिन इस स्थिति में ज्यादा मात्रा में म्यूकस प्रोड्यूस होता है।

ऐसा नहीं है कि सिर्फ जुखाम या एलर्जी के दौरान ही नाक बहती है। कुछ लोग जब रोते हैं तो भी उनकी नाक बहने लग जाती है। इसकी असली वजह यह है कि जब हम रोते हैं तो पलकों के आंतरिक हिस्से मैं स्थित डक्ट में से आसुं बहकर नाक की कैवेटीज़ में आ जाते है और बाहर निकलने लग जाते हैं।

तीखा खाने से भी नाक बहने लग जाती है। इसके पीछे का कारण है तीखे फ़ूड में कैपसेसीन नामक केमिकल होता है जो हमारी नाक की मेंबर इनको मजबूर करता है कि वह ज्यादा मात्रा में म्यूकस को बनाएं और फिर नाक बहने लग जाती है।

जब हम सांस अंदर की तरफ लेते हैं तो अंदर जाने वाली हवा नमी प्रदान करती है क्योंकि यह हमारे फेफड़ों तक जाती है। जब अधिक ठंड में सूखी हवा नाक में प्रवेश करती है तो अधिक मात्रा में नमी बनती है जिसके कारण नाक बहने लग जाती है।

यह बात ध्यान रहे कि नाक में हमेशा कुछ पानी की बूंदे हम मौजूद रहती है और जब बहुत ज्यादा तापमान गिरता है तो यह बने आपस में जुड़ कर बड़ी बूंदों का रुप ले लेती है। जब यह बूंदें भारी होने लग जाती है तो हमारी नाक बहने लगती है।

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