रावण में ये अच्छाइयां भी थी जिनसे हम प्रेरित हो सकते हैं

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रावण को हमेशा बुराई का ही प्रतीक माना जाता है क्योंकि रावण हमेशा से दुराचारी और अहंकारी रहा है बुराई के मार्ग पर चलने वाले रावण का अंत भगवान् राम के हाथों ही हुआ था और इस तरह भगवान राम ने सीता को रावण की कैद से छुड़ा कर रावण पर जीत हासिल की थी तो बुराई पर अच्छाई की जीत थी !

लेकिन इन सब के अलावा रावण बेहद बुद्धिमान और परम भक्त भी था, रावण में भी बुराइयों के अलावा कुछ ऐसी अच्छाइयां भी थी जिनसे हम प्रेरित हो सकते हैं ! आइये जानते हैं रावण में कौन कौन सी अच्छाइयां छुपी थी !

परम भक्त

रावण भक्ति में लीन रहने वाला व्यक्ति था रावण भगवान शिव का परम भक्त था और और रावण ने ही शिव तांडव स्तोत्रम की रचना की !

पांडित्य

रावण एक ब्राह्मण का पुत्र था रावण के पिता जिनका नाम विश्वश्रवा था वो एक ऋषि थे लेकिन रावण पूरी तरह से ब्राह्मण नहीं था क्योंकि रावण की मातामाता कैकसी असुरों के कुल से थी ! लेकिन रावण में पांडित्य भरपूर था और वो घोर तपस्वी भी रहा था, रावण ने अपनी कठोर तपस्या से ही ब्रह्मा जी से दैवीय शक्तियां हासिल की थी !

परम मित्र

रावण मित्रता निभाने में सदैव आगे रहता था, बाली द्वारा रावण को घसीट कर किशकिंधा लाने पर भी रावण ने बाली से मित्रता की पेशकश की और दोनों मित्र बने !

परम ज्ञानी

रावण बहुत ही ज्ञानी था वो वेदशास्त्र और ज्योतिषशास्त्र में काफी निपुण था ! रावण के पुत्र मेघनाद के जन्म के समय रावण ने सूर्य समेत सभी ग्रहों को अपने अपने स्थान पर ही रहने का आदेश दिया था जिससे उस लग्न के कारण उसका बेटा अमर रहे हालाँकि शनि ने अपना स्थान बदल लिया और ऐसा नहीं हो पाया और इससे गुस्साए रावण ने शनि पर अपनी गदा से वार भी किया !

नीति शास्त्र में निपुण

रावण एक बेहद चालाक राजनीतिज्ञ hone के साथ साथ नीति शास्त्र में भी कुशल था यहाँ तक की भगवान राम ने रावण के अंतिम समय में लक्ष्मण को रावण से नीतिशास्त्र और कूटनीति का ज्ञान लेने को भी कहा था !

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