Download App

जानिए मंदिर जाने से पहले क्यों खोले जाते हैं जूते

0

यह परंपरा सनातन धर्म में सदियों से चली आ रही है कि मंदिर जाने से पहले जूते उतारे जाते हैं। लेकिन शायद ही कोई व्यक्ति ऐसा हो जिस से इस बारे में पता हो कि जूते क्यों उतारे जाते हैं?? यह सभ्य समाज की कल्पना ही है कि मंदिर जाने से पहले या किसी भी कर्मकांड से पहले यह नियम बनाया गया है कि जूते उतारे जाएं।

लेकिन इसके बारे में ठोस तथ्य किसी के भी पास नहीं है तो आज हम आपको इससे जुड़े कुछ तथ्य बताने जा रहे हैं।

why-do-hindus-remove-their-footwear-before-entering-temples2

जूते और चप्पलों में तमाम प्रकार की धातुओं का इस्तेमाल किया जाता है। यह धातु नकारात्मक उर्जा मानी जाती है और वातावरण को प्रदूषित करती है। मंदिरों के चारों तरफ ईश्वरीय प्रभाव माना जाता है। जिसके फलस्वरूप यह माना जाता है कि इस प्रकार की धातु से जुडी चप्पल जूते इत्यादि मंदिर में पहनकर ना जाया जाए इससे नकारात्मक भाव बढ़ जाते हैं।

why-do-hindus-remove-their-footwear-before-entering-temples6

इसके अलावा एक कारण यह भी है कि मंदिर के प्रांगण में चारों तरफ गंदगी ना फैले इसीलिए जूते-चप्पलों को मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाता।

एक कारण यह भी है कि जब इंसान जूते चप्पल पहनता है तो उसका मानसिक स्तर एक विशेष प्रकार के एटिट्यूड में होता है। लेकिन हमारे समाज में इंसान को उसके जूतों से ही पहचानने का एक कायदा बना हुआ है।

why-do-hindus-remove-their-footwear-before-entering-temples5

मंदिर के अंदर अमीर और गरीब आदमी का फर्क मिटाने के लिए भी इस प्रथा को चलाया गया था ताकि जूते चप्पल उतार के हम अपने सहज भाव में मंदिर में ईश्वर की आराधना कर सकें और खुद को ईश्वर के प्रति समर्पित करें।

why-do-hindus-remove-their-footwear-before-entering-temples4

यह बात तो हम सब जानते हैं कि मंदिर के वातावरण में सात्विकता और शीतलता हमेशा बनी रहती है इसीलिए हम वहां पर नंगे पांव जाते हैं। जिससे हमें ठंडक का अहसास हो इससे हमारे तन और मन दोनों में शीतलता का एहसास प्रबल होता है। यह बात शास्त्रों में भी बताई गई है की मंदिरों में जूते चप्पल पहनकर ना जाया जाए और भारत का हर इंसान इसका अनुसरण करता है।

why-do-hindus-remove-their-footwear-before-entering-temples3

Source

Add a comment