योगी आदित्यनाथ के बारे में कुछ रोचक बातें

1444

योगी आदित्यनाथ का नाम आपने पिछले दिनों काफी न्यूज़ चैनलों में सुना होगा। जैसा की हम जानते हैं कि योगी आदित्यनाथ 19 मार्च 2017 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं. लेकिन आज हम आपको उनके जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी रोचक बातें बताने जा रहे हैं जो शायद आप नहीं जानते होंगे।

1. योगी आदित्यनाथ का असली नाम अजय सिंह बिष्ट है. इनका जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड में हुआ था. 1994 में ये सन्यासी बन गये जिसके बाद इनका नाम अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ हो गया.  ये गढ़वाल विश्वविद्यालय से गणित में B.Sc कर चुके हैं। इनके पिता का नाम आनंद सिंह बिष्ट है.

2. योगी सबसे कम उम्र के सांसद बनने वाले व्यक्ति हैं उन्होंने 1998 में महज 26 साल की उम्र में सांसद का पद संभाला था। आदित्यनाथ योगी गोरखपुर सीट से लगातार पांच बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। 1998 से लगातार 5 बार ये भारतीय जनता पार्टी की टिकट पर गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीत चुके हैं.

3. आदित्यनाथ को प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर के पूर्व महंत अवैद्यनाथ ने उत्तराधिकारी बनाया था. महंत अवैद्यनाथ के देहांत के बाद सितंबर 2014 में इन्होने गोरखनाथ पीठ का दायित्व संभाला था. आदित्यनाथ हिंदू युवा वाहिनी नाम के संगठन के संस्थापक है, जो हिंदू युवाओं का सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी रूप से उत्थान करता है।

4. योगी आदित्यनाथ वह व्यक्ति हैं जिन्होंने धर्म परिवर्तन के खिलाफ मुहिम छेड़ी थी. कट्टर हिंदुत्व के रास्ते पर चलने के कारण कई बार इनके बयान विवादित भी रहे.

5. योगी के खिलाफ कई आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए हैं. 2007 में गोरखपुर में हुए दंगे मैं योगी आदित्यनाथ मुख्य आरोपी थे।

6. योगी अपने क्षेत्र के इलाकों के नाम बदलने में माहिर है जैसे हिमायूं पूर्व को उन्होंने हनुमानपुरा इस्लामपुर को ईश्वरपुर किया हुआ है।

7. होली और दीपावली जैसे त्योहार कब मनाए जाए इसका भी एलान योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर से करते हैं. इसलिए गोरखपुर में ये त्योहार एक दिन बाद मनाए जाते हैं.

8. 7 सितंबर 2008 को आदित्यनाथ पर आज़मगढ़ में जानलेवा हमला हुआ था. इस हमले में वो बाल बाल बच गये थे. ये हमला इतना बड़ा था की आदित्यनाथ के समर्थकों की 100 से ज़्यादा गाड़ियों के काफिले को हमलावरों ने घेर लिया था.

9. योगी के कई बार भाजपा से संबंध तनावपूर्ण हो गये थे. 2007 के चुनावों में भी वो 100 से अधिक सीटों पर  अपनी पसंद के उम्मीदवार उतारना चाहते थे. बाद में राष्ट्रीय स्वयं सेवक के दखल के बाद समझौता हुआ.

Add a comment