कहाँ होता है लक्ष्मी का वास?

एक समय की बात है कि एक बहुत बड़े धनी सेठ ने एक रात्रि को स्वप्न देखा। जिसमे उसे साक्षात लक्ष्मी जी के दर्शन हुए। स्वप्न में लक्ष्मी जी ने कहा – ‘हे सेठ मैं तुम्हें यह बताने आई हूँ कि अब तुम्हारा पुण्य समाप्त होने वाला है और मैं शीघ्र ही वापस चली जाऊंगी। यदि तुम्हें कुछ चाहिए तो मेरे से कोई वर मांग लो।’

सेठ ने हाथ जोड़कर विनती कि लक्ष्मीजी से की वह अगले दिन अपने परिवार से राय लेगा, फिर जो मांगना होगा मांग लेगा। अगले दिन सेठ ने अपने पूरे परिवार को एकत्र किया और स्वप्न के बारे में सभी को बताया। बड़े पुत्र ने हीरे-मोती, बड़ा महल आदि मांगने को कहा। बीच वाले पुत्र ने सोना-चाँदी व अपार धन-संपदा मांगने को कहा और सबसे छोटे पुत्र ने कहा हमें अन्न का भंडार मांगना चाहिए।

इसी प्रकार सेठानी और उनकी पुत्रवधुओं ने भी कुछ न कुछ अपने हिसाब से मांगने को कहा। सबसे अंत में छोटी पुत्रवधू से भी पूछा गया तो उसने आदरपूर्वक अपने ससुरजी से कहा – ‘पिताजी जब लक्ष्मीजी ही चली जायेगी तो इन सब बेजान चीज़ों को लेकर हम क्या करेंगे?’ कृपया करके आप ही बताएँ कि ये सब वस्तुएँ किस प्रकार हमारे पास रहेंगी। इसलिए मेरी राय यह है कि आपको अगर कुछ मांगना ही है तो यह मांगिए कि हमारे परिवार में सदैव प्रेम और विश्वास बना रहे।

परिवार के सभी सदस्यों को छोटी बहू की बात बहुत अच्छी लगी। जब दूसरी रात्रि को स्वप्न में लक्ष्मीजी के पुनः दर्शन हुए तो सेठ ने विनम्रता से हाथ जोड़कर लक्ष्मीजी से कहा – ‘हे देवी आप मेरे घर में रहना चाहें तो बड़ी प्रसन्नता की बात है और यदि आप जाना चाहें तो वह भी आपकी मर्ज़ी की बात है। लेकिन मुझे केवल एक ही वरदान दीजिए कि हमारे घर में सब एक दूसरे का सम्मान करें, आपसी प्यार, प्रेम और विश्वास में हम सब सदा बंधे रहे।’

लक्ष्मीजी ने कहा – ‘हे सेठ, तुमने तो मुझे बांध ही लिया। जहां प्रेम और विश्वास होगा, वहाँ तो मुझे रहना ही होगा क्योकि मैंने यह प्रतिज्ञा ली थी जिस घर में बड़ों का सम्मान, मधुर व सभ्यवाणी होगी, कलह व कलेश ना होता होगा और जहां सब प्रेम-विश्वास के साथ रहते है, वहाँ मैं सदैव निवास करूंगी।’

यह प्रेरक प्रसंग आज भी हमें इस बात की प्रेरणा देता है कि हम प्रभु से चाहें कुछ भी मांगे या ना मांगे लेकिन पारिवारिक सुख-शांति, प्रेम हेतु निरंतर प्रार्थना करनी चाहिए और यह प्रेम-विश्वास सदा बना रहे उसके लिए सतत् प्रयत्नशील रहना चाहिए।

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“ईमानदारी सर्वोपरि है (कहानी)”
“जीवन एक संघर्ष है (कहानी)”

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