चाणक्य नीति के सबसे बड़े गुरु मन्त्र

चाणक्य एक ऐसा व्यक्तित्व है जो आज भी हम लोगों को प्रेरित करता है। चाणक्य की नीतियों का कोई मुकाबला नहीं था, इनके सामने बड़े बड़े धुरंधर भी अपना सिर झुकाते थे। चाणक्य से जीतना किसी के बस की बात नहीं थी। आइये आज हम चाणक्य नीतियों के बारे में ही ऐसी प्रेरणात्मक बातें बताते हैं जिन्हें अगर हम अपनी जिंदगी में अपना लें तो हमारा जीवन भी काफी सकारात्मक बन सकता है।

* कोई व्यक्ति अपने कार्यों से महान होता है अपने जन्म से नहीं।

* दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति नौजवानी और औरत की सुंदरता है।

* सबसे बड़ा गुरु मन्त्र है : कभी भी अपने राज दूसरों को ना बताएं, ये आपको बर्बाद कर देगा।

* व्यक्ति अकेले पैदा होता है और अकेले मर जाता है और वो अपने अच्छे और बुरे कर्मों का फल खुद ही भुगतता है और वह अकेले ही नर्क या स्वर्ग जाता है।

* हमे भूत के बारे में पछतावा नहीं करना चाहिए, ना ही भविष्य के बारे में चिंतित होना चाहिए; विवेकवान व्यक्ति हमेशा वर्तमान में जीते हैं।

* सेवक को तब परखें जब वह काम ना कर रहा हो, रिश्तेदार को किसी कठिनाई में, मित्र को संकट में और पत्नी को घोर विपत्ति में। इसलिए खुश रहने के लिए लगाव छोड़ देना चाहिए।

* अपमानित होकर जीने से अच्छा मरना है। मृत्यु तो बस एक क्षण का दुःख देती है लेकिन अपमान हर दिन जीवन में दुःख लाता है।

* वह जो अपने परिवार से अत्यधिक जुड़ा हुआ है उसे भय और चिंता का सामना करना पड़ता है क्योंकि सभी दुखों की जड़ लगाव है।

* संतुलित दिमाग जैसी कोई सादगी नहीं है, संतोष जैसा कोई सुख नहीं है, लोभ जैसी कोई बीमारी नहीं है, दया जैसा कोई पुण्य नहीं है।

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