सोलह बरस की उम्र को क्यों कहते हैं बाली उमर

आप सभी ने सुना होगा की सोलह बरस की उम्र होने पर लोग कहते हैं कि अरे यह तो बाली उमर का हो गया या हो गई है। यह जिंदगी का वो चरण होता है जहां से आपके अंदर बदलाव आने लगते हैं। यह बदलाव शारीरिक और मानसिक तौर पर आते हैं। इसी अवस्था से आप वयस्क होने की ओर अग्रसर होते हैं। इस चरण में आपको कई तरह के अलग अहसासों को महसूस करने का अवसर मिलता है। इस उम्र में बच्चों को लगता है कि वो बड़े हो गए हैं और सबकुछ खुद कर सकते हैं।

लेकिन यही उम्र कच्ची होती है। जिसमें आपको जिस तरह का आकार दिया जाता है आप ताउम्र के लिए वैसे ही बन जाते हैं। यही वजह है कि लोग कहते हैं अभी बाली उम्र है कहीं गलत रास्ते पर ना चला/चली जाए। आज हम आपको बताते हैं सोलह बरस से जुड़ी वो वजहें जिसकी वजह से इसे बाली उमर कहा जाता है।

1. सब नया – इस अवस्था मे बच्चे एक अलग दौर से गुजरते हैं जिसमें उनको अपने आस-पास की हर चीज अलग लगती है। उन्हें सब कुछ नया लगता है। उन्हें ऐसा महसूस होता है जैसे दुनिया का कोई भी काम वो आसानी से कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस उम्र में इंसान के अंदर सबसे ज्यादा ऊर्जा होती है इसी वजह से दुनिया को देखने का नजरिया बिलकुल बदल जाता है।

2. बनने संवरने की उम्र – सोलह बरस की उम्र में ज्यादातर बच्चे या तो दसवीं में होते हैं या फिर ग्यारहवी में। इसी वजह से उन पर पढ़ाई का बोझ बढ़ जाता है। घर, स्कूल हर जगह उन्हें आने वाले भविष्य के लिए ठीक तरह से पढ़ाई में मन लगाने की सलाह दी जाती है जिसकी वजह से उन पर निश्चित तौर से दबाव बढ़ जाता है। उन्हें रोजाना समझाया जाता है कि उनके लिए क्या अच्छा और बुरा है। ऐसे में कुछ बच्चे सफल हो जाते हैं तो कुछ असफल। इसी वजह से माना जाता है कि यही उम्र उनके आने वाले भविष्य की नींव रखती है।

3. गलतियों की अनदेखी – इस उम्र में अक्सर बच्चों से गलतियां हो जाती है। जिसे कि माता-पिता बाली उमर होने की वजह से माफ कर देते हैं। लेकिन यह नही भूलना चाहिए कि महाभारत में इसी उम्र में अभिमन्यु ने चक्रव्यूह को भेद दिया था जिसे भेदने में बड़े से बड़े शूरवीर डर रहे थे। इसलिए इस उम्र में बच्चों को अच्छे काम करने के लिए प्रेरित करना चाहिए ताकि वो बड़े होकर एक अच्छे इंसान बन सकें।

4. प्यार का अहसास – यह वही उम्र होती है जब ज्यादातर बच्चों को अपने पहले प्यार का एहसास होता है। इस उम्र में अपोजिट सेक्स के प्रति आकर्षण होना आम बात होती है। इस उम्र में उनके द्वारा बनाए गए रिश्ते उनके मानसिक विकास में अहम भूमिका निभाते हैं क्योंकि इससे मिलने वाले अच्छे-बुरे सबक को वे जिंदगी में कभी नहीं भूलते हैं।

5. भावनात्मक विकास – इस उम्र में बच्चों के अंदर अलग-अलग भावनाओं का विकास होता है। कई बार वो अपने माता-पिता को जब अपनी भावनाओं से अवगत करवाते हैं तो वे उन्हें डांटकर चुप करवा देते हैं जिसकी वजह से वो उनसे बातें छुपाने लगते हैं। इसलिए अपने बच्चे की बातों को ध्यान से सुनें ताकि आप उसे गलत रास्ते पर जाने से रोक सकें।

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