50/20/30 नियम क्या है?

नवम्बर 30, 2018

आये दिन होने वाले ऐसे खर्चों से सभी परेशान रहते हैं जो महीने के बजट को हिला देते हैं। ऐसे में बचत से जुड़े कई नियम समय-समय पर बनाये गए हैं जिनमें से एक 50/20/30 नियम है। ऐसे में आपको भी इस नियम से जुड़ी फायदेमंद जानकारी जरूर लेनी चाहिए। तो चलिए, आज इस नियम से बचत के गुर सीखते हैं।

सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने अपनी पुस्तक – “ऑल ऑर वर्थ : द अल्टीमेट लाइफटाइम मनी प्लान” में 50/20/30 नियम के बारे में बात की और इसे फेमस भी बना दिया। इस नियम के अनुसार अपनी टैक्स आय को इस तरह से विभाजित करे, जरूरतों पर 50% खर्च करना, 20% बचत पर और 30% व्यक्तिगत चाहतों पर।

जरुरत श्रेणी (50%) – इस श्रेणी के अंदर ऐसे बिल आते हैं जिनका भुगतान जरूर किया जाना चाहिए। इनमें किराया भुगतान, कार भुगतान, किराने का सामान, बीमा, स्वास्थ्य देखभाल, न्यूनतम ऋण भुगतान और उपयोगिताएं शामिल हैं। इस श्रेणी में ऐसी चीज़ें शामिल नहीं होंगी जो एक्स्ट्रा होती हैं, जैसे बाहर खाना खाने जाना या एंटरटेनमेंट के लिए किया जाने वाला एक्सट्रा खर्चा।

बचत (20%) – बचत और इन्वेस्टमेंट के लिए अपनी आय का 20% हिस्सा आवंटित होना चाहिए। इस श्रेणी के अंदर बचत खाते में एक इमरजेन्सी फण्ड में पैसा जमा करना शामिल है और म्यूचुअल फण्ड खाते में आईआरए योगदान और शेयर बाजार में निवेश करना शामिल है।

व्यक्तिगत श्रेणी (30%) – इस श्रेणी में वो खर्चे आते हैं जो जरुरत के नहीं हैं लेकिन आप खुद पर खर्च करना चाहते हैं। इसमें डिनर और फिल्मों को शामिल किया गया है। घूमना-फिरना, खेल देखने के लिए टिकट खरीदना, छुट्टियों पर जाना, नए इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स खरीदना और हाई स्पीड इंटरनेट का इस्तेमाल करना इस श्रेणी में आता है। इस श्रेणी में उन फैसलों को भी शामिल किया गया है जिनमें किफायती गाड़ी की जगह महँगी गाड़ी खरीदना और किफायती कामों की बजाये महंगे विकल्पों को चुना जाता हो यानी ऐसे सभी छोटे एक्स्ट्रा खर्चे, जिन पर पैसा खर्च करके जीवन को ज्यादा मनोरंजक बनाया जाता है।

दोस्तों, बजट के इस नियम को आप भी आज़माकर जरूर देखिएगा।

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