एक ऐसी बैटरी जिसे हज़ारों सालों के बाद भी चार्ज कर सकते है

आज के इस दौर में गैजेट का इस्तेमाल एक आम बात हो गयी है। लेकिन सबसे ज़्यादा ध्यान देने योग्य बात यह है की जब भी हम स्मार्टफोन खरीदने जाते है तो हमारा कीमत के अलावा जो सबसे महतवपूर्ण सवाल होता है वो यह है की इस उपकरण की बैटरी कितनी देर चलती है।

आम तोर पर आजकल कोई भी लैपटॉप या स्मार्टफोन हो किसी की भी बैटरीज को 2 या 3 वर्ष में बदलना ही पड़ता है। इसी वजह से लोग ऐसी बैटरी की खोज में रहते है जो कई वर्षों, या लम्बे वक़्त तक चले। मगर आज हम आपके लिए एक खुश खबरी लाये है क्योँकि वैज्ञानिकों ने इसका हल खोज लिया है।

कैलिफोर्निया इर्विन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अकस्मात् ही एक ऐसी बैटरी बना दी है , जिसे हज़ारो वर्ष के बाद भी चार्ज किया जा सकता है।

आसान शब्दों में बोल जाये तो, यह ऐसी बैटरी है जिसे कई सालों इस्तेमाल किया जा सकता है, और इसे बदलने की भी ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

वैज्ञानिकों ने इस बैटरी को बनाने में नैनोवायर्स का उपयोग किया है। चलिए आपको बताते है की क्या होता है नैनोवायर्स?

एक बात बताते चलें की नैनोवायर्स के इस्तेमाल के साथ एक बहुत बड़ी दिक्कत है वो यह है की लम्बे टाइम तक इस्तेमाल होने के बाद यह कमज़ोर होकर टूट जाती है। इस बाधा को दूर करने के लिए शोधकर्ताओं ने मैंगनीज डाइऑक्साइड की परत वाली नैनोवायर्स को प्लेक्सिग्लास नामक एक तरल पदार्थ में मिलाकर तैयार किया है।

यह परत और यह ख़ास तरह का तरल पदार्थ, इन नैनोवायर्स को क्षीण होने से बचता है। अभी यह नहीं कहा जा सकता है की यह बैटरी बाजार में कब आएगी।

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