इनकम टैक्स ऐसा महत्वपूर्ण कर होता है जो सरकार द्वारा वसूला जाता है। ऐसे में इनकम टैक्स यानी आयकर से जुड़ी खास जानकारी आपको भी जरूर लेनी चाहिए इसलिए आज बात करते हैं आयकर रिटर्न के बारे में।

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जनता की आमदनी पर केंद्र सरकार कर वसूल करती है और इस कर से होने वाली कमाई का इस्तेमाल सरकार द्वारा जनता को सुविधाएँ और सेवाएं देने के लिए किया जाता है। हर साल एक बार आईटीआर फॉर्म भरना जरुरी होता है जिसमें सरकार को अपनी आमदनी, खर्च, इन्वेस्टमेंट और टैक्स देनदारी से जुड़ी जानकारी देनी होती है। इसे ही आयकर रिटर्न या इनकम टैक्स रिटर्न कहा जाता है।

इस आयकर रिटर्न को आपकी आमदनी और खर्च के लिखित हिसाब-किताब की तरह समझा जा सकता है क्योंकि इसमें आप केंद्र सरकार को विस्तार से ये जानकारी देते हैं कि उस वित्त वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च तक का समय) में आपने अपनी नौकरी या बिजनेस से कितनी कमाई की है। इसके अलावा आपको सरकार द्वारा तय किये गए टैक्स बचत के विकल्प में निवेश करने, जरुरी चीज़ों पर खर्च करने (री इम्बर्स्मेंट या बिल जमा करने पर टैक्स छूट के बारे में) और एडवांस टैक्स चुकाने की जानकारी भी देनी होती है।

कानून के मुताबिक, आयकर रिटर्न हर व्यक्ति को भरना चाहिए क्योंकि आयकर रिटर्न भरने का मतलब सरकार को टैक्स चुकाना नहीं होता है। वित्त वर्ष की समाप्ति पर इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करके सरकार या इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को ये जानकारी भी दी जा सकती है कि आप इनकम टैक्स के दायरे में नहीं आते हैं।

इसका अर्थ ये होगा कि आप सरकार को टैक्स नहीं चुकाते हैं क्योंकि आपकी कर योग्य आमदनी सालाना 2.5 लाख रुपये से कम है लेकिन आप अपनी आमदनी और खर्च की जानकारी सरकार को जरूर देते हैं। ऐसा करने से आपको कई फायदे भी होते हैं जैसे लोन लेते समय या ऐसी किसी जरुरत के समय आयकर रिटर्न आपकी आमदनी का सबसे भरोसेमंद सोर्स माना जाता है।

आयकर रिटर्न भरने के कई तरीके होते हैं जिसमें ई-फाइलिंग से लेकर फिजिकल फॉर्म तक के विकल्प होते हैं। ऐसे में आप अपना आयकर रिटर्न खुद भी भर सकते हैं और किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट, टैक्स रिटर्न मददगार (TRP) या इनकम टैक्स प्रैक्टिशनर की मदद से भी भर सकते हैं।

दोस्तों, उम्मीद है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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