एयर कंडीशनर में कौन सी गैस भरी जाती है?

आज एयर कंडीशनर का इस्तेमाल करना एक सामान्य सी बात हो गयी है इसलिए घर और ऑफिस जैसी जगहों पर एसी आसानी से दिखाई दे जाता है और वहां के वातावरण को ठंडा और अनुकूल बना देता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपको राहत देने वाला ये एयर कंडीशनर किन गैसों की मदद से कमरे में ठंडक बनाये रख पाता है। ऐसे में आज आपको बताते हैं एयर कंडीशनर में कौन सी गैस भरी जाती है।

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एसी और रेफ्रिजरेटर के काम करने का तरीका एक जैसा ही होता है और इसमें फर्क सिर्फ इतना होता है कि रेफ्रिजरेटर एक छोटे इंसुलेटेड एरिया को ठंडा रखता है जबकि एसी पूरे कमरे के टेम्परेचर को मेंटेन रखता है।

एसी और रेफ्रिजरेटर में इस्तेमाल होने वाली गैसों को रेफ्रिजरेंट्स कहा जाता है। ये ऐसे तरल पदार्थ होते हैं जो फ्रिज और कमरे की गर्मी को बाहर के वातावरण में फेंकते हैं। ये रेफ्रिजरेंट्स फेज परिवर्तन के सिद्धांत पर कार्य करते हैं यानि पहले ये लिक्विड फेज में रहते हैं और गर्मी को अवशोषित करने के बाद गैस में परिवर्तित हो जाते हैं। जब कम्प्रेसर द्वारा इन्हें कम्प्रेस किया जाता है तो ये रेफ्रिजरेंट्स वापिस गैस फेज से लिक्विड फेज में आ जाते हैं।

पहले सीएफसी (क्लोरोफ्लोरो कार्बन) रेफ्रिजरेंट्स का इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जाता था जिन्हें फ्रीऑन भी कहा जाता था। आगे चलकर सीएफसी को एचसीएफसी (हाइड्रो – क्लोरोफ्लोरो कार्बन) के साथ परिवर्तित कर दिया गया और R-22 सबसे आम एचसीएफसी होता है।

HCFC भले ही CFC से बेहतर रेफ्रिजरेंट्स होते हैं लेकिन इनमें मौजूद क्लोरीन वातावरण को नुकसान पहुँचाती है इसलिए HFC (हाइड्रो फ्लोरो कार्बन) रेफ्रिजरेंट्स इजात किये गए जो HCFC से बेहतर साबित हुए हैं और सबसे आम HFC है – R 401-A

इस HFC की वर्क एफिशियंसी भी ज्यादा है और वातावरण पर भी इसका प्रभाव पहले से कहीं बेहतर पड़ता है। इनके अलावा R-290 रेफ्रिजरेंट का इस्तेमाल भी किया जाता है जो एक हाइड्रोकार्बन ‘प्रोपेन’ पर आधारित है। इसकी ऊर्जा दक्षता ज्यादा होती है लेकिन ज्वलनशील होने के कारण इसका इस्तेमाल बहुत ही सुरक्षित माहौल में ही किया जा सकता है। इस रेफ्रिजरेंट से युक्त एसी की कीमत सामान्य एसी की तुलना में ज्यादा होती है।

दोस्तों, उम्मीद है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और एनवायरमेन्ट फ्रेंडली एसी खरीदने में आपकी मदद भी कर पायेगी।

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