गैस और एसिडिटी को दूर करने के लिए योग

आपने सुना होगा कि बीमार पेट बहुत-सी बीमारियों की जड़ होता है यानी पेट स्वस्थ नहीं रहने की स्थिति में बहुत से रोग होने का खतरा बढ़ जाता है और आजकल खानपान की अनहेल्दी आदतों ने गैस और एसिडिटी जैसी बड़ी समस्याओं को भी आम बना दिया है।

भले ही आज गैस और एसिडिटी को सामान्य समझा जाने लगा है लेकिन सेहत के लिए ये आज भी बहुत नुकसानदायक ही साबित होती है। ऐसे में ये जरुरी है कि इसे जल्द से जल्द दूर किया जाये और अगर इसके उपचार के तरीके प्राकृतिक हो तो कहना ही क्या! यानी योग के ज़रिये भी इस समस्या का हल ढूंढा जा सकता है। तो चलिए, आज जानते हैं ऐसे कुछ विशेष आसन जिन्हें करने से गैस और एसिडिटी से निजात पायी जा सकती है –

वज्रासन – रोज़ाना खाना खाने के बाद अगर 10 मिनट के लिए वज्रासन में बैठें तो पाचन की क्रिया बेहतर तरीके से होने लगती है और भोजन को पचाना काफी सरल हो जाता है।

  • इस आसान को करने के लिए अपने दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर पीछे ले जाएँ।
  • अपने हाथों को घुटनों पर रखें।
  • कमर को सीधा रखते हुए कुछ समय इसी पोश्चर में बैठें।
  • शुरुआत में इस आसान को 1-2 मिनट के लिए ही करें और जोड़ों या एड़ी के दर्द से ग्रस्त होने की स्थिति में इस आसान को ना करें।

पवनमुक्तासन – पेट में जलन, भोजन का नहीं पचना और गैस, एसिडिटी जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए पवनमुक्तासन एक बेहतरीन आसन है। ये आसन पेट में मौजूद खराब गैस को बाहर निकाल देता है और पाचन शक्ति को भी बढ़ाता है।

  • इस आसन को करने के लिए मैट पर पीठ के बल लेट जाएँ।
  • अब अपने दोनों पैरों को मोड़कर अपने पेट के नजदीक ले आएं।
  • दोनों पैरों को दोनों हाथों से कसकर पकड़ें रहें।
  • अपने सिर को घुटनों के लगाने का प्रयास करें।
  • थोड़ी देर इसी स्थिति में रहने के बाद धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आएं।
  • 1-2 मिनट का गैप लेकर इस आसन को दोहराएं।

धनुरासन – धनुरासन पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाला आसन है जो पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाता है, भूख को बढ़ाता है और गैस और एसिडिटी को दूर करता है।

  • इस आसन को करने के लिए मैट पर पेट के बल लेट जाएँ।
  • अब अपने दोनों पैरों को बारी बारी से अपनी कमर की तरफ मोड़ें।
  • अब अपने हाथों से दोनों पैरों के अंगूठों को पकड़ें।
  • इस पोजीशन में आने के बाद अपने शरीर को धनुष की तरह तानने का प्रयास करें।
  • अपने सिर को पीछे की ओर ले जाएँ।
  • कुछ देर इसी अवस्था में बने रहने के बाद सामान्य स्थिति में आ जाएँ।

मत्स्यासन – पेट की मांसपेशियों को स्वस्थ और मजबूत बनाने के साथ पाचन को बेहतर बनाने और गैस-एसिडिटी को दूर करने के लिए ये एक अच्छा आसन है जिसे करने से कमर दर्द में भी आराम मिलता है।

  • इस आसन को करने के लिए पद्मासन में बैठें।
  • अब अपने दोनों हाथों से पैरों के अंगूठों को पकड़ें।
  • अब धीरे-धीरे अपने शरीर के ऊपरी हिस्से को पीछे की ओर झुकाएं।
  • क्षमता अनुसार शरीर को पीछे झुकाएं और सिर को भी पीछे की ओर झुका लें।
  • कुछ क्षणों तक इसी अवस्था में रहने के बाद सामान्य स्थिति में आ जाएँ।
  • इन आसनों के अलावा पश्चिमोत्तासन, सेतुबंध आसन, मकरासन, शलभासन और सर्वांगासन करने से भी पेट से जुड़ी इन समस्याओं में काफी राहत मिलती है।
  • इसके अलावा प्राणायाम के कुछ प्रकार भी गैस और एसिडिटी से निजात दिलाने में मददगार साबित होते हैं, जैसे –

कपालभांति प्राणायाम – इस प्राणायाम से पेट के सभी रोग दूर होते हैं, पेट की चर्बी भी कम होने लगती है और मानसिक शांति भी मिलती है।

  • इसे करने के लिए सुखासन या सिद्धासन में बैठ जाएँ।
  • अपनी कमर को सीधा रखें और दोनों हाथों को घुटनों पर रखें।
  • नज़र को सामने की ओर रखें या आँखें बंद कर लें।
  • अब गहरी सांस लेते हुए नाभि को अंदर की तरफ ले जाएँ।
  • इसके बाद तेज़ी से सांस बाहर निकालते हुए नाभि को बाहर की तरफ लाएं।
  • शरीर को सीधा रखते हुए, सामान्य स्थिति में रहते हुए, इसे 3 चक्रों में किया जा सकता है।

भस्त्रिका प्राणायाम – इस प्राणायाम से शरीर में शुद्ध ऑक्सीजन पहुँचती हैं, पेट की चर्बी कम होती है, गैस और एसिडिटी जैसी पेट सम्बन्धी समस्याएं दूर होती हैं और मानसिक शांति मिलती है।

  • इस प्राणायाम को करने के लिए किसी भी आरामदायक आसन में बैठकर आँखों को बंद करें।
  • अब नाक के दोनों तरफ से तेज़ और गहरी साँस अंदर लें।
  • इसी गति से साँस को बाहर निकालें।
  • तेज़ी से गहरी सांस लें और तेज़ी से गहरी सांस छोड़ें।
  • शुरुआत में थोड़ी देर ही इसका अभ्यास करें, धीरे-धीरे गति और समय बढ़ाएं।

दोस्तों, पेट से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में योग आपकी बहुत मदद कर सकता है इसलिए अपने शरीर की सामर्थ्य के अनुसार इन आसनों को करना शुरू कर दीजिये। इस बात का ध्यान रखें कि शुरुआत में शरीर में खिंचाव ना आने दें , धीरे-धीरे ही अभ्यास को बढ़ाएं और किसी तरह की तकलीफ रहने की स्थिति में सम्बंधित आसन को ना करें।

योग का क्षेत्र बहुत विस्तृत है, इसमें आपको अपनी क्षमता के अनुसार करने योग्य आसन जरूर मिल जाएंगे। इनका लाभ उठायें और गैस और एसिडिटी को अलविदा कह दें।

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