ऐसा क्या करे की परीक्षा का तनाव कम हो जाए

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आज की दुनिया में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जहाँ गला-काट प्रतियोगिता का माहौल ना हो. इस माहौल में बच्चों से लेकर बड़े तक सभी पिस रहे है. तो ऐसे में तनाव ना ले यह कहना, मानों ऐसा लगता है जैसे मजाक कर रहे है. परीक्षा का तनाव एक स्वाभाविक प्रक्रिया है. किसी भी तरह के दबाव को जरूरत से ज्यादा लेना ही तनाव है. ठीक इसी तरह परीक्षा का दबाव भी बच्चों को तनाव दे रहा है. आपका बच्चा चाहे पढ़ने में कितना भी होशियार हो या ना हो, लेकिन थोड़े बहुत तनाव से तो ग्रस्त होगा ही. थोड़ा बहुत तनाव तो बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करता है लेकिन इसकी अधिकता विपरीत परिणाम भी दे सकती है.

परीक्षा अगर सर पर मंडरा रही हो तो बच्चों का तनाव की स्थिति में आना लाजमी है. यह तनाव का सिलसिला परीक्षा देने तक ही सीमित नहीं रहता बल्कि परिणाम आने तक बना रहता है. इस समस्या से सिर्फ बच्चे ही नहीं बल्कि पेरेंट्स भी जूझते है. बच्चे अगर परीक्षा का तनाव ले रहे है तो यह उनकी तैयारी पर बहुत भारी पड़ सकता है. दरअसल, विशेषज्ञ और कई अध्ययनों में इस तर्क को साबित भी किया गया है कि हाई स्ट्रेस से व्यक्त‍ि की यादाश्त कमजोर हो जाती है जिसका असर सोचने-समझने व फैसले लेने की क्षमता पर पड़ता है. आइये जानें परीक्षा के समय तनाव क्यों होता है, इसके क्या लक्षण है और इससे कैसे बचा जाए.

तनाव के कुछ शारीरिक और मनोवैज्ञानिक लक्षण –

पढ़ाई का बहुत प्रेशर होने के कारण बच्चों में कुछ इस तरह के लक्षण नजर आते है जैसे – लगातार सर में दर्द, बदन दर्द, बेचैनी, कुछ याद ना रहना, पढ़ने में मन ना लगना, जिद्दी या चिड़चिड़ा होना, निराशा, आक्रोश, ईर्ष्या, अकेले रहना या बात ना करना, खाना ना खाना, सोने-उठने की आदत में लापरवाही, टीवी और सोने में अधिक समय देना, घहबराहट के कारण ठीक से लिख ना पाना जैसे कई लक्षण दिखने लगते है.

तनाव के कारण –

* इतनी मेहनत के बाद भी नंबर कम आ गये तो.
* मेरा प्रतियोगी मुझसे आगे निकल गया तो पेरेंट्स क्या कहेंगे.
* समय ही कितना कम बचा है परीक्षा में.
* स्कूल की पढ़ाई समझ में ही नहीं आई, इसलिए आत्मविश्वास भी कम हो रहा है.
* परीक्षा के दौरान पढ़ा हुआ सब भूल गया तो.
* पता नहीं कैसा पेपर आएगा.
* याद करते ही सब भूल जाता हूँ, अब क्या करू.
* पेरेंट्स की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया तो.
* मेहनत तो पूरी की है, याद भी है, लेकिन पता नहीं परीक्षा में बेस्ट क्यों नहीं कर पाता.
* कक्षा में सर्वोच्च स्थान नहीं प्राप्त कर पाया तो लोग क्या कहेंगे.

ना जानें ऐसे और कितने कारण होते है बच्चों के पास, जिनसे उनका स्ट्रेस बढ़ता है. कारण चाहे जो भी हो अगर हम चाहे तो हर कारण का निवारण कर सकते है. अगर समस्या है तो समाधान भी है. सबसे पहले अपने तनाव के कारण को खोजे फिर थोड़ा सोचे, आप महसूस करेंगे की आप समाधान तक पहुँच चुके है. आइये ऐसे ही कुछ समाधान पर नजर डाले जिससे आपकी कुछ मदद हो सके.

कैसे करे परीक्षा के तनाव को दूर –

* एग्जाम फोबिया को खुद पर हावी ना होने दें. पूरे साल कुछ ना कुछ पढ़ते रहने से परीक्षा की टेंशन से मुक्ति मिलती है. अगर आप शुरू से ही टाइम टेबल बना के पढ़ाई करते है तो परीक्षा के समय पढ़ाई आपको चट्टान की तरह नहीं लगेगी. पहले से की हुई तैयारी परीक्षा के तनाव को बहुत कम कर देती हैं.

* शारीरिक और मानसिक तनाव को दूर करने के लिए योगा, व्यायाम और ध्यान को अपनाए. इससे रिलैक्स स्टडी होगी और तनाव भी दूर होगा.

* परीक्षा के समय मन में डर को नहीं, मेहनत को जगह दे. एक अच्छी रूटीन के साथ नियमित पढ़ाई करे. पढ़ते वक्त रटने के बजाय पॉइंट्स और कांसेप्ट को अच्छे से क्लियर करें और हर चेप्टर के मुख्य पॉइंट्स को नोट जरुर करते रहे, इससे रिविजन में आसानी रहेगी. पहले से तैयारी अच्छी होगी तो परीक्षा के समय टू द पॉइंट पढ़ने से भी अच्छा परिणाम आ जाता है.

* परीक्षा के शेड्यूल के अनुसार पढ़ाई करे. कब कितना और क्या पढ़ना है उसकी सूची तैयार करे और हर हाल में इस सूची के अनुरूप अपनी दिनचर्या का पालन करे. अगर आपने अपने समय का बेहतर सदुपयोग किया है तो आपको परीक्षा में सहूलियत होगी और तनाव भी नहीं होगा. समय प्रबंधक के रूप में काम करना आपको हर क्षेत्र में आगे रखेगा.

* परीक्षा के कुछ दिन पहले और परीक्षा के दौरान बच्चे अधिक पढ़ाई करते है. जिस कारण नींद पूरी नहीं होती. इसलिए इन दिनों में अपने खाने-पीने का पूरा ध्यान रखे. हल्का भोजन ले. लेकिन कुछ-कुछ अंतराल में लेते रहे. इससे आपकी ऊर्जा में कमी नहीं आएगी और स्ट्रेस हार्मोन्स को भी बढ़ावा नहीं मिलेगा. लेकिन हम यही सलाह देंगे की 6-7 घंटे की नींद ज़रूर ले. रिसर्च के अनुसार नींद पूरी लेने से दिमाग तेज होता है.

* सुबह के वक्त पढ़ाई करने से याद ज्यादा रहता है. क्योंकि सुबह शांत और सकारात्मक माहौल होता है जो पढ़ाई के लिए अनुकूल माना जाता है. लगातार सिटिंग ना करे. बीच-बीच में ब्रेक ले. बॉडी को स्ट्रेच करे, कुछ देर के लिए बाहर टहल के आए, मनोरंजन करे, पसंदीदा गाने सुने, दोस्तों से कुछ देर बात कर ले, कुछ काॅमेडी प्रोग्राम देख लें, इससे आपका दिमाग रिलेक्स होगा और पढ़ाई में तीव्रता आयेगी. तनाव तो जैसे आप भूल ही जाएंगे.

* परीक्षा के दौरान अगर किसी विषय में परेशानी आती है तो किसी एक्सपर्ट की सलाह ले. वह एक्सपर्ट आपका बड़ा भाई, शिक्षक, माता-पिता या आपका कोई दोस्त जिसकी पकड़ इस विषय में अच्छी हो. अगर कोई विषय आपका पहले से कमजोर है तो उसके लिए ट्यूशन की हेल्प ले और उस विषय पर अधिक समय दे. परीक्षा से पहले अगर आपकी तैयारी अच्छी होगी तो तनाव भी कम होगा.

* परिणाम की चिंता परीक्षा के समय ना करे. अभी तो आप यह देखिए की आपका कोर्स पूरा हुआ या नहीं. आपके पास सभी मुख्य पॉइंट है या नहीं और हाँ परीक्षा के समय पढ़ते वक्त खुद को क्रोस्चेक या किसी से तुलना कभी ना करे, इससे आपको नर्वसनेस, मानसिक दबाव और तनाव का सामना करना पड़ सकता है. लिखकर कुछ याद करना अच्छा विकल्प है. जो याद करें, उसे तुरंत लिखें. सोने से पहले पढ़े कोर्स का एक बार रिवीजन जरूर करें.

* अपनी सोच को आशावादी और सकारात्मक रखे. इससे नयी स्फूर्ति पैदा होती है. परीक्षा के पहले अच्छे रिजल्ट के बारे में सोचे और एन्जॉय करे. यह सोचे की आप क्लास में प्रथम आए हो. यह कल्पना करे की आपको मनपसंद कॉलेज में दाखिला मिल गया. यह हमेशा याद रखे आप जैसा सोचोगे आपके साथ वैसा ही होगा. पॉज़िटिव थिंकिंग से आशा का संचार होता है जिससे तनाव को काबू करने में मदद मिलती है.

* परीक्षा के समय अगर आपको अधिक तनाव हो रहा है तो अपनी मिडल फिंगर के टिप को दबाएं और कुछ देर तक गहरी सांस ले व छोड़े. इससे आपका तनाव कम होगा. पढ़ते वक्त फोन से दूरी रखे. बार-बार के कॉल और मेसेज आपका समय भी खराब करेंगे और आपको तनाव भी देंगे. परीक्षा का मतलब ही होता है मन और इन्द्रियों पर नियन्त्रण रखना.

* आजकल बच्चों में ग्रुप स्टडी का बहुत चाव है. लेकिन ग्रुप स्टडी के नाम पर अगर आप मौज-मस्ती करते हो और परीक्षा की तैयारी ठीक से नहीं कर पाते हो तो आपके साथ आपके माता-पिता भी तनावग्रस्त हो जाएँगे. अगर आपका ग्रुप आपकी तरह केरियर पर फोकस रखता है तभी इस विकल्प का चुनाव करे.

* तनाव कम करने के लिए मादक पदार्थ और दवा का सहारा ना लें. यह आपका मानसिक और शारीरिक संतुलन बिगाड़ देती है. यह सिर्फ एक भ्रम मात्र है की इससे तनाव कम होता है. अगर ऐसा होता तो आज इस टॉपिक पर आर्टिकल लिखने की जरूरत ही नहीं होती. अगर इन चीजों से तनाव कम होता तो दुनिया में तनाव के कोई रोगी नहीं होते.

परीक्षा के समय मेहनत तो करनी पड़ती है लेकिन इसका मतलब यह नहीं आप तनाव लो. अधिक सोचने से आपका मोरल वीक होगा. अधिकांश बच्चे परीक्षा के समय में अपने पढ़ने के समय को इतना बढ़ा देते है की पूरा दिन किताब से ही चिपके रहते है. यह मानसिकता बच्चों में अधिक तनाव पैदा करती है जो किसी भी बच्चे के लिए सही नहीं हैं.

बच्चों की परीक्षा के वक्त अभिभावक क्या करे –

बच्चों पर भावनात्मक या मानसिक दबाव ना बनाए. उन्हें पढाई के लिए प्रोत्साहित जरूर करें. अपने अनुभव के आधार पर इजी ट्रिक्स बताए, जिससे उनकी मदद हो सके. बच्चों की क्षमता के अनुरूप ही अपेक्षाए रखे. अपनी अधूरी इच्छाओं को थोपने की कोशिश ना करे, जिससे बच्चे झेल ना पाए. बच्चों को घर में पढ़ाई का अच्छा और शांत माहौल दे. जहाँ मेहमानों की आवाजाही ना हो. ध्यान भंग करने वाली सभी चीजों से दूर रखे. परीक्षा के वक्त बच्चों से बात करे, उनकी समस्या का हल निकाले. इससे बच्चों को मोरल सपोर्ट मिलेगा. बच्चों के कोर्स को टुकड़ों में बांटकर तैयारी करवाए.

बच्चों का मार्गदर्शन करना समय-समय पर जरूरी है जिससे बच्चे अपने लिए सही राह चुन सके. लेकिन इस मानसिकता का उपयोग कभी ना करे की आपके बार-बार कहने से वह पढ़ लेगा. बच्चे पढ़ाई को बोझ नहीं, खेल की तरह लें, ऐसा माहौल दे. बच्चे के मूड को पहचाने, उसे कोई दुख तो नही, कंही उसने अपने दोस्तों से मिलना जुलना बंद तो नहीं कर दिया? अगर आपको लगता है समस्या अधिक है तो काउन्स्लेर की सहायता में देरी ना करे. एक अच्छा करियर काउन्स्लेर आपकी चिंता को और आपके बच्चे के तनाव को जरूर कम करेगा. परीक्षा के समय बच्चों के पास समय की कमी रहती है तो अभिभावक बच्चों के काम कर दे जैसे उनके रूम को व्यवस्थित कर दे, उनकी पढ़ाई में कुछ हेल्प कर दे, उनको खाने-पीने की चीज पढ़ने वाली जगह दे, आपकी छोटी-छोटी मदद से बच्चा रिलेक्स महसूस करेगा और आपको हर वक्त अपने साथ खड़ा देख उसका मनोबल बढ़ेगा. बच्चों को पढ़ने का सही माहौल देकर तनाव को कम करना आपकी ही जिम्मेदारी है

बच्चों की असफलता या कम नम्बर आने पर निराश होकर अपनी उदासी व्यक्त ना करें. ना ही उनको ताना मारे और ना ही मजाक बनाए. उन्हें यह समझाए की असफलता का मलतब जीवन समाप्त होना नहीं होता. बल्कि असफलता तो वो मौका है जिसमें सीखने का एक अवसर और मिलता है. यह भी कहे आप जिस कारण से असफल हुए हो उस कारण को मजबूत करो और आगे बढ़ों. आपके प्रोत्साहित करने से बच्चे को परीक्षा का तनाव तो क्या जीवन का कोई भी तनाव छू भी नहीं पाएगा. क्योंकि आपकी गाइडलाइन आपके बच्चे को हर तनाव से दूर रखेगी.

बच्चों के लिए एक सलाह –

आपकी परीक्षा के साथ आपके माता-पिता भी मानसिक परीक्षा के दौर से निकलते है इसलिए अगर वे कुछ गलत कह भी दे तो बुरा ना माने और उनकी स्थति को समझे. परीक्षा के समय मेहनत का कोई विकल्प नहीं. अगर आप की तैयारी अच्छी होगी तो मार्क्स भी अच्छे आएँगे. आपके मन में यह यकीन होना चाहिए की आपके लिए कुछ भी असंभव नहीं है, अगर आप उसे पूरे मन व लगन से करते है. दोस्तों, इन टिप्स को पूरी दृढ़ता के साथ जरुर फॉलो करे यह आपको परीक्षा के तनाव से दूर रखेगा. लेकिन केवल योजना बनाने से ही बात नहीं बनती बल्कि उसके लिए दृढ प्रतिज्ञा करनी पड़ती है.

हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ है.

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