परीक्षा के तनाव को दूर कैसे करे?

जुलाई 2, 2017

आज की दुनिया में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जहाँ गला-काट प्रतियोगिता का माहौल ना हो। इस माहौल में बच्चों से लेकर बड़े तक सभी पिस रहे है। तो ऐसे में तनाव ना ले यह कहना, मानों ऐसा लगता है जैसे मजाक कर रहे है। परीक्षा का तनाव एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। किसी भी तरह के दबाव को जरूरत से ज्यादा लेना ही तनाव है। ठीक इसी तरह परीक्षा का दबाव भी बच्चों को तनाव दे रहा है। आपका बच्चा चाहे पढ़ने में कितना भी होशियार हो या ना हो, लेकिन थोड़े बहुत परीक्षा के तनाव से तो ग्रस्त होगा ही। थोड़ा बहुत तनाव तो बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करता है लेकिन इसकी अधिकता विपरीत परिणाम भी दे सकती है।

परीक्षा अगर सर पर मंडरा रही हो तो बच्चों का तनाव की स्थिति में आना लाजमी है। यह तनाव का सिलसिला परीक्षा देने तक ही सीमित नहीं रहता बल्कि परिणाम आने तक बना रहता है। इस समस्या से सिर्फ बच्चे ही नहीं बल्कि पेरेंट्स भी जूझते है। बच्चे अगर परीक्षा का तनाव ले रहे है तो यह उनकी तैयारी पर बहुत भारी पड़ सकता है। दरअसल, विशेषज्ञ और कई अध्ययनों में इस तर्क को साबित भी किया गया है कि हाई स्ट्रेस से व्यक्त‍ि की यादाश्त कमजोर हो जाती है जिसका असर सोचने-समझने व फैसले लेने की क्षमता पर पड़ता है। आइये जानें परीक्षा के समय तनाव क्यों होता है, इसके क्या लक्षण है और इससे कैसे बचा जाए।

तनाव के कुछ शारीरिक और मनोवैज्ञानिक लक्षण-

पढ़ाई का बहुत प्रेशर होने के कारण बच्चों में कुछ इस तरह के लक्षण नजर आते है जैसे – लगातार सर में दर्द, बदन दर्द, बेचैनी, कुछ याद ना रहना, पढ़ने में मन ना लगना, जिद्दी या चिड़चिड़ा होना, निराशा, आक्रोश, ईर्ष्या, अकेले रहना या बात ना करना, खाना ना खाना, सोने-उठने की आदत में लापरवाही, टीवी और सोने में अधिक समय देना, घहबराहट के कारण ठीक से लिख ना पाना जैसे कई लक्षण दिखने लगते है।

तनाव के कारण-

ना जानें ऐसे और कितने कारण होते है बच्चों के पास, जिनसे उनका स्ट्रेस बढ़ता है। कारण चाहे जो भी हो अगर हम चाहे तो हर कारण का निवारण कर सकते है। अगर समस्या है तो समाधान भी है। सबसे पहले अपने तनाव के कारण को खोजे फिर थोड़ा सोचे, आप महसूस करेंगे की आप समाधान तक पहुँच चुके है। आइये ऐसे ही कुछ समाधान पर नजर डाले जिससे आपकी कुछ मदद हो सके।

कैसे करे परीक्षा के तनाव को दूर-

परीक्षा के समय मेहनत तो करनी पड़ती है लेकिन इसका मतलब यह नहीं आप तनाव लो। अधिक सोचने से आपका मोरल वीक होगा। अधिकांश बच्चे परीक्षा के समय में अपने पढ़ने के समय को इतना बढ़ा देते है की पूरा दिन किताब से ही चिपके रहते है। यह मानसिकता बच्चों में अधिक तनाव पैदा करती है जो किसी भी बच्चे के लिए सही नहीं हैं।

बच्चों की परीक्षा के वक्त अभिभावक क्या करे-

बच्चों पर भावनात्मक या मानसिक दबाव ना बनाए। उन्हें पढाई के लिए प्रोत्साहित जरूर करें। अपने अनुभव के आधार पर इजी ट्रिक्स बताए, जिससे उनकी मदद हो सके। बच्चों की क्षमता के अनुरूप ही अपेक्षाए रखे। अपनी अधूरी इच्छाओं को थोपने की कोशिश ना करे, जिससे बच्चे झेल ना पाए। बच्चों को घर में पढ़ाई का अच्छा और शांत माहौल दे। जहाँ मेहमानों की आवाजाही ना हो। ध्यान भंग करने वाली सभी चीजों से दूर रखे। परीक्षा के वक्त बच्चों से बात करे, उनकी समस्या का हल निकाले। इससे बच्चों को मोरल सपोर्ट मिलेगा. बच्चों के कोर्स को टुकड़ों में बांटकर तैयारी करवाए।

बच्चों का मार्गदर्शन करना समय-समय पर जरूरी है जिससे बच्चे अपने लिए सही राह चुन सके। लेकिन इस मानसिकता का उपयोग कभी ना करे की आपके बार-बार कहने से वह पढ़ लेगा। बच्चे पढ़ाई को बोझ नहीं, खेल की तरह लें, ऐसा माहौल दे। बच्चे के मूड को पहचाने, उसे कोई दुख तो नही, कंही उसने अपने दोस्तों से मिलना जुलना बंद तो नहीं कर दिया? अगर आपको लगता है समस्या अधिक है तो काउन्स्लेर की सहायता में देरी ना करे। एक अच्छा करियर काउन्स्लेर आपकी चिंता को और आपके बच्चे के तनाव को जरूर कम करेगा। परीक्षा के समय बच्चों के पास समय की कमी रहती है तो अभिभावक बच्चों के काम कर दे जैसे उनके रूम को व्यवस्थित कर दे, उनकी पढ़ाई में कुछ हेल्प कर दे, उनको खाने-पीने की चीज पढ़ने वाली जगह दे, आपकी छोटी-छोटी मदद से बच्चा रिलेक्स महसूस करेगा और आपको हर वक्त अपने साथ खड़ा देख उसका मनोबल बढ़ेगा। बच्चों को पढ़ने का सही माहौल देकर तनाव को कम करना आपकी ही जिम्मेदारी है।

बच्चों की असफलता या कम नम्बर आने पर निराश होकर अपनी उदासी व्यक्त ना करें। ना ही उनको ताना मारे और ना ही मजाक बनाए। उन्हें यह समझाए की असफलता का मलतब जीवन समाप्त होना नहीं होता। बल्कि असफलता तो वो मौका है जिसमें सीखने का एक अवसर और मिलता है। यह भी कहे आप जिस कारण से असफल हुए हो उस कारण को मजबूत करो और आगे बढ़ों। आपके प्रोत्साहित करने से बच्चे को परीक्षा का तनाव तो क्या जीवन का कोई भी तनाव छू भी नहीं पाएगा। क्योंकि आपकी गाइडलाइन आपके बच्चे को हर तनाव से दूर रखेगी।

बच्चों के लिए एक सलाह-

आपकी परीक्षा के साथ आपके माता-पिता भी मानसिक परीक्षा के दौर से निकलते है इसलिए अगर वे कुछ गलत कह भी दे तो बुरा ना माने और उनकी स्थति को समझे। परीक्षा के समय मेहनत का कोई विकल्प नहीं। अगर आप की तैयारी अच्छी होगी तो मार्क्स भी अच्छे आएँगे। आपके मन में यह यकीन होना चाहिए की आपके लिए कुछ भी असंभव नहीं है, अगर आप उसे पूरे मन व लगन से करते है। दोस्तों, इन टिप्स को पूरी दृढ़ता के साथ जरुर फॉलो करे यह आपको परीक्षा के तनाव से दूर रखेगा। लेकिन केवल योजना बनाने से ही बात नहीं बनती बल्कि उसके लिए दृढ प्रतिज्ञा करनी पड़ती है।

आपको यह लेख कैसा लगा? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे. स्वस्थ रहे, खुश रहे।

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