जानिए कितना खतरनाक है अफगानिस्तान में गिराया गया बम ‘GBU-43’

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अमेरिका ने गुरुवार शाम को अफगानिस्तान स्थित आतंकियों के ठिकानों पर हमला बोल कर पूरी दुनिया को चौंका दिया। अमेरिका ने अफगानिस्तान के नानागढ़ के अचिन शहर में IS आतंकियों द्वारा बनाई गई सुरंगों को अपना निशाना बनाया। बताया जाता है इन सुरंगों में करीब 7000 IS आतंकी छुपकर बैठे थे। जहां अमेरिका ने बम गिराया अफगानिस्तान वो जगह पाकिस्तान बॉर्डर से मात्र 1 घंटे की दूरी पर था।

अमेरिका ने ISIS आतंकी और इनके अफगानिस्तान स्थित ठिकानों को ध्वस्त करने के लिए दुनिया के सबसे बड़े बम का सहारा लिया। इस बम का नाम है GBU-43 जो बहुत ही खतरनाक है। यह बम अमेरिका द्वारा सीरिया में गिराए गए बमों से भी करीब 21 गुना ज्यादा भारी है।

जहाँ ये बम गिरता है वहां का करीब 1.5 किलोमीटर का क्षेत्र तहस-नहस हो जाता है वहां करीब 300 मीटर चौड़ा गड्ढा भी बना देता है। जहां यह बम गिरता है उस जगह से करीब 30-32 किलोमीटर दूर तक इसका धुआं उठता है और वहां तक इसकी गंध साफ़ सूंघी जा सकती है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया को संबोधित करते हुए स्वीकारा कि उन्होंने ही अपनी आर्मी को अफगानिस्तान में बने ISIS आतंकियों के सुरंगी ठिकानों को ध्वस्त करने की इजाजत दी थी। डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी आर्मी को सराहते हुए कहा कि आर्मी ने अपना काम बखूबी निभाया।

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में उत्तर कोरिया को भी सतर्क होने के इशारे कर दिए। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा “उत्तर कोरिया भी एक बड़ी समस्या है और जल्द ही इस समस्या का समाधान निकाला जाएगा”।

आइए जानते हैं GBU-43 बम की क्या खासियत है और किस स्तर तक तबाही मचाता है यह बम।

GBU-43 बम

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा था कि हमने ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब’ गिराया है और यह वही बम है जिसे मेसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट बॉम्ब (MOAB) के नाम से भी जाना जाता है, आपको बता दें की यह बम सबसे बड़ा नॉन-न्युक्लीयर बम है। 8164 किलो विस्फोटक से भरा यह बम करीब 10000 किलो वजनी होता है जो गिरने वाली जगह के करीब 1.5 मील के दायरे वाले क्षेत्र को तहस नहस कर देता है।

कब और किसने बनाया GBU-43 बम

यह बम US एयरफोर्स की स्पेशल एक्सक्लूसिव यूनिट द्वारा साल 2002 में बनाया गया था और 2003 में इसे पहली बार टेस्ट किया गया और उस समय US की इराक से लड़ाई चल रही थी। हालांकि US एयरफोर्स ने इस बम का इस्तेमाल इराक पर हमला करने के लिए बनाया गया था लेकिन वहां की एडमिनिस्ट्रेशन ने उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी।

GBU-43 बम की कीमत

10000 किलो वजनी एक GBU-43 बम को बनाने में करीब 103 करोड़ रुपए की लागत आती है। इस बम की लंबाई करीब 9 मीटर की है जबकि यह 1 मीटर चौड़ा है। इस बम में 11 टन एच-6, टीएनटी और एल्युमीनियम विस्फोटक भरा होता है जिसकी मारक क्षमता 1.5 मील एरिया को तबाह करने की होती है।

रूस का FOAB (फादर ऑफ ऑल बॉम्ब)

अमेरिका द्वारा 2003 में तैयार किए गए GBU-43 बम के बाद रूस ने भी 2007 में इस बम को टक्कर देने वाला एक बम तैयार किया था जिसे रूस ने FOAB (फादर ऑफ ऑल बॉम्ब) नाम दिया। हालाँकि रूस ने इस बम के बारे में ऑफिशियली कोई जानकारी नहीं दी है।

बम बनाने का मकसद

जब 2003 में अमेरिका की इराक से लड़ाई चल रही थी तो उस समय सद्दाम हुसैन को डराने के मकसद से US एयरफोर्स द्वारा यह बम तैयार किया गया था और इसके लॉन्च का वीडियो जारी किया गया था। उस समय इराक पर हमला करने के मकसद से ही इस बम को बनाया गया था लेकिन अंत मौके पर सरकार ने इस बम का इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी। अमेरिका चाहता था कि इस बम को ट्रंप कार्ड की तरह इस्तेमाल किया जाए। क्योंकि जहां यह बम गिरेगा वहां के कई किलोमीटर तक तबाही फैल जाएगी। अमेरिका का इस बम को इस्तेमाल करने का टारगेट हमेशा से IS जैसे संगठनों को तबाह करने का रहा है और अब अमेरिका ने इसी मकसद को पूरा करते हुए अब तक का सबसे बड़ा नॉन-न्युक्लीयर बम अफगानिस्तान में स्थित ISIS आतंकियों के सुरंगी ठिकानों पर हमला कर पूरा किया।

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