अल्जाइमर रोग क्या है?

ये तो आप जानते ही हैं कि एक तेज़ दिमाग हर मुश्किल का हल आसानी से निकाल लेता है और ऐसे तेज़ दिमाग की मेमोरी भी बहुत शार्प होती है लेकिन क्या हो? अगर दिमाग अपना काम करना ही छोड़ दे और मेमोरी इतनी कमज़ोर हो जाये कि अपने आप को याद रखना ही मुश्किल हो जाए। ऐसे में व्यक्ति के लिए अपनों को पहचानना भी बहुत मुश्किल हो जाता है और ऐसी स्थिति अल्जाइमर रोग में होती है जो एक ऐसी मानसिक बीमारी है जो किसी को भी हो सकती है। ऐसे में इसके बारे में जानकारी लेना बेहतर साबित होगा क्योंकि इसके बारे में जानने के बाद ही तो इससे बचाव का रास्ता दिखाई देगा। तो चलिए, आज जानते हैं अल्जाइमर रोग के बारे में-

इस बीमारी का नाम अलोइस अल्जाइमर के नाम पर रखा गया है जिन्होंने सबसे पहले इस बीमारी के बारे में बताया।

अल्जाइमर रोग तेज़ी से फैलने वाले रोगों में शामिल हो गया है और इसके कारणों में अनियमित जीवनशैली भी एक प्रमुख कारण है। इस बीमारी में दिमाग की कोशिकाएं अपने आप बनने लगती हैं और अपने आप ही खत्म भी होने लगती हैं। इसे ‘भूलने का रोग’ भी कहा जा सकता है। हालाँकि अल्जाइमर रोग के स्पष्ट लक्षण अभी तक ज्ञात नहीं हुए हैं लेकिन ये स्पष्ट है कि इस रोग में मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुँचता है। एक स्वस्थ मस्तिष्क की तुलना में अल्जाइमर मस्तिष्क में कोशिकाओं की संख्या बहुत ही कम होती है और मौजूद जीवित कोशिकाओं के बीच सम्बन्ध भी बहुत कम होता है।

समय बीतने के साथ ये बीमारी बढ़ती जाती है और ख़तरनाक होती जाती है। ज़्यादातर लोगों में अल्जाइमर रोग आनुवंशिक कारणों, अनियमित जीवनशैली और पर्यावरणीय कारणों के संयोजन से होता है। इसके अलावा कुछ और कारणों से इस रोग के होने का खतरा बढ़ जाता है जैसे-

  • सिर पर लगी हुयी कोई पुरानी चोट
  • परिवार के किसी सदस्य को ये रोग होना
  • स्लीप एप्निया जैसी नींद सम्बन्धी बीमारी होना
  • उम्र 85 साल से ज़्यादा होना, लेकिन लाइफस्टाइल में आये बदलावों के कारण 60 साल की उम्र में भी ये बीमारी होने की सम्भावना काफी बढ़ गयी है।
  • हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और मोटापा होने की स्थिति में इस रोग का ख़तरा काफी बढ़ जाता है।

अल्जाइमर रोग के लक्षण –  इस रोग के शुरुआती लक्षण इतने सूक्ष्म होते हैं कि ये अंदाज़ा लगाना मुश्किल होता है कि ये किसी मानसिक रोग के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं जैसे-

  • रोज़ काम आने वाली चीज़ों को रखकर भूल जाना
  • समस्या का हल निकालने में मुश्किल होना
  • रंगों में अंतर नहीं कर पाना
  • सामान्य कामों को करने में ज़्यादा समय लेना
  • मनोदशा में बदलाव होना और चिंता का बढ़ना जैसे सामान्य लगने वाले संकेत अल्ज़ाइमर जैसे गंभीर मानसिक रोग की आहट हो सकते हैं इसलिए सतर्क रहना ज़रूरी है।

इस रोग की शुरुआत होने के बाद लक्षणों में भी बदलाव आता है यानि ये रोग जब मध्य अवस्था में पहुँच जाता है तो-

  • परिवारजन और मित्रों को पहचानने में दिक्कत होने लगती है
  • पढ़ने-लिखने, भाषा को समझने और संख्याओं से सम्बंधित काम करने में कठिनाई अनुभव होने लगती है
  • स्वभाव अनियंत्रित होना यानि असमय बेचैनी, चिड़चिड़ापन, रोना, गुस्सा करना।
  • सही तरीके से सोचकर सही निर्णय लेने में मुश्किल होना
  • वहम, भ्रम और पागलपन की स्थिति होना।

अल्जाइमर रोग जब इस स्थिति तक पहुँच जाता है तो उसके बाद इस रोग के गंभीर लक्षण दिखाई देने लगते हैं जैसे-

  • स्किन इन्फेक्शन होना
  • वजन कम होना
  • दौरे पड़ना
  • निगलने में तकलीफ होना
  • आहें भरना, कराहना
  • मूत्राशय और आंत नियंत्रण में कमी होना

अल्जाइमर से बचाव – अल्जाइमर रोग होने पर मस्तिष्क में एसिटाइल कोलिन की कमी हो जाती है इसलिए इस रोग को गंभीर होने से बचाने के लिए ऐसी दवाएं दी जाती हैं जिनसे एसिटाइल कोलिन का लेवल कण्ट्रोल में रहे। इस बीमारी के सफल उपचार के लिए ये जरुरी है कि इसका पता जल्द से जल्द शुरुआती स्तर पर ही लग जाए।

इसके अलावा अल्जाइमर जैसे गंभीर रोग से बचाव के लिए ये उपाय करने चाहिए–

आहार में शामिल करें ये चीजें – रिसर्च के अनुसार, 40 साल की उम्र के बाद अपने आहार में टमाटर, बादाम, जौ और मछली जैसी चीजें शामिल करें ताकि मस्तिष्क की कोशिकाएं स्वस्थ बनी रहें।

नियमित रूप से पढ़ते-लिखते रहें – दिमाग को दुरुस्त रखने के लिए ये जरुरी है कि दिमाग को नियमित रूप से काम में लिया जाये। अमेरिका में हुयी शोध के अनुसार, नियमित रूप से पढ़ने-लिखने और शतरंज जैसे खेल खेलने से दिमाग ज़्यादा दुरुस्त रहता है।

झपकी लेना रहेगा फायदेमंद – अगर आप भी दिन में झपकी लेते हैं तो ये आपके दिमाग के लिए फायदेमंद हो सकता है और ये बात साइंटिफिक रिसर्च से भी साबित हो गयी है कि दिन में एक बार झपकी लेने वाले छात्रों की सीखने की क्षमता बढ़ जाती है जबकि दिनभर जागने वाले छात्रों की सीखने की क्षमता में धीरे-धीरे कमी आने लगती है।

मानसिक व्यायाम करें – मस्तिष्क को मजबूत बनाने के लिए मानसिक व्यायाम करना चाहिए। इसके लिए कोई नयी भाषा सीखी जा सकती है और ब्रेन गेम जैसे क्रॉस वर्ड और सुडोकू खेला जा सकता है। शतरंज जैसे चैलेंजिंग गेम खेलने से भी मेन्टल एक्सरसाइज होती है।

इसके अलावा धूम्रपान जैसी आदतों से दूर रहना भी अल्जाइमर से बचाव के लिए जरुरी है।

दोस्तों, अब आप जान चुके हैं कि अल्जाइमर रोग दिमाग से जुड़ा एक मानसिक रोग है जिसमें याद्दाश्त कमजोर हो जाती है। इसके साथ ही आप इसके कारण और इससे बचाव के तरीके भी जान चुके हैं इसलिए अपने दिमाग के स्वास्थ्य का ख्याल रखिये ताकि आपकी याद्दाश्त से कोई भी खट्टी-मीठी याद धुंधली ना हो सके।

किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर ले। हमने आपसे सिर्फ ज्ञानवर्धक जानकारी साझा की है। कोई भी प्रयोग आजमाने से पहले अपनी सूझ-बुझ का इस्तेमाल जरूर करे। सदैव खुश रहे और स्वस्थ रहे।

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