एंजियोप्लास्टी सर्जरी क्या होती है?

आजकल दिल से जुड़ी कई बीमारियां होने लगी हैं लेकिन अच्छी बात ये है कि अब दिल से जुड़ी कई बीमारियों का समय रहते पता भी लगाया जा सकता है और वक़्त रहते इलाज भी संभव हो गया है। दिल से जुड़ी ऐसी ही एक समस्या है धमनियों में ब्लॉकेज का होना जिसे तुरंत खोला जाना जरुरी होता है। दिल की धमनियों में आये इस ब्लॉक को ऑपरेशन के ज़रिये खोलने का तरीका है एंजियोप्लास्टी सर्जरी। ये सर्जरी क्या होती है और कैसे की जाती है, ऐसी ही कुछ जरुरी बातें जान लेना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है इसलिए आज हम एंजियोप्लास्टी सर्जरी के बारे में बात करते हैं –

एंजियोप्लास्टी सर्जरी की जरुरत कब पड़ती है – दरअसल कोरोनरी धमनियां दिल की मांसपेशियों को रक्त पहुंचाती है और ये रक्त ऑक्सीजन और पोषक तत्वों से भरपूर होता है लेकिन जब एस्थ्रोस्क्लोरोसिस के कारण धमनियों में रूकावट आ जाती है तो ये दिल की मांसपेशियों को ब्लड सप्लाई करना कम कर देती हैं और एंजाइना का निर्माण शुरू कर देती है। ऐसी स्थिति में ब्लॉकेज की समस्या वाले कुछ मरीजों में एंजियोप्लास्टी सर्जरी करना ज़रूरी हो जाता है।

एंजियोप्लास्टी सर्जरी क्यों जरुरी है – शरीर के बाकी हिस्सों की तरह हृदय को भी रक्त की निरंतर आपूर्ति की जरुरत होती है। ये ब्लड सप्लाई दो बड़ी रक्त वाहिकाएं करती हैं यानी बायीं और दायीं कोरोनरी धमनियां। उम्र बढ़ने के साथ ये धमनियां सख्त और संकुचित होने लगती हैं और इनके सख्त होने से हृदय में रक्त प्रवाह में रूकावट आने लगती है जिसके कारण एंजाइना का निर्माण हो सकता है। एंजाइना का सामान्य लक्षण सीने में दर्द होना होता है।

एंजाइना के कई मामलों में दवा से इलाज हो जाता है लेकिन अगर एंजाइना गंभीर हो जाए तो हृदय तक निरंतर रक्त आपूर्ति के लिए कोरोनरी एंजियोप्लास्टी करना जरुरी हो जाता है। अक्सर दिल का दौरा पड़ने के बाद कोरोनरी एंजियोप्लास्टी आपातकालीन उपचार के रूप में भी की जाती है।

एंजियोप्लास्टी सर्जरी कैसे की जाती है – हृदय एंजियोप्लास्टी को पीटीसीए (परकुटेनियस ट्रांसलुमिनल कोरोनरी एंजियोप्लास्टी) या बैलून एंजियोप्लास्टी भी कहा जाता है। इस प्रक्रिया में ब्लड फ्लो को बेहतर बनाने के लिए कैथेटर के आख़िर में लगे बैलून का उपयोग रक्त धमनी को खोलने के लिए किया जाता है। इसे खोलने के लिए तार की नली जैसे छोटे उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है जिसे स्टेंट कहते हैं। इस प्रक्रिया में बैलून धमनी या शिरा के अंदर जमा हुयी वसा को खत्म कर देता है और रक्त के निरंतर प्रवाह का रास्ता खुल जाता है।

एंजियोप्लास्टी की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि ब्लॉकेज कौन सी आर्टरी में हुआ है। पैरीफेरल आर्टरी में एंजियोप्लास्टी सर्जरी लगभग 98% तक सफल रहती है। इस सर्जरी के बाद करीब 10% मरीजों में फिर से ब्लॉकेज होने की आशंका रहती है। अगर ब्लॉकेज का जल्दी पता चल जाये तो एंजियोप्लास्टी के सफल होने की सम्भावना और भी ज़्यादा बढ़ जाती है और अब शरीर की सभी आर्टरीज की एंजियोप्लास्टी कर पाना भी संभव हो गया है।

अब ये आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप अपने दिल का बखूबी ख्याल रखें और किसी भी तरह की तकलीफ, जैसे सीने में दर्द को भी अनदेखा करने की बजाये तुरंत डॉक्टर से मिलें क्योंकि ये तो आप भी जानते ही हैं कि आपके अपनों के लिए आप कितने जरुरी हैं। ऐसे में अपने दिल का ख्याल रखने से चूकिए मत और अपनों के साथ स्वस्थ बने रहिये।

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