एन्हेडोनिया क्या है?

एन्हेडोनिया से ग्रस्त व्यक्ति को ऐसी कोई भी एक्टिविटी करना अच्छा नहीं लगता है जो पहले उसे पसंद हुआ करती थी और इस स्थिति में व्यक्ति खुशी का अनुभव करना भी बंद कर देता है। इसे डिप्रेशन का एक संकेत माना जा सकता है लेकिन ये अन्य मानसिक विकारों का कारण भी हो सकता है।

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एन्हेडोनिया के प्रकार-

  • सामाजिक – सामाजिक एन्हेडोनिया में सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहने में अरुचि होने लगती है।
  • शारीरिक – शारीरिक एन्हेडोनिया में शरीर सम्बन्धी गतिविधियों जैसे खाना और सेक्स में अरुचि पैदा हो जाती है।

एन्हेडोनिया के लक्षण-

  • समाज से दूरी बना लेना
  • स्वयं और दूसरों के प्रति नकारात्मक व्यवहार
  • संबंधों की कमी या सम्बन्ध विच्छेद होना
  • भावनात्मक क्षमताओं में कमी
  • सामाजिक परिस्थितियों में समायोजन करने में तकलीफ
  • बनावटी खुशी जाहिर करना
  • अस्वस्थ महसूस करने की प्रवृति

एन्हेडोनिया के कारण-

  • डिप्रेशन के इलाज के लिए दी जाने वाली दवाएं
  • तनाव और चिंता का बढ़ा हुआ स्तर

एन्हेडोनिया का इलाज-

इसका इलाज करने से पहले इसे डायग्नोस करना जरुरी होता है। इसके लिए डॉक्टर द्वारा सम्बंधित व्यक्ति से उसके स्वभाव से जुड़े सामान्य सवाल पूछे जाते हैं। इस दौरान अगर डॉक्टर को अपने व्यवहार में आये बदलाव के बारे में सटीक जानकारी दी जाये तो इसका निदान करना बहुत आसान हो सकता है इसलिए डॉक्टर से परामर्श करने से पहले अपने स्वभाव में आये बदलावों की एक लिस्ट बना लेना बेहतर होगा।

इसके अलावा डॉक्टर द्वारा थाइरॉइड प्रॉब्लम और विटामिन की कमी जैसी शारीरिक समस्याओं के बारे में भी पता किया जा सकता है क्योंकि मूड में आने वाले बदलावों का कारण ये फिजिकल डिसऑर्डर भी हो सकते हैं।

एन्हेडोनिया का इलाज करने के लिए मेन्टल हेल्थ प्रोफेशनल का होना जरुरी होता है जो केस स्टडी करके ट्रीटमेंट का सही तरीका इस्तेमाल करते हैं।

ट्रीटमेंट के लिए एन्टीडिप्रेशन मेडिसिन दी जाती है लेकिन अगर इससे फायदा नहीं होता है तो Transcranial magnetic stimulation (TMS) या Vagus nerve stimulation (VNS) का इस्तेमाल किया जाता है और इनमें से किसी भी थेरेपी से फायदा ना मिलने की स्थिति में आखिरी विकल्प के रूप में Electroconvulsive therapy (ECT) से ट्रीटमेंट किया जाता है जो डिप्रेशन के लिए सबसे प्रभावी थेरेपी है।

एन्हेडोनिया से बचाव के लिए डिप्रेशन को सामान्य समझने की बजाये डॉक्टर से तुरंत संपर्क किया जाना चाहिए ताकि डिप्रेशन को बढ़ने से रोका जा सके और जिंदगी की हर छोटी-बड़ी खुशी को फिर से महसूस किया जा सके।

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