जानवर भी सिखाते हैँ प्यार की भाषा

हर व्यक्ति के जीवन मेँ, उसके रिश्तोँ मेँ कभी न कभी उतार-चढाव अवश्य आते हैँ। कुछ लोग अपने प्रेम, धैर्य व समझदारी से हर रिश्ते को आसानी से संजो लेते हैँ, वहीँ कुछ लोग रिश्तोँ व प्यार मेँ खरे उतरने मेँ नाकाम हो जाते हैँ। अगर आप भी रिश्तोँ को सम्भालने मेँ असमर्थ महसूस करते हैँ तो एक बार अपने पालतू जानवर की ओर नजर घुमाकर देखिए। वह भी आपको प्यार का पाठ पढाएंगे। जरूरी नहीँ है कि आप प्यार की भाषा सीखने के लिए किसी डॉक्टर या विशेषज्ञ के कमरे मेँ घंटोँ बिताएँ। आप चाहेँ तो इन पालतू जानवरोँ से भी बहुत कुछ सीख सकते हैँ।

शर्तोँ मेँ रिश्ता नहीँ

प्रेम व रिश्ते कभी भी शर्तोँ के आधार पर नहीँ बनते। जिन रिश्तोँ मेँ शर्तेँ होती हैँ, उनका लम्बे समय तक टिकना बेहद ही मुश्किल होता है। आपके पालतू जानवर भी जब आपको प्रेम देते हैँ या आपके लिए कोई कार्य करते हैँ तो उसके पीछे उनका कोई मकसद या शर्त नहीँ होती। इतना ही नहीँ, वह अपने फायदे के लिए न तो आपको धोखा देते हैँ और न ही झूठ बोलते हैँ। एक बार सोच कर देखिए कि यदि आपके रिश्ते भी इतने ही पाक होँ तो वह आपको कितना सुकून पहुंचाएंगे।

सीखेँ माफ करना

दुनिया मेँ ऐसे बहुत कम मनुष्य ही हैँ जो आसानी से दूसरोँ को माफ कर पाते हैँ। गलतियाँ सभी से होती हैँ, इसलिए उन्हेँ माफ करना भी सीखेँ। जिस मनुष्य मेँ क्षमा करने का गुण नहीँ है तो वह दूसरोँ का नहीँ बल्कि खुद का जीवन ही बेहद कठिन बना लेता है। लेकिन जानवर ऐसे नहीँ होते। अगर आप कभी अपने पालतू जानवर को डांट भी देँ तो भी वह आपसे गुस्सा नहीँ होते बल्कि वह लौटकर आपके पास आते हैँ और आपको बेशुमार प्यार करते हैँ।

समय से सीचेँ प्रेम

आपने कभी नोटिस किया है कि जब भी आप घर पर होते हैँ तो आपके प्यारे पालतू आपको एक पल के लिए भी अकेला नहीँ छोडते। किचन से लेकर ड्राइंग रूम यहाँ तक कि बेडरूम मेँ भी अक्सर वह आपके साथ खेल रहे होते हैँ। चाहेँ आप परेशान होँ या खुश, वह आपके साथ हर फीलिंग शेयर करते हैँ। इतना ही नहीँ, उनके साथ समय बिताकर आप अपनी परेशानी भूलकर एकदम फ्रेश हो जाते हैँ। लेकिन रिश्तोँ को समय देने के लिए आपके पास वक्त नहीँ होता। एक बात गांठ बान्ध लेँ कि जब तक आप अपने रिश्ते रूपी पौधे को समय व प्रेम की खाद से नहीँ सीचेंगे तो वह कभी भी मजबूत पेड नहीँ बनेगा।

रहेँ रियल

मनुष्य अपना जीवन कई मुखौटोँ के साथ जीता है, फिर चाहे बात घर की हो या बाहर की। हर जगह के लिए हमारे पास एक मुखौटा है। मुखौटोँ के साथ जीवन जीते हुए हम अपने वास्तविक चेहरे को ही नहीँ पहचान पाते। लेकिन जानवर हमेशा रियल ही होते हैँ। वह जगह, लोग और अपनी सुविधा के अनुसार अपना व्यक्तित्व व व्यवहार नहीँ बदलते। एक बार आप भी अपने रिलेशनशिप मेँ रियल होकर देखिए। यकीनन आपको प्यार की एक नई परिभाषा देखने को मिलेगी और आप पहले से काफी खुश रहना सीख जाएंगे।

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