एंटीमैटर क्या होता है?

जानते हैं प्रतिद्रव्य यानी एंटीमैटर क्या होता है। एंटीमैटर (प्रतिद्रव्य) का नाम सुनकर आपको इतना अंदाज़ा तो हुआ ही होगा कि एंटीमैटर में मैटर के विपरीत गुण हो सकते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, एंटीमैटर असल में मैटर यानी पदार्थ के समान ही होते हैं लेकिन इसके एटम में हर चीज़ उलटी होती है। एटम में जहाँ पॉजिटिव चार्ज वाले प्रोटोन्स और नेगेटिव चार्ज वाले इलेक्ट्रॉन्स होते हैं वहीँ एंटीमैटर के एटम में नेगेटिव चार्ज वाले प्रोटोन्स और पॉजिटिव चार्ज वाले इलेक्ट्रॉन्स होते हैं।

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एंटीमैटर की उत्पत्ति और अंत – ब्रिटिश भौतिकविद् पॉल डिराक ने 1928 में एक थ्योरी प्रतिपादित की, जिसके अनुसार जब एनर्जी मैटर में बदलती है तो एक पार्टिकल और एक एंटी-पार्टिकल को उत्पन्न करती है। जब पार्टिकल और एंटी-पार्टिकल टकराते हैं तो ऊर्जा की चिंगारी के बीच ये दोनों एक दूसरे को नष्ट कर देते हैं।

यदि ये माना जाए कि ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के समय सभी चीज़ें समान मात्रा में थी तो मैटर और एंटी-मैटर की मात्रा भी समान होनी चाहिए जबकि आज मैटर का आधिक्य है और एंटी-मैटर दुर्लभ है।

इस असंतुलन का क्या कारण है, इसका पता भौतिकविद् भी लगाना चाहते हैं। इसके लिए वो लैब में एंटी-हाइड्रोजन का अध्ययन करके और हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ उनका मिलान करके मैटर-एंटीमैटर के असंतुलन के कारणों को जानना चाहते हैं।

इस प्रयोग के लिए हाइड्रोजन का चुनाव करने का कारण ये है कि सभी परमाणुओं में सबसे सरल परमाणु हाइड्रोजन है और एंटी-हाइड्रोजन सबसे सरल एंटीमैटर है और इन्हें लैबोरेटरी में उत्पन्न भी किया जा सकता है।

एंटीमैटर और गुरुत्वाकर्षण – नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार, एंटीमैटर एंटी-ग्रेविटी नहीं होता है बल्कि ग्रेविटी के प्रति मैटर की तरह ही व्यवहार करता है। इसकी प्रायोगिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

एंटीमैटर की ताकत – लगभग आधा किलोग्राम एंटीमैटर में दुनिया के सबसे बड़े हाइड्रोजन बम से भी ज्यादा ताकत होती है लेकिन इसकी ऊर्जा का सही तरह से इस्तेमाल करने के लिए बहुत ज्यादा धन की जरुरत होगी क्योंकि इसकी कीमत बहुत ज्यादा है।

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