जानिए कैसे करें अपने व्यक्तित्व का विकास

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क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि जब आप किसी आत्मविश्वासी और सफल व्यक्ति से मिलते हैं तो संकोच महसूस करते हैं क्योंकि आप उतने सफल और कॉन्फिडेंट नहीं है और आप ऐसे लोगों के बीच रहने में झिझक महसूस करते हैं और आपकी भी चाहत होती है कि काश मेरा व्यक्तित्व भी इतना ही प्रभावी होता कि लोग मुझसे मिलकर प्रेरित होते। ऐसे में अगर आप उन बातों को जान लें जो आपके व्यक्तित्व का विकास कर सकती हैं तो आप भी बहुत जल्द अपने प्रभावी व्यक्तित्व के लिए पहचाने जाने लगेंगे। तो चलिए, आज बात करते हैं व्यक्तित्व के विकास से जुड़े पहलुओं की –

खुद पर विश्वास बढ़ाना होगा –
आत्म विश्वास कोई जादुई चीज़ नहीं है जिसे चुटकियों में हासिल किया जा सके या फिर किसी की मदद से इसमें बढ़ोतरी की जा सके। आत्म-विश्वास असल में खुद को बेहतर तरीके से पहचानना है। अगर आपको खुद पर यकीन होगा तो आप हर कार्य को करने से पहले अपनी सीमायें और क्षमताएं जानेंगे और ऐसे में हर कार्य को आप अपनी दक्षता के साथ पूरा कर सकेंगे, स्वयं के बारे में जानना और खुद पर बनाया गया यही विश्वास असल में आत्म-विश्वास है। इसे हासिल करना बेहद आसान है। इसके लिए आप चाहे तो अपनी स्किल्स, अपनी क्षमताओं, गुणों और कमज़ोरियों को एक डायरी में लिख सकते हैं और इनमें से अपने गुणों को बनाये रखने का भरोसा खुद को दिला सकते हैं और खुद की कमज़ोरियों को सहजता के साथ स्वीकार करके, निरंतर प्रयास से दूर करने का वादा स्वयं से कर सकते हैं। ऐसा करने के दौरान आप पाएंगे कि आपका आत्म-विश्वास हर दिन के साथ बढ़ रहा है क्योंकि अब आप खुद से अनजान नहीं है और अब आप स्वयं के गुण और कमियों के बारे में अच्छे से जानते जो हैं।

अच्छी किताबें पढ़ने की आदत डालिये –
हो सकता है कि आप सोचने लगें कि आजकल किताबें कौन पढ़ता हैं लेकिन अगर आप अपने व्यक्तित्व में निखार चाहते हैं तो किताबों से अच्छा साथी आपको कहीं नहीं मिलेगा। किताबों से मिलने वाला ज्ञान आपके विकास में सहायक बनेगा और जितना अच्छा और गहरा आपका ज्ञान होगा, उतने ही प्रभावी ढंग से आप अपनी बात दुनिया के सामने रख सकेंगे और ज्ञान से मिलने वाला आत्मविश्वास भी इस अभिव्यक्ति में आपका पूरा साथ देगा।

सुनने की क्षमता भी विकसित करनी होगी –
प्रभावी तरीके से बोलने के लिए निरंतर प्रयास हम सभी करते हैं लेकिन सुनने की क्षमता विकसित करने की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता जबकि सुनना भी उतना ही ज़रूरी है जितना बोलना। हम जितना खुद के ज्ञान से सीखते हैं उससे कहीं ज़्यादा हम दुनिया के अनुभवों को सुनकर सीख सकते हैं। बिना सुने कुछ भी अर्थ निकाल लेने की आदत के चलते हर कार्य में गड़बड़ी भी हो जाती है और कई बार सम्बन्ध भी प्रभावित होने लगते हैं इसलिए बेहतर यही है कि सुनने की आदत भी डालिये और देखिये कि आप में धैर्य और संयम जैसे गुण भी विकसित होने लगेंगे जो आपके व्यक्तित्व में चार चाँद लगा देंगे।
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शारीरिक हाव-भाव पर ध्यान दीजिये –
आपकी बॉडी लैंग्वेज आपके व्यक्तित्व के बारे में काफी कुछ बता देती है। ऐसे में आपको पता होना चाहिए कि आपके कौनसे हावभाव क्या संकेत दे रहे हैं इसलिए बॉडी लैंग्वेज के बारे में थोड़ी जानकारी जुटाइये और साथ ही साथ अपने उठने-बैठने, चलने-फिरने, बोलने और खाना खाने जैसे तरीकों को प्रभावी बनाइये। ऐसा करके आप अपने व्यक्तित्व के बाहरी पक्ष को भी काफी विकसित कर लेंगे।

सकारात्मक सोच है अनिवार्य –
व्यक्तित्व को विकसित करने के लिए ढेरों प्रयास किये जा सकते हैं लेकिन अगर सोच को सकारात्मक ना रखा जाए तो किये गए सभी प्रयास पूरी तरह सफल हो ही नहीं सकते क्योंकि सकारात्मक सोच ही हर कार्य के अच्छे पहलू की ओर ध्यान केंद्रित करती है और हर असफलता से सीख लेकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है इसलिए अपने प्रयासों में तेज़ी लाने के साथ-साथ अपनी सोच को हर समय स्थिर और सकारात्मक बनाये रखने का अभ्यास करते रहिये।

कुछ कर गुजरने का इरादा अगर बुलंद हो और सोच पॉजिटिव हो तो कोई भी कार्य सरलता से किया जा सकता है और जब व्यक्तित्व का विकास करना हो तो ये कार्य तो आपके अपने हाथ में है कि आप कैसा व्यक्तित्व बनाना चाहते हैं। अगर कोई व्यक्ति आपकी प्रेरणा हैं तो उनके सद्गुणों को अपनाने का प्रयास करिये और अगर किसी व्यक्ति का स्वभाव आपको पसंद नहीं आता, तो उस व्यक्ति के उन अवगुणों को खुद में शामिल मत होने दीजिये। इसके अलावा व्यक्तित्व को प्रभावी रूप से विकसित करने का सबसे आसान और सरलतम तरीका है चेहरे पर मुस्कान रखना क्योंकि मुस्कुराते चेहरे अपने आप ही सामने वाले को प्रभावित कर देते हैं इसलिए मुस्कुराते रहिये, सीखते रहिये और अपने व्यक्तित्व का मनचाहा विकास कर लीजिये।

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