भावनाओं को काबू करने के सरल उपाय

नवम्बर 28, 2017

अगर आप भी अपनी भावनाओं को सही तरीके से, सही जगह पर प्रस्तुत कर पाने में मुश्किल महसूस करते हैं और अगर आपको भी लगता है कि आपकी भावनाएं आपके काबू में नहीं हैं बल्कि आप पर आपकी भावनाओं का नियंत्रण है तो ये वाकई एक मुश्किल स्थिति है जिससे निजात पाने के लिए कुछ प्रयास तो करने ही होंगे और आप जानते हैं कि प्रयास करके सारी मुश्किलें दूर की जा सकती हैं। तो चलिए, आज इसी बारे में बात करते हैं कि अपनी भावनाओं को काबू करने के लिए क्या प्रयास किये जाने चाहिए–

नकारात्मक लोगों की संगत से बचिए – अक्सर नकारात्मक विचारों के प्रभाव में आकर ग़लत निर्णय लेना और अपनी अनियंत्रित भावनाओं का प्रदर्शन करके अपनी छवि और अपने संबंधों पर विपरीत प्रभाव डालने से बेहतर होगा कि आप ऐसे लोगों की संगत से दूर रहें जो नेगेटिव सोच रखते हो जिसके कारण आपके सोचने-समझने का नज़रिया भी जटिल हो गया हो। जिसके चलते हर सामान्य सी बात भी आपको ग़लत दिखाई देने लगती है और आप अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाते और उन छोटी सी बातों पर भी सामान्य प्रतिक्रियाएं देने की बजाए अनियंत्रित और असंयमित व्यवहार करने लगते हैं।

अकेले रहना हल नहीं है – अगर आप अपनी अनियंत्रित भावनाओं से बचने के लिए लोगों से दूरी बनाने का विकल्प चुनना चाहते हैं तो ये ज़रूर सोचिये कि अकेले रहना और अपनी भावनाओं का दमन करना किसी समस्या का हल नहीं है बल्कि ऐसा करने से आप मनोवैज्ञानिक विकारों के शिकार भी हो सकते हैं। इससे बेहतर यही होगा कि आप लोगों के बीच रहकर ही अपनी भावनाओं को काबू में रखने का अभ्यास करें।

शुरुआत कम बोलने से कर सकते हैं – अगर आपको लगता है कि बातचीत के दौरान आप संयम कब खो देते हैं, इसका अंदाज़ा आपको लगता ही नहीं है तो शुरुआती स्तर पर कम बोलने की कोशिश कीजिये। ऐसा करके आप भले ही अपनी भावनाओं पर तुरंत काबू ना पा सकें लेकिन उस अवसर पर अपनी भावनाओं को असंयमित होकर बाहर निकलने से तो रोक सकते हैं ना।

चेहरे के भाव संतुलित रखिये – कम बोलने और संयम बरतने के बावजूद आपके चेहरे के भाव सामने वाले व्यक्ति को आपकी मनोदशा बता ही देते हैं और जब आपका नियंत्रण अपनी भावनाओं पर नहीं होता है तो चेहरे के ज़रिये भावनाएं स्पष्ट रूप से ज़ाहिर हो जाती है। ऐसे में आप चेहरे के भावों को संतुलित रखने का अभ्यास करिये। किसी भी बात पर तुरंत त्योरियां चढ़ा लेना, गुस्से के भाव देना या उदासी दिखाने जैसी भावों पर धीरे-धीरे अपना नियंत्रण बनाना शुरू कीजिये क्योंकि चेहरे पर अगर हर समय एक हल्की मुस्कान बनी रहे तो कई मुश्किलें तो यूँ ही हल हो जाती हैं।

अपनी बॉडी लैंग्वेज पर ध्यान दीजिये – चेहरे के संयमित भाव जहाँ आपकी भावनाओं को संतुलित कर सकते हैं वहीँ आपकी बॉडी लैंग्वेज भी काफी मददगार साबित हो सकती है। अगर आप घबराये हुए या डरे हुए हैं तो अपनी भावनाओं को आंसुओं के रूप में प्रदर्शित करने से बेहतर होगा कि आप गहरी सांस लेकर खुद को रिलैक्स करें और अपने पोस्चर को सीधा और सजग बना लें। हाथों की उँगलियों को चटकाते रहने और आँखों को लगातार झपकाते रहने से आप अपनी कमज़ोरी और डर का साफ संकेत देते हैं। इसके बजाए अपने शरीर की सही मुद्रा बनाकर आप सबके सामने अपने आप को संतुलित भावनाओं के साथ प्रस्तुत कर सकते हैं और ऐसा करने पर आप पाएंगे कि आपका डर भी दूर हो रहा है।

योग करिये – समस्या चाहे शरीर से जुड़ी हो या भावनाओं से, इनका हल योग में निहित है। अपनी भावनाओं को काबू में करने के लिए पहले आपके मन का शांत, संतुष्ट और स्थिर होना ज़रूरी है तभी आप अपनी भावनाओं का आंकलन करने में सक्षम हो सकेंगे। इसके लिए योग करिये, आसान-प्राणायाम और ध्यान करने से आपकी तन और मन की सेहत दुरुस्त हो जायेगी और आप बड़ी आसानी से ये चुनाव कर सकेंगे कि कौनसी भावनाओं को आप अपनाना चाहते हैं और किन भावनाओं की आपको आवश्यकता नहीं है।

भावनाओं को काबू करने का काम भले ही आपको मुश्किल लगा करता होगा लेकिन अब आप जान चुके हैं कि किन आसान से उपायों को अपनाकर ऐसा कर पाना सम्भव हो सकता है इसलिए बिना देर किये, इन तरीकों को अपनाना शुरू कर दीजिये और संयम रखते हुए सच्ची कोशिश कीजिये। फिर देखिएगा, ये मुश्किल भी कैसे हल हो जाती है।

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