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भावनाओं को काबू में कैसे रखें

अपनी भावनाओं को संयमित रखना एक अच्छे व्यक्तित्व को बनाये रखने के लिए ज़रूरी होता है और अपनी भावनाओं को काबू में रखने के लिए सबसे पहले ज़रूरी होता है इन्हें जानना। हर समय हम अपनी भावनाओं के साथ ही रहते हैं लेकिन फिर भी हमारे अंदर चल रही भावना का अंदाज़ा हम नहीं लगा पाते और इसी वजह से बिना सोचे-समझे, ग़लत प्रतिक्रियाएं देकर अपने सम्बन्ध बिगाड़ लिया करते हैं। तो चलिए, आज जानते हैं कि अपनी इन भावनाओं को काबू में कैसे रखा जा सकता है –

अपनी भावनाओं को देखिये – आज तक भले ही आप इस बात से अनजान थे कि आपकी फीलिंग्स को देखना-समझना आपके अपने हाथ में है लेकिन अब आप चाहे तो अपनी फीलिंग्स को देख भी सकते हैं और समझ भी सकते हैं और ऐसा करके ही आप इन पर काबू पाने में सफल हो सकते हैं। इसके लिए आपको सिर्फ अपने बर्ताव को देखना होगा, जब भी आपकी भावनाओं में अचानक बदलाव आने लगे, उस पर प्रतिक्रिया देने से पहले अपने आप को देखिये और खुद को बताइये कि क्या आप गुस्से में हैं? क्या आप निराश हैं? क्या आप डरे हुए हैं ? अपनी भावना को देखकर स्वीकार लेना ही अपनी भावना को संयमित करने का पहला पड़ाव है।

इसका कारण जानिये – भावनाओं में होने वाले बदलाव को देखने के बाद आपको इसका कारण जानना होगा कि आखिर क्यों आप अपनी भावनाओं को काबू में नहीं कर पाते हैं। कौनसी ऐसी बातें होती हैं जो आपको अचानक परेशान कर देती हैं, रुला देती हैं या गुस्से से भर देती हैं। उन बातों और कारणों को जानने की कोशिश कीजिये, ऐसा करके आप उन बातों के नियंत्रण से मुक्त हो पाएंगे जो आपकी भावनाओं को कण्ट्रोल करके आपको मुश्किल स्थिति में डालती आयी हैं।

चुनाव करिये – भावनाओं के अनियंत्रित होने के कारण जान लेने के बाद, आप इस स्थिति में आ गये हैं कि ये समझ सकें कि किन बातों पर अपनी प्रतिक्रिया को नियंत्रित करके आप अपनी भावनाओं को सामान्य तरीके से बाहर निकाल सकते हैं। हो सके तो इस अभ्यास की शुरुआत में, ऐसी बातों से दूरी बनाये रखिये जो आपके बर्ताव को अनियंत्रित कर देती हैं और इस बात का चुनाव करिये कि आप खुद को किस रूप में देखना चाहते हैं? किसी परिस्थिति के हाथों मजबूर होकर रिएक्ट करने वाले शख्स के रूप में या हर हाल में संयमित बर्ताव करने वाले व्यक्ति के रूप में। जैसे ही आप इस बात का जवाब देंगे, आपकी भावनाएं अपने आप संयमित होनी शुरू हो जाएंगी क्योंकि आप हर हालात में शांत और स्थिर रहने वाला विकल्प ही चुनेंगे और ये तो आप जानते हैं कि आप जैसा चाहते हैं, वैसा ही अपने मन और भावनाओं को बना सकते हैं।

आप पावरफुल हैं, भावनाएं नहीं – अपनी अनियंत्रित भावनाओं के कारण आप अक्सर मुश्किल में पड़ जाते हैं लेकिन हर बार ये सोचकर रह जाते हैं कि भावनाओं को काबू में नहीं किया जा सकता। लेकिन हकीकत तो ये है कि फीलिंग्स हम पर हावी नहीं होती बल्कि हम इतने कमज़ोर बन जाते हैं कि फीलिंग्स को संभाल नहीं पाते। जब आप खुद से कहेंगे कि मैं पावरफुल हूँ, मेरी फीलिंग्स पर मेरा पूरा नियंत्रण है, मैं जब चाहूँ तब अपनी फीलिंग को बदल सकता हूँ, मेरी फीलिंग्स मेरी मालिक नहीं हैं बल्कि मैं खुद मेरा मालिक हूँ, तब आप ये यकीन कर पाएंगे कि आप किसी भी भावना के हाथों मजबूर नहीं हो सकते क्योंकि आप खुद ही अपने बॉस हैं।

परफेक्शन के पीछे मत भागिये – गुस्सा, चिंता और डर जैसी भावनाएं अक्सर आपका पीछा करती रहती हैं क्योंकि आप परफेक्शन का पीछा करते हैं। खुद के टैलेंट और किये गए काम को कम आंकते रहने की वजह से आप हमेशा ही तनाव में रहते हैं और जैसे ही आपकी कोई कमी बताई जाती है, आप संयम खो देते हैं, ग़लत जगह पर ग़लत प्रतिक्रिया दे देते हैं। इसके अलावा, खुद को परफेक्ट समझ लेने पर भी आप किसी कमी या सुधार के ख्याल से ही बौखला जाते हैं या डिप्रेस हो जाते हैं। परफेक्ट कोई नहीं होता, इस बात को समझिये और हर बार अपनी तरफ से बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश कीजिये और सुधार के लिए भी तैयार रहिये। ऐसा करके आप गुस्सा और निराशा जैसे भावों पर काफी हद तक नियंत्रण रख पाएंगे।

धीरे-धीरे अभ्यास करिये – भावनाओं को काबू में रखना चुटकियों में होने वाला काम नहीं हैं, ये एक प्रक्रिया है जिसमें से गुजरने के बाद ही आप अपनी फीलिंग्स को कण्ट्रोल करना सीख पाएंगे। शुरू में आपको ऐसा कर पाना मुश्किल लग सकता हैं लेकिन यकीन मानिये ये बहुत आसान हैं। रोज़ाना अपनी फीलिंग्स पर नज़र रखिये, उनके बेकाबू होने से पहले ही उन्हें रोक दीजिये, अपनी प्रतिक्रियाओं पर नियंत्रण रखने का अभ्यास रोज़ कीजिये और आप जानते हैं कि रोज़ाना किया हुआ छोटा-छोटा अभ्यास कुछ समय बाद ही अच्छे परिणाम देने लगता है।

आज तक आपने बहुत से मुश्किल हालातों का सामना बखूबी किया है और स्कूल के दिनों में भी कई कॉम्पीटीशन में हिस्सा लेकर आप उनमें जीते भी हैं। इस बार अपनी भावनाओं को काबू में करने के इस टास्क को भी एक मिशन या कॉम्पीटीशन ही समझ लीजिये जिसमें दो लोग हैं, आप और आपकी भावनाएं और फिर देखिये कि जीत किसकी होती है? आपकी या आपकी बेकाबू फीलिंग्स की। ये मुकाबला चुनौती भरा ज़रूर हैं क्योंकि इस बार आपका सामना खुद की भावनाओं से ही है लेकिन डरिये मत। आप जानते हैं कि आपका मुकाबला जिस किसी से भी हो, आपको चुनौतियां भी पसंद है और इनसे जीतना भी आप बखूबी जानते हैं। तो बस, देर किस बात की! इसी समय से जुट जाइये जीतने के लिए, शुभकामनायें।

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